रांची (RANCHI): झारखंड में राज्यसभा चुनाव मानो अब किसी जंग के मैदान की तरह नजर आ रहा है, जिसे लेकर राजनीतिक सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है. झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस द्वारा अपने अधिकृत उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अब चुनावी मुकाबले में नए नामों की एंट्री ने सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है. अब तक कुल छह लोगों ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र खरीदा है, जिनमें झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम, कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा, भाजपा समर्थित माने जा रहे गौरव वल्लभ, उद्योगपति परिमल नाथवानी, रवि कुमार यादव और आंध्र प्रदेश की राजनीति से जुड़े वाईएसआरसीपी (YSRCP) के पूर्व सांसद वी. विजयसाई रेड्डी शामिल हैं.
इन नामों में सबसे अधिक चर्चा परिमल नाथवानी और वी. विजयसाई रेड्डी की एंट्री को लेकर हो रही है. नाथवानी का झारखंड से पुराना रिश्ता रहा है. वे वर्ष 2008 और 2014 में झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं. उद्योग जगत में मजबूत पहचान रखने वाले नाथवानी लंबे समय तक रिलायंस समूह से जुड़े रहे हैं और राज्यसभा में झारखंड के कई विकासात्मक मुद्दों को भी उठाते रहे हैं. उनके संभावित चुनाव मैदान में उतरने से चुनावी समीकरण पूरी तरह बदलने की संभावना जताई जा रही है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि परिमल नाथवानी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हैं और उन्हें भाजपा या अन्य दलों का अप्रत्यक्ष समर्थन मिलता है, तो मुकाबला रोचक हो सकता है. ऐसे में क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक जोड़तोड़ की संभावनाओं पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. हाल के दिनों में झामुमो ने भी राज्यसभा चुनाव में खरीद-फरोख्त की आशंका जताई थी.
इसी बीच वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के पूर्व सांसद वी. विजयसाई रेड्डी का नाम सामने आने से राजनीतिक हलकों में उत्सुकता और बढ़ गई है. रेड्डी पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) हैं और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के परिवार के ऑडिटर भी रह चुके हैं. वे वर्ष 2016 से आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सदस्य रहे और वाईएसआरसीपी संसदीय दल के नेता की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. इसके अलावा वे संसद की वाणिज्य संबंधी स्थायी समिति तथा परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति से जुड़ी संसदीय समिति के अध्यक्ष भी रह चुके हैं.
हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में वाईएसआरसीपी की हार के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी. उनका नाम कथित शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में जांच एजेंसियों की पड़ताल में भी सामने आया था. ऐसे में झारखंड राज्यसभा चुनाव में उनकी संभावित मौजूदगी कई सवाल खड़े कर रही है. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वे किस राजनीतिक समर्थन के भरोसे चुनावी प्रक्रिया में शामिल हुए हैं.
राज्यसभा चुनाव के नियमों के अनुसार किसी भी उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करने के लिए कम से कम नौ विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वी. विजयसाई रेड्डी और परिमल नाथवानी जैसे उम्मीदवारों को समर्थन कौन देगा. यही कारण है कि झारखंड का यह राज्यसभा चुनाव अब केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि इसके पीछे चल रही राजनीतिक रणनीतियां और समीकरण चर्चा का विषय बन गए हैं. आने वाले दिनों में नामांकन और समर्थन की तस्वीर साफ होने के साथ ही राज्यसभा चुनाव का असली रोमांच सामने आएगा.