सुबह नाश्ता छोड़ने की आदत से शरीर पर क्या पड़ता है असर? जानें डॉक्टर की राय

सुबह का नाश्ता रोज छोड़ने से शरीर पर क्या असर पड़ सकता है? जानें नाश्ता छोड़ने से होने वाली थकान, भूख, ब्लड शुगर और खान-पान पर इसके संभावित प्रभाव.

सुबह नाश्ता छोड़ने की आदत से शरीर पर क्या पड़ता है असर? जानें डॉक्टर की राय

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग सुबह जल्दी उठकर काम या ऑफिस जाने की वजह से नाश्ता छोड़ देते हैं. कुछ लोग वजन कम करने के लिए भी ब्रेकफास्ट नहीं करते. कभी-कभार नाश्ता मिस करना आम बात हो सकती है, लेकिन अगर यह रोज की आदत बन जाए तो इसका असर आपकी डाइट, एनर्जी और कुछ लोगों में ब्लड शुगर कंट्रोल पर पड़ सकता है. डॉक्टरों के मुताबिक, शरीर को दिन की शुरुआत में संतुलित पोषण देना जरूरी है. हालांकि, हर व्यक्ति के लिए सुबह का नाश्ता अनिवार्य हो, ऐसा भी नहीं है. अगर कोई व्यक्ति सीमित समय में खाना खाता है और पूरे दिन पर्याप्त पोषक तत्व लेता है, तो स्थिति अलग हो सकती है.

नाश्ता छोड़ने से दिनभर थकान महसूस हो सकती है

सुबह का खाना रात के लंबे गैप के बाद शरीर को ऊर्जा देने का एक मौका होता है. अगर नाश्ता छोड़ दिया जाए और दोपहर तक कुछ न खाया जाए, तो कुछ लोगों को कमजोरी, थकान, चक्कर या ध्यान लगाने में परेशानी महसूस हो सकती है. खासकर ऐसे लोग जो सुबह ज्यादा शारीरिक या मानसिक काम करते हैं, उनके लिए लंबे समय तक खाली पेट रहना असहज हो सकता है. डॉक्टरों की सलाह है कि अगर सुबह भूख लगती है तो नाश्ता पूरी तरह छोड़ने के बजाय पौष्टिक और संतुलित भोजन लेना बेहतर है.

बाद में ज्यादा खाने की बढ़ सकती है संभावना

नाश्ता छोड़ने के बाद कुछ लोगों को दोपहर तक बहुत ज्यादा भूख लग सकती है. ऐसे में वे जरूरत से ज्यादा खाना या तले-भुने और मीठे स्नैक्स चुन सकते हैं. इससे पूरे दिन की कैलोरी और पोषण का संतुलन बिगड़ सकता है. हालांकि, नाश्ता छोड़ने से हर व्यक्ति का वजन बढ़ेगा, ऐसा कहना सही नहीं है. वजन पर कुल कैलोरी सेवन, भोजन की गुणवत्ता, शारीरिक गतिविधि, नींद और जीवनशैली जैसे कई कारकों का असर पड़ता है.

ब्लड शुगर पर भी पड़ सकता है असर

जिन लोगों को डायबिटीज है या जो ब्लड शुगर नियंत्रित करने वाली दवाएं लेते हैं, उनके लिए खाना छोड़ना खास सावधानी का विषय है. लंबे समय तक भोजन न लेने से कुछ दवाओं के साथ ब्लड शुगर बहुत कम हो सकता है. दूसरी ओर, बाद में बहुत ज्यादा या कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन करने पर ब्लड शुगर तेजी से बढ़ भी सकता है. इसलिए डायबिटीज के मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बिना नियमित भोजन का पैटर्न बदलने से बचना चाहिए.

सिर्फ चाय-बिस्किट को न समझें पूरा नाश्ता

कई लोग सुबह नाश्ते के नाम पर सिर्फ चाय और बिस्किट लेते हैं. इससे पेट कुछ समय के लिए भरा महसूस हो सकता है, लेकिन इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलते. बेहतर विकल्प में पोहा, उपमा, दलिया, ओट्स, अंडा, दही, फल, साबुत अनाज या मूंग दाल जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं. नाश्ते में प्रोटीन और फाइबर शामिल करने से लंबे समय तक पेट भरा रहने में मदद मिल सकती है.

हर किसी के लिए नियम एक जैसा नहीं

डॉक्टरों के मुताबिक, नाश्ता करना या न करना व्यक्ति की भूख, स्वास्थ्य, काम की दिनचर्या और पूरे दिन के खान-पान पर निर्भर करता है. अगर नाश्ता छोड़ने के बाद कमजोरी, चक्कर, सिरदर्द, बहुत ज्यादा भूख या ध्यान लगाने में परेशानी होती है, तो इस आदत पर ध्यान देना चाहिए. वहीं, अगर कोई व्यक्ति सुबह भूखा नहीं रहता और बाद में संतुलित आहार के जरिए अपनी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी करता है, तो केवल नाश्ता न करने को बीमारी का कारण नहीं माना जा सकता. सबसे जरूरी बात यह है कि पूरे दिन का भोजन संतुलित और पौष्टिक हो. लगातार थकान, चक्कर या ब्लड शुगर से जुड़ी परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.