क्या हर बार हार्ट अटैक के दौरान CPR देना है जरूरी? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट
आजकल हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले सामने आ है. हार्ट अटैक के अलावा कार्डियक अरेस्ट भी एक गंभीर स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अचानक बेहोश होकर गिर सकता है. ऐसी स्थिति में समय पर मदद मिलना बेहद जरूरी होता है.
टीनपी डेस्क (TNP DESK): आजकल हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले सामने आ रहे है. बुजुर्गों से ज्यादा कम उम्र में हार्ट अटैक की समस्या देखने को मिल रही है. लाइफस्टाइल, घंटों एक जगह बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तनाव, नींद पूरी नहीं होना और खानपान की गलत आदतें दिल की सेहत पर असर डाल सकती हैं. कई बार लोग सीने में दर्द या सांस फूलने जैसे लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन दिल से जुड़ी परेशानी को हल्के में लेना जानलेवा हो सकता है.
हार्ट अटैक के अलावा कार्डियक अरेस्ट भी एक गंभीर स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अचानक बेहोश होकर गिर सकता है. ऐसी स्थिति में समय पर मदद मिलना बेहद जरूरी होता है. अगर आसपास मौजूद किसी व्यक्ति को सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन देने का सही तरीका पता हो, तो वह मेडिकल सहायता पहुंचने तक मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ा सकता है.

क्यों बढ़ रही हैं दिल की बीमारियां?
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत के लिए समय नहीं निकाल पाते. लंबे समय तक ऑफिस में बैठकर काम करना, जंक फूड खाना, धूम्रपान, शराब का सेवन और लगातार तनाव में रहना दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और मोटापा भी हृदय संबंधी समस्याओं की प्रमुख वजहों में शामिल हैं.
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या है अंतर?
अक्सर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही बीमारी समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं. हार्ट अटैक में दिल तक खून पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आ जाती है. इससे दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुंच सकता है. इसके लक्षणों में सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, मतली और हाथ, पीठ या जबड़े में दर्द शामिल हो सकते हैं. वहीं, कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक प्रभावी तरीके से खून पंप करना बंद कर देता है. व्यक्ति बेहोश हो सकता है और सामान्य रूप से सांस लेना बंद कर सकता है. यह मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें तुरंत आपातकालीन मदद और सीपीआर की जरूरत पड़ सकती है.

कार्डियक अरेस्ट आने पर कैसे दें CPR?
अगर कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए, आवाज देने और कंधे पर हल्के से थपथपाने के बाद भी प्रतिक्रिया न दे और सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा हो, तो तुरंत आपातकालीन सेवा को फोन करें. भारत में एम्बुलेंस के लिए 112 पर कॉल किया जा सकता है. किसी दूसरे व्यक्ति से AED यानी ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर मंगवाने को कहें, अगर यह उपलब्ध हो.
-व्यक्ति को पीठ के बल किसी सख्त और समतल सतह पर लिटाएं.
-अपनी एक हथेली का निचला हिस्सा छाती के बीचोंबीच रखें और दूसरी हथेली उसके ऊपर रखें.
- दोनों हाथ सीधे रखते हुए छाती को लगभग 5 से 6 सेंटीमीटर तक दबाएं.
- एक मिनट में 100 से 120 बार दबाव देने की गति बनाए रखें.
-हर दबाव के बाद छाती को सामान्य स्थिति में लौटने दें.
-मदद पहुंचने, व्यक्ति के सामान्य रूप से सांस लेने या आपके लिए जारी रखना संभव नहीं रहने तक सीपीआर जारी रखें.
कब नहीं देना चाहिए CPR?
अगर व्यक्ति बेहोश है, लेकिन सामान्य रूप से सांस ले रहा है, तो छाती पर दबाव देकर सीपीआर शुरू न करें. तुरंत मेडिकल सहायता बुलाएं और उसकी सांस पर नजर रखें. चोट की आशंका होने पर अनावश्यक रूप से शरीर न घुमाएं. ध्यान रखें कि केवल हांफना सामान्य सांस लेने के बराबर नहीं है. ऐसी स्थिति में भी तुरंत मदद बुलाकर सीपीआर शुरू करना जरूरी हो सकता है.

दिल को स्वस्थ रखने के लिए बदलें अपनी लाइफस्टाइल
दिल की बीमारियों का खतरा कम करने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलने या दूसरी शारीरिक गतिविधि करने की आदत डालें. खाने में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और पौष्टिक चीजें शामिल करें. ज्यादा नमक, चीनी और तली-भुनी चीजों का सेवन सीमित रखें. धूम्रपान से बचें, पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश करें. इसके साथ ही ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं. सीने में अचानक दर्द, सांस लेने में परेशानी या ठंडा पसीना आने जैसे लक्षण दिखें, तो घरेलू उपायों के भरोसे इंतजार न करें. दिल की बीमारी में समय पर इलाज और कार्डियक अरेस्ट के दौरान तुरंत सीपीआर, दोनों ही बेहद अहम हैं.