भारत में जल्द आएगी डेंगू की पहली वैक्सीन, जानिए कब होगी उपलब्ध
भारत में डेंगू की पहली वैक्सीन Qdenga को मंजूरी मिल चुकी है. 4 से 60 साल की उम्र के लोगों के लिए मंजूर यह वैक्सीन 2027 की पहली छमाही में निजी बाजार में उपलब्ध हो सकती है.
भारत में डेंगू की पहली वैक्सीन Qdenga को मंजूरी मिल चुकी है. 4 से 60 साल की उम्र के लोगों के लिए मंजूर यह वैक्सीन 2027 की पहली छमाही में निजी बाजार में उपलब्ध हो सकती है.
टीएनपी डेस्क (TNP DESK): बारिश का मौसम तपती गर्मी से राहत लेकर आता है. तापमान में गिरावट होती है, मौसम सुहाना लगता है और लोग गर्मी से राहत महसूस करते हैं. लेकिन यही बारिश अपने साथ कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देती है. इस मौसम में बुखार, सर्दी-जुकाम और खांसी जैसी परेशानियों के साथ डेंगू और मलेरिया का खतरा भी बढ़ जाता है. जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है. खासतौर पर एडीज मच्छर डेंगू फैलाने में अहम भूमिका निभाता है. ऐसे समय में भारत के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. देश में डेंगू से बचाव के लिए पहली वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है. जापानी कंपनी टेकेडा की Qdenga वैक्सीन को भारत में 4 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों के लिए मंजूरी दी गई है. अब डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और टेकेडा के बीच हुए समझौते के बाद इसके निजी बाजार में आने का रास्ता साफ हुआ है. कंपनी के मुताबिक, वैक्सीन 2027 की पहली छमाही में उपलब्ध हो सकती है.

क्या है Qdenga वैक्सीन और कैसे दी जाएगी?
Qdenga एक टेट्रावेलेंट लाइव-एटेन्यूएटेड डेंगू वैक्सीन है, जिसे डेंगू वायरस के चारों प्रमुख सीरोटाइप से सुरक्षा के लिए विकसित किया गया है. भारत में इसे 4 से 60 साल की उम्र के लोगों के लिए मंजूरी दी गई है. इसकी दो डोज दी जाती हैं और दोनों के बीच तीन महीने का अंतर रखा जाता है. हर डोज 0.5 मिलीलीटर की होती है. इसकी एक खास बात यह है कि वैक्सीन लगवाने से पहले यह जांच करना जरूरी नहीं है कि व्यक्ति को पहले डेंगू संक्रमण हुआ था या नहीं. यानी पूर्व डेंगू संक्रमण की स्क्रीनिंग के बिना भी पात्र लोगों को यह वैक्सीन दी जा सकती है. भारत सरकार के मुताबिक Qdenga देश में डेंगू की रोकथाम के लिए मंजूर होने वाली पहली वैक्सीन है. हालांकि, वैक्सीन की मंजूरी का मतलब यह नहीं है कि मच्छरों से बचाव के बाकी उपायों की जरूरत खत्म हो जाएगी.

कितनी असरदार है Qdenga?
Qdenga की प्रभावशीलता को लेकर क्लिनिकल ट्रायल में महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं. उपलब्ध Phase III TIDES ट्रायल के मुताबिक, दूसरी डोज के 12 महीने बाद वैक्सीन ने वायरस से पुष्टि किए गए डेंगू संक्रमण के खिलाफ 80.2 प्रतिशत प्रभावशीलता दिखाई. वहीं दूसरी डोज के 18 महीने बाद डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने के मामलों के खिलाफ प्रभावशीलता 90.4 प्रतिशत दर्ज की गई. लंबे समय के आंकड़ों में भी अस्पताल में भर्ती होने से बचाव का प्रभाव देखा गया है. हालांकि, इन आंकड़ों को क्लिनिकल ट्रायल में वैक्सीन के प्रदर्शन के रूप में समझना चाहिए और यह नहीं माना जाना चाहिए कि वैक्सीन हर व्यक्ति को डेंगू से पूरी तरह सुरक्षित कर देगी. डेंगू के खिलाफ व्यक्तिगत सुरक्षा के साथ-साथ मच्छर नियंत्रण भी जरूरी रहेगा.
भारत में डेंगू क्यों बना बड़ी चुनौती?
डेंगू भारत में लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मच्छर जनित बीमारी है. नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल के मुताबिक, देश के लगभग सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में डेंगू के मामले सामने आते हैं. बारिश के दौरान और उसके बाद पानी जमा होने से एडीज मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं. यही वजह है कि मानसून के मौसम में डेंगू को लेकर सतर्कता बढ़ जाती है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025 में देश में 1.13 लाख से ज्यादा डेंगू मामले दर्ज किए गए थे. ऐसे में वैक्सीन को रोकथाम के मौजूदा उपायों के साथ एक अतिरिक्त विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है.

वैक्सीन आएगी, फिर भी सावधानी जरूरी
Qdenga के भारतीय बाजार में आने से डेंगू की रोकथाम के लिए एक नया विकल्प जरूर जुड़ सकता है, लेकिन इससे मच्छरों से बचाव की जरूरत खत्म नहीं होगी. घर, स्कूल और आसपास पानी जमा न होने देना, कूलर और गमलों की नियमित सफाई करना, पानी की टंकियों को ढककर रखना और मच्छरों के काटने से बचने के उपाय करना अभी भी जरूरी रहेगा. डेंगू के लक्षण जैसे तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, उल्टी या कमजोरी महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए. भारत सरकार भी डेंगू की रोकथाम में वैक्सीनेशन के साथ वेक्टर कंट्रोल, निगरानी, शुरुआती जांच और उचित इलाज को महत्वपूर्ण मानती है