सिरदर्द हो या बदन दर्द, क्या हर बार Painkiller लेना सही है? एक्सपर्ट्स ने दी अहम चेतावनी
सिरदर्द या बदन दर्द होते ही Painkiller लेना आम आदत बन गई है. लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह और जरूरत से ज्यादा पेनकिलर का सेवन पेट, किडनी और लिवर के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
टीनपी डेस्क (TNP DESK): आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सिरदर्द, कमर दर्द, शरीर में दर्द या हल्का बुखार होते ही बहुत से लोग तुरंत Painkiller Tablet ले लेते हैं. कई बार तो बिना यह सोचे कि दर्द की वजह क्या है, लोग मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खा लेते हैं. दर्द हुआ और गोली ली, मानो पेनकिलर कोई कैंडी हो. समस्या तब बढ़ जाती है जब यह आदत कभी-कभार की जरूरत से निकलकर रोजमर्रा की आदत बन जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बार-बार या बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर लेने से शरीर पर क्या असर पड़ सकता है? दर्द को दबाना और दर्द की वजह का इलाज करना एक ही बात नहीं है.

दर्द की वजह जाने बिना दवा लेना पड़ सकता है भारी
सिरदर्द या कमर दर्द कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है. नींद की कमी, तनाव, डिहाइड्रेशन, मांसपेशियों में खिंचाव से लेकर किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या तक, दर्द के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. पेनकिलर लेने से कुछ समय के लिए दर्द कम हो सकता है, लेकिन इसकी असली वजह बनी रह सकती है. ऐसे में लगातार दवा लेते रहने से जरूरी जांच और सही इलाज में देरी हो सकती है. खासकर अगर दर्द बार-बार हो रहा है, लंबे समय से बना हुआ है या अचानक बहुत तेज हो गया है, तो केवल पेनकिलर पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

ज्यादा Painkiller से पेट और किडनी पर असर
कुछ तरह की पेनकिलर दवाओं का लंबे समय तक या अधिक मात्रा में इस्तेमाल पेट में जलन, गैस, अल्सर और कभी-कभी पेट में ब्लीडिंग जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है. कुछ दवाएं किडनी की कार्यक्षमता पर भी असर डाल सकती हैं, खासकर जब इन्हें अधिक मात्रा में या लंबे समय तक लिया जाए. वहीं, कुछ विशेष परिस्थितियों में लिवर को भी नुकसान का खतरा हो सकता है. इसलिए यह सोचना कि पेनकिलर सामान्य दवा है और इसे जितनी बार चाहें लिया जा सकता है, सही नहीं है. दवा की मात्रा और अवधि व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और दूसरी दवाओं के इस्तेमाल पर भी निर्भर करती है.

हर दर्द में खुद से दवा लेना क्यों नहीं है सही?
कई लोग घर में मौजूद किसी भी पेनकिलर को दर्द होने पर ले लेते हैं. लेकिन हर व्यक्ति के लिए हर दवा सुरक्षित नहीं होती. पहले से किडनी, लिवर, पेट या हृदय से जुड़ी समस्या वाले लोगों को विशेष सावधानी की जरूरत हो सकती है. इसके अलावा कुछ दवाएं दूसरी दवाओं के साथ प्रतिक्रिया भी कर सकती हैं. इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति की दवा देखकर खुद वही दवा लेना या निर्धारित मात्रा से ज्यादा लेना नुकसानदायक हो सकता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से कोई बीमारी या नियमित दवा लेने वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना पेनकिलर लेने से बचना चाहिए.

कब Painkiller की जगह डॉक्टर से मिलना जरूरी?
अगर सिरदर्द या शरीर का दर्द बार-बार हो रहा है, लगातार बना हुआ है या दर्द की तीव्रता बढ़ रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है. अचानक बेहद तेज सिरदर्द, सिरदर्द के साथ कमजोरी या बोलने में परेशानी, सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, गंभीर चोट के बाद दर्द या अन्य चिंताजनक लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए. पेनकिलर दर्द को कुछ समय के लिए कम कर सकती है, लेकिन हर बार दर्द की समस्या का समाधान नहीं करती. इसलिए अगली बार सिरदर्द या कमर दर्द होते ही गोली लेने से पहले दर्द की वजह और दवा की जरूरत पर जरूर विचार करें.