डायबिटीज है तो क्या फल खाना छोड़ दें? डॉक्टर ने दूर किया Juice और Fruits से जुड़ा कन्फ्यूजन, ये 5 फल बन सकते हैं डाइट का हिस्सा
डायबिटीज में फल पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है. जानिए डॉक्टर फ्रूट जूस से क्यों बचने की सलाह देते हैं, कौन से 5 फल डाइट का हिस्सा बन सकते हैं और फल खाते समय किन बातों का ध्यान रखें.
टीएनपी डेस्क (TNP DESK): डायबिटीज का नाम आते ही खानपान को लेकर कई तरह की सलाह मिलने लगती है. कोई कहता है मीठे फल बिल्कुल छोड़ दीजिए, तो कोई फलों का जूस तक न पीने की सलाह देता है. ऐसे में मरीजों के मन में सवाल उठना नॉर्मल है कि अगर फल भी नहीं खाएंगे तो शरीर को फाइबर, विटामिन और मिनरल्स कैसे मिलेंगे? और क्या डायबिटीज होने का मतलब आम, केला, सेब से लेकर हर मीठे फल से दूरी बनाना है? इसका जवाब है नहीं. डायबिटीज में फल खाए जा सकते हैं, लेकिन फल का प्रकार, मात्रा और उसे खाने का तरीका मायने रखता है.

डॉक्टर डायबिटीज में फ्रूट जूस से क्यों करते हैं मना?
असल अंतर फल और उसके जूस में है. जब आप पूरा फल खाते हैं तो उसके साथ फाइबर भी शरीर में पहुंचता है. वहीं जूस बनाने पर फाइबर काफी कम हो सकता है और कम समय में ज्यादा फल का कार्बोहाइड्रेट लिया जा सकता है. CDC (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार, फ्रूट जूस पूरे फल की तुलना में ब्लड शुगर को अधिक तेजी से बढ़ाता है. फाइबर पाचन की गति धीमी करने और ब्लड शुगर मैनेजमेंट में मदद करता है. इसलिए सामान्य तौर पर जूस के बजाय whole fruit बेहतर विकल्प माना जाता है.
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि जूस हर परिस्थिति में प्रतिबंधित है. उदाहरण के लिए, कुछ डायबिटीज मरीजों में ब्लड ग्लूकोज बहुत कम होने यानी hypoglycemia की स्थिति में डॉक्टर की बताई योजना के अनुसार थोड़ी मात्रा में जूस तेजी से ग्लूकोज बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

क्या डायबिटीज में फल खाना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए?
नहीं. डायबिटीज में फलों को पूरी तरह डाइट से हटाना सामान्य सिफारिश नहीं है. फल विटामिन, मिनरल्स और फाइबर का महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं. NIDDK (National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases) के अनुसार, डायबिटीज के लिए हेल्दी मील प्लान में फ्रूइट्स शामिल हो सकते हैं. लेकिन फलों में carbohydrates भी होते हैं, इसलिए portion size का ध्यान रखना जरूरी है. ADA के मुताबिक एक छोटा whole fruit या करीब आधा कप frozen/canned fruit में लगभग 15 ग्राम कार्बोहाइड्रेट हो सकता है, हालांकि वास्तविक मात्रा फल के अनुसार अलग होती है. इसलिए “फल हेल्दी है तो जितना चाहें खाएं” वाला तरीका डायबिटीज में सही नहीं है.

ये 5 फल बन सकते हैं डाइट का हिस्सा
सेब- फाइबर के साथ कई पोषक तत्व देता है. इसे जूस बनाने के बजाय साबुत खाना बेहतर विकल्प है.
संतरा- संतरे को निचोड़कर जूस पीने के बजाय पूरा फल खाएं, जिससे उसका फाइबर भी मिलता है.
नाशपाती- साबुत नाशपाती फाइबर का स्रोत है और नियंत्रित मात्रा में meal plan में शामिल की जा सकती है.
बेरीज- स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, ब्लैकबेरी और रास्पबेरी जैसे विकल्प फाइबर और अन्य पोषक तत्व देते हैं.
अमरूद- अमरूद भी फाइबर और विटामिन से भरपूर विकल्प है. इसे बिना चीनी या मीठे सिरप के साबुत रूप में लेना बेहतर है.

फल खाते समय इन बातों का रखें ध्यान
फल को जूस की जगह साबुत रूप में प्राथमिकता दें. एक बार में बहुत अधिक फल खाने के बजाय अपनी निर्धारित मात्रा रखें. फल के साथ प्रोटीन या हेल्थी फैट वाला भोजन लेने से कार्बोहाइड्रेट के absorption की गति धीमी हो सकती है. मरीज को कितने फल या कितने carbohydrates लेने चाहिए, यह उसकी दवाओं, insulin, वजन, गतिविधि और glucose targets के अनुसार अलग हो सकता है. इसलिए व्यक्तिगत diet plan डॉक्टर या registered dietitian से तय करना बेहतर है.
Diabetes और ‘Sugar Patient’ में क्या अंतर है?
यहां एक आम भ्रम दूर करना जरूरी है. बोलचाल में भारत में डायबिटीज वाले व्यक्ति को अक्सर “शुगर का मरीज” या “Sugar Patient” कहा जाता है. यह कोई अलग बीमारी नहीं है. मेडिकल शब्द Diabetes Mellitus है, जिसमें शरीर में glucose को नियंत्रित करने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और ब्लड ग्लूकोज बढ़ सकता है. इसलिए आम बातचीत में “डायबिटीज मरीज” और “शुगर मरीज” अक्सर एक ही स्थिति के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं.

डॉक्टरों की सलाह का सार क्या है?
डायबिटीज में लक्ष्य फल को दुश्मन मानना नहीं, बल्कि carbohydrate की मात्रा और खाने के तरीके को समझना है. पूरे फल से मिलने वाला फाइबर ब्लड शुगर मैनेजमेंट में उपयोगी हो सकता है, जबकि जूस ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकता है. CDC भी जूस की जगह whole fruit चुनने की सलाह देता है. इसलिए डायबिटीज होने पर अपनी मर्जी से सभी फल बंद करने के बजाय डॉक्टर या dietitian की मदद से portion और meal plan तय करना बेहतर तरीका है.
नोट: इंसुलिन लेने वाले, बार-बार hypoglycemia होने वाले, kidney disease वाले या बहुत अधिक अनियंत्रित blood sugar वाले मरीजों के लिए फलों की मात्रा व्यक्तिगत रूप से तय करना खास तौर पर जरूरी है.