ठंड की दस्तक के साथ क्यों बिगड़ने लगती है तबीयत? मौसम का तकाजा या कुछ और, जानिए वजह और बचाव के उपाय
मौसम बदलने के साथ साथ शरीर पर भी असर डालता है, इन सबके पीछे का कारण आसान है. बदलता तापमान, हवा में नमी, एलर्जी और वायरस का फैलाव जैसे कई कारण हो सकते हैं. जब गर्मी से धीरे-धीरे ठंड की ओर मौसम बढ़ता है, तो शरीर को नए तापमान के हिसाब से खुद को ढालना पड़ता है.
टीनपी डेस्क (TNP DESK): जब जब मौसम का मिज़ाज बदलता है, तब तब लोगों की तबीयत अचानक नासाज़ होने लगती है. कई लोगों की अचानक तबीयत ख़राब होने लगती है. किसी को सर्दी, खांसी, गले में खराश, सिर दर्द, बदन दर्द या कभी कभी हल्का बुखार आने लगता है. ऐसे में कई बार लोग मान लेते है की मौसम के बदलने की वजह से सर्दी और जुकाम हो गया है. ऐसे में सबके मन में ये सवाल जरूर आने लगता है की इस बदलते मौसम में बचाव के लिए क्या करना चाहिए. और उससे भी बड़ा सवाल की अचानक बीमार होनी की वजह क्या है और ये क्यों होता है.

मौसम बदलते ही शरीर पर क्यों पड़ता है असर?
मौसम बदलने के साथ साथ शरीर पर भी असर डालता है, इन सबके पीछे का कारण आसान है. बदलता तापमान, हवा में नमी, एलर्जी और वायरस का फैलाव जैसे कई कारण हो सकते हैं. जब गर्मी से धीरे-धीरे ठंड की ओर मौसम बढ़ता है, तो शरीर को नए तापमान के हिसाब से खुद को ढालना पड़ता है. कई बार देखा गया है की दिन में धूप रहने के कारण गर्मी लगने लगती है जबकि शाम होते होते अचानक तापमान ढलने के कारण ठंड बढ़ जाती है. ऐसे में मौसम का तापमान बढ़ने- घटने के वजह से कुछ लोगों को सांस की नली, गले और नाक में परेशानी महसूस हो सकती है.
इसके अलावा AC में रहने वाले लोग अचानक बाहर निकल जाते है या फिर वैसे लोग जो किसी गर्म कमरे में रहते है और अचानक बाहर ठंडी हवा में निकलते है उससे भी शरीर के तापमान में असर डालता है. इससे छींक, नाक बंद होना, गले में जलन या खांसी जैसी शिकायत हो सकती है.
एलर्जी वालों के लिए भी बढ़ सकती है परेशानी
मौसम बदलने का असर सिर्फ संक्रमण तक सीमित नहीं है. हवा में धूल और प्रदूषण जैसे एलर्जेंस की वजह से एलर्जी की समस्या भी बढ़ सकती है. जिन लोगों को पहले से साइनस, एलर्जी या अस्थमा की परेशानी है, उन्हें मौसम बदलने पर ज्यादा दिक्कत हो सकती है. ऐसे लोगों में लगातार छींक आना, नाक बहना या बंद होना, आंखों में पानी आना, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं.
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
बच्चे और बुजुर्ग मौसम के बदलाव के प्रति अपेक्षाकृत ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं. इसके अलावा अस्थमा या दूसरी सांस संबंधी समस्या वाले लोगों को भी सावधानी रखनी चाहिए. जिन लोगों की दिनचर्या में लगातार अलग-अलग तापमान वाले माहौल में आना-जाना शामिल है, जैसे ऑफिस जाने वाले, बाहर काम करने वाले या नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोग, उन्हें भी खास ध्यान रखना चाहिए.

मौसम बदलने पर कैसे करें बचाव?
मौसम को बदला नहीं जा सकता, लेकिन मौसम के हिसाब से कुछ आसान सावधानियों से खुद को बचा सकते है
- सुबह और रात की ठंड को देखते हुए कपड़ों की लेयरिंग करें. जरूरत के हिसाब से कपड़े कम या ज्यादा किए जा सकते हैं.
- ठंड में प्यास कम लगने के बावजूद पर्याप्त पानी पीते रहें. जरूरत हो तो गुनगुना पानी ले सकते हैं.
- बाहर से आने के तुरंत बाद बहुत ठंडा या बहुत गर्म पानी पीने से बचें.
- हाथों को साबुन से नियमित रूप से धोएं और बिना हाथ धोए आंख, नाक या मुंह को छूने से बचें.
- घर और ऑफिस में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें. कमरे को पूरी तरह बंद रखने से बचें.
- एसी या हीटर का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा न करें, क्योंकि बहुत सूखी हवा गले और नाक में जलन बढ़ा सकती है.
- मौसमी फल, सब्जियां, दालें, नट्स और बीज जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ डाइट में शामिल करें.
- गले में खराश या सूखापन महसूस होने पर गुनगुना पानी या गर्म तरल पदार्थ राहत दे सकते हैं.
- धूल, धुआं और ऐसे एलर्जेंस से दूरी रखें, जिनसे पहले भी परेशानी होती रही है.

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
हर जुकाम या खांसी को गंभीर बीमारी समझने की जरूरत नहीं है. लेकिन अगर तेज बुखार लंबे समय तक बना रहे, सांस लेने में परेशानी हो, सीने में दर्द हो, बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो या लक्षण लगातार बिगड़ते जाएं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारी वाले लोगों में लक्षण ज्यादा गंभीर हों तो देरी नहीं करनी चाहिए.