शहर में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मरीजों ने बढ़ाई चिंता, जानिए कैसे ले Precautions और उपचार
झारखंड में मौसम बदलने के साथ स्वाइन फ्लू यानी H1N1 संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ने लगी है. राज्य में पिछले 30 दिनों के दौरान स्वाइन फ्लू के 36 मरीज सामने आने की रिपोर्ट है.
रांची: झारखंड में मौसम बदलने के साथ स्वाइन फ्लू यानी H1N1 संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ने लगी है. राज्य में पिछले 30 दिनों के दौरान स्वाइन फ्लू के 36 मरीज सामने आने की रिपोर्ट है. इनमें करीब आधे यानी 18 बच्चे और किशोर बताए गए हैं. बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी और निजी अस्पतालों को सतर्क रहने के साथ संदिग्ध मरीजों की जल्द जांच और आइसोलेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.
रिम्स में 30 सैंपल की जांच, 8 पॉजिटिव
रांची स्थित रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में 31 अगस्त तक 30 संदिग्ध मरीजों के सैंपल की जांच की गई, जिनमें 8 में संक्रमण की पुष्टि हुई. इसके अलावा राज्य के अन्य अस्पतालों और निजी लैब में भी मरीजों के सैंपल की जांच की जा रही है.
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि फ्लू जैसे लक्षण वाले संदिग्ध मरीजों की पहचान होने पर सैंपल की जांच में देरी न की जाए. रांची में रिम्स और जमशेदपुर में एमजीएम को जांच के लिए अधिकृत किया गया है.
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, अस्पतालों में तैयारी तेज
मामले बढ़ने के बाद झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है. अस्पतालों को संदिग्ध और संक्रमित मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड तैयार रखने को कहा गया है। साथ ही मेडिकल कॉलेजों और जिला स्तर पर सर्विलांस बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने भी लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने और लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है.
क्या है स्वाइन फ्लू?
स्वाइन फ्लू मुख्य रूप से Influenza A (H1N1) वायरस से होने वाला श्वसन संक्रमण है. इसके लक्षण कई बार सामान्य फ्लू जैसे ही दिखाई देते हैं. संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली संक्रमित बूंदों के संपर्क में आने से संक्रमण फैल सकता है.

स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण
स्वाइन फ्लू होने पर आमतौर पर ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं—
तेज बुखार
खांसी और गले में खराश
नाक बहना या बंद होना
सिरदर्द और शरीर में दर्द
अत्यधिक थकान
ठंड लगना
कुछ मामलों में उल्टी या दस्त
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है.इसलिए इन वर्गों में लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जल्द संपर्क करना जरूरी है.
स्वाइन फ्लू से कैसे करें बचाव?
संक्रमण से बचने के लिए कुछ सामान्य सावधानियां बेहद जरूरी हैं—
1. मास्क का इस्तेमाल करें: भीड़भाड़ या बंद जगहों पर मास्क पहनना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता ह
2. हाथ साफ रखें: साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोएं. बिना हाथ धोए आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें
3. संक्रमित व्यक्ति से दूरी रखें: अगर किसी व्यक्ति में फ्लू जैसे लक्षण हैं तो उसके बेहद करीब जाने से बचें
4. खांसते-छींकते समय सावधानी: मुंह और नाक को टिश्यू या कोहनी से ढकें और इस्तेमाल किए गए टिश्यू को सुरक्षित तरीके से फेंकें
5. बीमार होने पर घर पर आराम करें: बुखार या फ्लू जैसे लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें
स्वाइन फ्लू का इलाज कैसे होता है?
स्वाइन फ्लू का इलाज मरीज की स्थिति और लक्षणों के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं. कुछ मरीज सामान्य देखभाल और दवाओं से ठीक हो जाते हैं, जबकि गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती और विशेष उपचार की जरूरत पड़ सकती है.
बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या कोई विशेष एंटीवायरल दवा न लें। अगर तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या हालत बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें.
घबराएं नहीं, लेकिन लापरवाही भी न करें
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों से अपील की गई है कि स्वाइन फ्लू को लेकर अनावश्यक डरने की जरूरत नहीं है. समय पर पहचान, डॉक्टर की सलाह और सावधानी से संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है.खासकर बच्चों और अन्य हाई-रिस्क ग्रुप के लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर इसे नजरअंदाज न करें.