Pre-Monsoon Alert: बारिश से पहले बढ़ सकती है एलर्जी, जानिए रोजमर्रा की कौन-सी आदतें आपको बना रही हैं बीमार

Pre-Monsoon Alert: बारिश से पहले बढ़ सकती है एलर्जी, जानिए रोजमर्रा की कौन-सी आदतें आपको बना रही हैं बीमार

टीनपीडेस्क (TNP DESK): प्री-मानसून (Pre-Monsoon) का मौसम अपने साथ गर्मी से राहत तो लेकर आता है, लेकिन यह समय एलर्जी से परेशान लोगों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण भी साबित हो सकता है. मौसम में नमी बढ़ने, धूल, फफूंद (Mold), परागकण (Pollen) और प्रदूषण के मिश्रण से एलर्जी के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं. ऐसे में केवल धूल या किसी खास खाने को एलर्जी का कारण मानना पर्याप्त नहीं है. हमारी रोजमर्रा की कई आदतें भी एलर्जी को बढ़ाने का काम करती हैं.

पीजीआई चंडीगढ़ की एचओडी डॉ. जयमंती बख्शी के अनुसार, एलर्जी के कई ऐसे ट्रिगर हैं जो हमारी आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन शरीर पर लगातार असर डालते रहते हैं. यदि प्री-मानसून के दौरान बार-बार छींकें आना, नाक बंद होना, आंखों में खुजली या त्वचा पर चकत्ते जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, तो इन कारणों पर जरूर ध्यान दें.

सबसे पहले बात करें बेडरूम की. हम अपने दिन का बड़ा हिस्सा बिस्तर पर बिताते हैं, लेकिन गद्दे, तकिए और चादरों में मौजूद डस्ट माइट्स एलर्जी की बड़ी वजह बन सकते हैं. प्री-मानसून में बढ़ी हुई नमी इनके पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है. यदि सुबह उठते ही लगातार छींकें आती हैं या नाक बंद रहती है, तो यह संकेत हो सकता है कि आपके बिस्तर में एलर्जी पैदा करने वाले कण मौजूद हैं. चादर और तकिए के कवर को सप्ताह में एक बार गर्म पानी से धोना और बेडरूम को साफ रखना काफी मददगार हो सकता है.

दूसरा बड़ा कारण एयर कंडीशनर और कूलर हैं. प्री-मानसून के दौरान इनका इस्तेमाल बढ़ जाता है, लेकिन यदि इनके फिल्टर समय-समय पर साफ नहीं किए जाएं, तो इनमें धूल, फफूंद और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं. जैसे ही एसी या कूलर चालू होता है, ये कण हवा में फैलकर एलर्जी को बढ़ा सकते हैं. इसलिए फिल्टर की नियमित सफाई और सर्विसिंग बेहद जरूरी है. घर को खुशबूदार बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रूम फ्रेशनर, सुगंधित मोमबत्तियां और फैब्रिक सॉफ्टनर भी कई लोगों में एलर्जी की वजह बनते हैं. इनमें मौजूद रासायनिक तत्व सांस की नली को प्रभावित कर सकते हैं. इसके अलावा नया पेंट, नया फर्नीचर या सिंथेटिक फ्लोरिंग भी कई दिनों तक हानिकारक गैसें छोड़ सकते हैं. ऐसे में घर में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना जरूरी है.

खान-पान भी एलर्जी को प्रभावित करता है. पैकेज्ड फूड में मौजूद प्रिजर्वेटिव, कृत्रिम रंग और फ्लेवर कई लोगों में एलर्जी ट्रिगर कर सकते हैं. यदि किसी विशेष भोजन के बाद बार-बार परेशानी होती है, तो फूड डायरी बनाकर यह नोट करें कि कौन-सा खाद्य पदार्थ आपके लिए समस्या पैदा कर रहा है. प्री-मानसून के दौरान वायु प्रदूषण भी एक अहम कारण बनता है. धूल और बढ़ती नमी के कारण हवा में मौजूद सूक्ष्म कण लंबे समय तक बने रहते हैं, जिससे सांस संबंधी एलर्जी और अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है. ऐसे दिनों में घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें, एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें.

तनाव भी एलर्जी को बढ़ाने वाला एक छिपा हुआ कारण है. लगातार मानसिक दबाव के कारण शरीर में ऐसे हार्मोन बढ़ते हैं जो एलर्जी की प्रतिक्रिया को और तेज कर सकते हैं. पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, योग और मेडिटेशन न केवल मानसिक स्वास्थ्य बल्कि एलर्जी नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. प्री-मानसून के इस मौसम में यदि बार-बार एलर्जी की समस्या हो रही है, तो केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जीवनशैली, घर की साफ-सफाई, खान-पान और मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी है. सही सावधानी और समय रहते किए गए छोटे-छोटे बदलाव आपको इस मौसम में एलर्जी से काफी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं.