तस्करों के चंगुल से छूटे गोवंशों का आश्रय बना पूर्वी सिंहभूम का गोलोक धाम, जानिए क्यों है ये खास

तस्करों के चंगुल से छूटे गोवंशों का आश्रय बना पूर्वी सिंहभूम का गोलोक धाम, जानिए क्यों है ये खास

जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): पूर्वी सिंहभूम जिले में स्थित गोलोक धाम गौशाला आज हजारों गोवंशों के लिए जीवनदायिनी आश्रयस्थली बन चुकी है. यह गौशाला चाकुलिया में स्थित है. भारत-बांग्लादेश सीमा पर तस्करों के चंगुल से छुड़ाए गए और विभिन्न राज्यों में अवैध तस्करी के दौरान बचाए गए गोवंशों को यहां नया जीवन मिल रहा है. चाकुलिया एयरपोर्ट परिसर की करीब 80 एकड़ भूमि पर स्थापित इस विशाल गौशाला का संचालन ध्यान फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है. यहां वर्तमान में 23 हजार से अधिक गोवंशो की देखभाल की जा रही है. इनमें बड़ी संख्या उन पशुओं की है जिन्हें बीएसएफ ने सीमा क्षेत्रों में तस्करों से मुक्त कराया था. वहीं, पुलिस और प्रशासन द्वारा विभिन्न राज्यों में चलाए गए अभियानों के दौरान बचाए गए गोवंशों को भी यहां संरक्षण दिया गया है.

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गोलोक धाम सिर्फ एक गौशाला नहीं, बल्कि गो संरक्षण का बड़ा केंद्र बन चुका है. यहां गोवंशों के लिए चारा, पानी, चिकित्सा और सुरक्षित आवास की समुचित व्यवस्था की गई है. बड़ी संख्या में कर्मचारी और स्वयंसेवक दिन-रात इनकी सेवा में जुटे रहते हैं. गो तस्करी जैसी गंभीर समस्या के बीच गोलोक धाम एक सकारात्मक उदाहरण बनकर उभरा है. जहां एक ओर तस्करों से बचाए गए पशुओं को नया जीवन मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर यह केंद्र पशु संरक्षण और संवर्धन की अनूठी मिसाल भी पेश कर रहा है. पूर्वी सिंहभूम का यह गोलोक धाम आज उन हजारों बेजुबान गोवंशों का घर है, जिनकी जिंदगी कभी तस्करों के हाथों खतरे में पड़ गई थी.

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500 से अधिक लोगों को मिला रोजगार
चाकुलिया स्थित गोलोक धाम गौशाला गो संरक्षण की एक अनूठी मिसाल बनकर उभरा है. यहां आश्रय प्राप्त गोवंशों में अधिकांश बैल और दूध नहीं देने वाली गायें शामिल हैं. यहां एक गाय के चारे और रखरखाव पर प्रति माह करीब 1200 रुपए खर्च होते हैं. बीमार और घायल गोवंशों के इलाज के लिए यहां विशेष धनवंतरी वार्ड’ बनाया गया है, जहां नियमित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. सिर्फ गो संरक्षण ही नहीं, गोलोक धाम स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहा है. गौशाला के संचालन से 500 से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है. यही वजह है कि गोलोक धाम आज गोसेवा, पशु संरक्षण और ग्रामीण रोजगार सृजन का एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा है.

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कई कारोबारी यहां गोवंश को ले चुके हैं गोद
गोलोक धाम गौशाला में गो संरक्षण को लेकर समाज में जागरूकता लगातार बढ़ रही है. यहां गोवंशों की सेवा में भागीदारी निभाने के लिए बड़ी संख्या में उद्यमी और व्यापारी आगे आ रहे हैं. गौशाला में गोद लो, संरक्षण करो अभियान के तहत लोग गोवंशों के पालन-पोषण और देखभाल की जिम्मेदारी अपने स्तर पर उठा रहे हैं. इस पहल को व्यापारिक समुदाय का व्यापक समर्थन मिल रहा है. कई व्यवसायी गोवंशों के भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान कर रहे हैं. अब तक हजारों कारोबारी यहां गोवंश को गोद लेकर उनकी देखभाल और जीवनभर के खर्च का संकल्प ले चुके हैं. इसकी संख्या अभी बढ़ते जा रही है.

2020 में हुई थी स्थापना
चाकुलिया में ध्यान फाउंडेशन द्वारा संचालित गोलोक धाम गौशाला की स्थापना दिसंबर 2020 में की गई थी. यह गौशाला आज गो-संरक्षण और गो-सेवा का एक बड़ा केंद्र बन चुकी है. इस गौशाला को पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी गौशालाओं में से एक माना जाता है.