जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम की समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. कभी यहां मृत बच्चे के शव को ले जाने के लिए परिजनों को स्ट्रेचर नहीं मिलता, तो कभी गलत टीका लगाने के आरोप में मासूम की मौत का मामला सामने आता है. अब भीषण गर्मी के बीच अस्पताल में सेंट्रल एसी सिस्टम फेल हो गया है और पानी की भारी किल्लत ने मरीजों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. डिमना रोड स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज परिसर में करीब 396.69 करोड़ रुपये की लागत से बने नये अस्पताल को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का मॉडल माना गया था. जून 2025 से साकची स्थित पुराने अस्पताल से यहां शिफ्टिंग शुरू हुई थी. दावा किया गया था कि मरीजों को अत्याधुनिक इलाज, बेहतर व्यवस्था और सभी आधुनिक सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी. लेकिन एक साल के भीतर ही अस्पताल की बदहाल व्यवस्था ने इन दावों की पोल खोल दी है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 396 करोड़ रुपये की लागत से बने इस अस्पताल में मरीजों को बुनियादी सुविधाएं भी क्यों नहीं मिल पा रही हैं और इन समस्याओं का स्थायी समाधान कब होगा?
48 घंटे में तीन मौतों के बाद फिर कटघरे में अस्पताल
एमजीएम अस्पताल की की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. अस्पताल में बीते 48 घंटे के भीतर तीन मरीजों की मौत हुई. इलाज में लापरवाही का आरोप लगा परिजनों ने हंगामा भी किया. लगातार हो रही मौतों और इलाज में लापरवाही के आरोपों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. रविवार को दो मरीजों की मौत के बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ. परिजनों ने आरोप लगाया कि समय पर समुचित इलाज नहीं मिलने और अस्पताल की अव्यवस्था के कारण मरीजों की जान चली गई. इससे पहले शनिवार को भी एक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ विरोध जताया था. सबसे मार्मिक मामला आदित्यपुर के एक मधुमेह पीड़ित बच्चे का है. गंभीर हालत में उसे एमजीएम में भर्ती कराया गया था. परिजनों का आरोप था कि इलाज में लापरवाही के कारण बच्चे की मौत हो गई. मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्था की हकीकत तब सामने आई जब परिजन शव को वार्ड से बाहर ले जाने के लिए स्ट्रेचर खोजते रहे, लेकिन उन्हें स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया गया. मजबूरन परिजनों को बच्चे के शव को गोद में उठाकर अस्पताल परिसर में भटकना पड़ा. आखिरकार निजी वाहन की व्यवस्था कर शव को घर ले जाया गया. दूसरी घटना भुइयांडीह कानू भट्ठा निवासी श्रवण कुमार से जुड़ी है. पैर में सूजन की शिकायत लेकर वह एमजीएम पहुंचे थे. परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती रखने या घर ले जाने का विकल्प दिया था. परिवार उन्हें घर ले गया, लेकिन शाम होते-होते उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई. आनन-फानन में उन्हें दोबारा अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया. इसके बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल में हंगामा करते हुए इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था.
समस्याओं से जूझ रहा अस्पताल
नये भवन में शिफ्ट होने के बाद भी अस्पताल लगातार अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है. कई बार लिफ्ट खराब रहने की शिकायतें सामने आई हैं. दवाओं की कमी, खराब एंबुलेंस, बेड का अभाव, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने तथा ऑक्सीजन प्लांट स्थापित नहीं होने जैसी समस्याएं पहले से बनी हुई हैं. इस बीच भीषण गर्मी में अस्पताल का सेंट्रल एसी सिस्टम ठप पड़ गया है. मरीजों को हाथ पंखा से काम चलाना पड़ रहा है. दूसरी ओर अस्पताल में पानी की कमी के कारण कई ऑपरेशन तक टालने पड़े रह है. मरीजों और उनके परिजनों को पीने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है. मजबूरन लोग बाहर से बोतलबंद पानी खरीदकर अपनी जरूरत पूरी कर रहे हैं. इससे मरीजों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है. मरीजों को बेड तक नहीं मिल रहा है. ऐसे में बेंच या स्ट्रेचर पर ही मरीजों का इलाज किया जा रहा है.
11 मई को एक नवजात की हुई थी मौत
11 मई को एमजीएम अस्पताल में एक नवजात शिशु की मौत हुई थी. परिजनों का आरोप था टीकाकरण के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ी और फिर उसकी मौत हुई. परिजनों ने अस्पताल कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया था और जमकर हंगामा किया था. मानगो के गुरुद्वारा रोड निवासी उमेश कुमार रवानी की पत्नी ने 9 मई को एमजीएम अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था. प्रसव के बाद मां और नवजात दोनों स्वस्थ थे और अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर लौट गए थे. 11 मई को नवजात को नियमित टीका दिलाने परिवार अस्पताल पहुंचा था. टीका लगने के कुछ समय बाद घर पहुंचते ही बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी. नवजात के हाथ-पैर अकड़ गए और शरीर नीला पड़ने लगा. थोड़ी देर बाद उसकी मौत हो गई. घटना के बाद आक्रोशित परिजन शव लेकर अस्पताल पहुंचे थे और विरोध प्रदर्शन किया था. परिजनों का आरोप था कि बच्चे को गलत या अवधि समाप्त दवा दी गई थी.