जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): पूर्वी सिंहभूम जिले की केरूआडूंगरी पंचायत ने महिलाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है. पंचायत को आधिकारिक तौर पर झारखंड का पहला मेंस्ट्रुअल वेस्ट फ्री पंचायत घोषित किया गया है. यह उपलब्धि महिलाओं की जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी और सतत प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है. पंचायत के अंतर्गत आने वाले 11 गांव तुरामडीह, बड़ा तालसा, छोटा तालसा, केरूआडूंगरी, आहरघुटू, बाहरदाढ़ी, धोडांगा, हाकेगोडा, भीतरदाढ़ी, भूडरुडीह और भूरीडीह की सभी महिलाएं और किशोरियां अब पर्यावरण अनुकूल रीयूजेबल सैनिटरी पैड का इस्तेमाल कर रही हैं. इसके कारण डिस्पोजेबल सैनिटरी पैड से निकलने वाले कचरे में भारी कमी आई है और पंचायत पूरी तरह से मेंस्ट्रुअल वेस्ट फ्री बनने में सफल रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी माहवारी को लेकर कई तरह की झिझक, अंधविश्वास और जागरूकता की कमी देखने को मिलती है. ऐसे माहौल में केरूआडूंगरी पंचायत ने न केवल इन सामाजिक बाधाओं को तोड़ा, बल्कि महिलाओं को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाकर एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत की है. केरूआडूंगरी पंचायत अब राज्य के अन्य गांवों और पंचायतों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गई है. महिलाओं के नेतृत्व में शुरू हुई यह पहल पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है.
मुखिया ने की पहल
केरूआडूंगरी पंचायत को मेंस्ट्रुअल वेस्ट फ्री बनाने के पीछे पंचायत के मुखिया कान्हू मुर्मू की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. माहवारी से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने और महिलाओं के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने के उनके प्रयासों के कारण आज लोग उन्हें सम्मानपूर्वक पैडमैन मुखिया के नाम से भी पहचानने लगे हैं. कान्हू मुर्मू ने सामाजिक संस्था निश्चय फाउंडेशन, प्रोजेक्ट बाला और स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से करीब चार वर्षों तक लगातार जनजागरूकता अभियान चलाया. इस दौरान गांव-गांव में बैठकों, कार्यशालाओं और संवाद कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. महिलाओं और किशोरियों को रीयूजेबल सैनिटरी पैड के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया. अभियान का असर यह हुआ कि पंचायत के सभी 11 गांवों की महिलाएं और किशोरियां रीयूजेबल पैड अपनाने के लिए आगे आईं. इससे न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार हुआ, बल्कि डिस्पोजेबल सैनिटरी पैड से उत्पन्न होने वाले कचरे में भी भारी कमी आई.
राज्य के लिए बनेगी प्रेरणा
पंचायत के मुखिया कान्हू मुर्मू ने कहा कि माहवारी कोई शर्म या संकोच का विषय नहीं, बल्कि महिलाओं के जीवन की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. इस अभियान का उद्देश्य केवल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव लाना, महिलाओं को सम्मान देना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है. उन्होंने खुशी जताई कि आज पंचायत की महिलाएं और किशोरियां माहवारी स्वच्छता पर खुलकर चर्चा कर रही हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि केरूआडूंगरी की यह पहल पूरे झारखंड के लिए प्रेरणा बनेगी.