क्या होता है बोन मैरो, शरीर में क्यों है इतना जरूरी? जानें इसका काम और इसे हेल्दी रखने के आसान तरीके
बोन मैरो शरीर में RBC, WBC और प्लेटलेट्स बनाने वाला महत्वपूर्ण ऊतक है. जानें बोन मैरो क्या है, इसके प्रभावित होने के लक्षण और इसे स्वस्थ रखने के तरीके.
टीएनपी डेस्क (TNP DESK): शरीर में खून की कमी हो तो अक्सर लोग सिर्फ हीमोग्लोबिन (Hb) की बात करते हैं, लेकिन हमारे शरीर में खून बनने की पूरी प्रक्रिया इससे कहीं ज्यादा जटिल है. RBC, WBC और प्लेटलेट्स बनाने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण जगह हमारी हड्डियों के अंदर मौजूद होती है, जिसे बोन मैरो कहा जाता है. कैंसर और कई गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान आपने बोन मैरो ट्रांसप्लांट या बोन मैरो टेस्ट के बारे में जरूर सुना होगा. लेकिन आखिर बोन मैरो क्या होता है, यह शरीर में कहां मौजूद रहता है और इसके खराब होने पर क्या असर पड़ता है? आइए, इन सवालों को आसान भाषा में समझते हैं.
हड्डियों के अंदर मौजूद होता है बोन मैरो
एक्स्पर्ट्स के अनुसार, बोन मैरो को हिंदी में अस्थि मज्जा कहा जाता है. यह हड्डियों के अंदर मौजूद नरम और स्पंजी ऊतक होता है. शरीर में रक्त कोशिकाओं के निर्माण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. बोन मैरो मुख्य रूप से तीन तरह की रक्त कोशिकाएं बनाने में मदद करता है. इनमें रेड ब्लड सेल्स (RBC) शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करती हैं. व्हाइट ब्लड सेल्स (WBC) संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं, जबकि प्लेटलेट्स शरीर में रक्तस्राव को रोकने और खून जमने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

कब प्रभावित हो सकता है बोन मैरो?
कैंसर होने का मतलब यह नहीं है कि हर मरीज का बोन मैरो प्रभावित होगा. हालांकि, कुछ ब्लड कैंसर जैसे ल्यूकेमिया और मायलोमा में कैंसर कोशिकाएं सीधे बोन मैरो को प्रभावित कर सकती हैं. कुछ प्रकार के लिम्फोमा में भी इसका असर देखा जा सकता है. इसके अलावा ब्रेस्ट, प्रोस्टेट या फेफड़ों जैसे दूसरे अंगों के कैंसर की कोशिकाएं अगर हड्डियों तक फैलती हैं, तो बोन मैरो के सामान्य तरीके से रक्त कोशिकाएं बनाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के कारण भी बोन मैरो की गतिविधि कुछ समय के लिए कम हो सकती है. इसकी वजह से शरीर में Hb, WBC या प्लेटलेट्स का स्तर घट सकता है.
बोन मैरो प्रभावित होने पर क्या संकेत मिल सकते हैं?
बोन मैरो ठीक से काम नहीं करने पर मरीज में अलग-अलग तरह की समस्याएं दिखाई दे सकती हैं. RBC कम होने पर खून की कमी, कमजोरी और थकान जैसी समस्या हो सकती है. WBC कम होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, जबकि प्लेटलेट्स कम होने पर आसानी से चोट के निशान पड़ना या रक्तस्राव जैसी समस्या हो सकती है. हालांकि, केवल Hb, WBC या प्लेटलेट्स कम होने का मतलब यह नहीं है कि कैंसर बोन मैरो तक पहुंच गया है. इसके पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर बोन मैरो एस्पिरेशन या बोन मैरो बायोप्सी की सलाह दे सकते हैं.

बोन मैरो को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
• आयरन, विटामिन B12 और फोलेट जैसे पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलते रहें.
• भोजन में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें.
• नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं.
• शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बेहतर रखने के लिए फेफड़ों और समग्र स्वास्थ्य का ध्यान रखें.
• हार्मोन और इम्यून सिस्टम के संतुलन को बनाए रखना भी जरूरी है.
• किडनी और लिवर का स्वस्थ रहना रक्त कोशिकाओं के निर्माण और उनके नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
• पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन से बचाव पर ध्यान दें.
बोन मैरो ट्रांसप्लांट कब होता है?
कुछ गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों और विशेष परिस्थितियों में हेमेटोपोएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट, जिसे आम बोलचाल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट कहा जाता है, इलाज का हिस्सा हो सकता है. हालांकि, इसकी जरूरत हर मरीज को नहीं होती. बीमारी का प्रकार, उसकी स्थिति और मरीज की स्वास्थ्य परिस्थितियों को देखकर विशेषज्ञ डॉक्टर इसका फैसला करते हैं. इसलिए बोन मैरो को सिर्फ कैंसर या ट्रांसप्लांट से जोड़कर देखना सही नहीं है. यह शरीर की रक्त निर्माण प्रणाली का एक अहम हिस्सा है, जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता और रक्तस्राव को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.