टीनपी डेस्क (TNP DESK): आज के दौर में मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट और टीवी हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन पढ़ाई, सोशल मीडिया या मनोरंजन, हर काम के लिए स्क्रीन का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. कई लोग दिनभर में 8 से 12 घंटे तक स्क्रीन के सामने बिताते हैं. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या बढ़ता स्क्रीन टाइम हमारी आंखों और दिमाग को पहले से ज्यादा कमजोर बना रहा है? विशेषज्ञों का मानना है कि स्क्रीन का संतुलित उपयोग नुकसानदायक नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक बिना ब्रेक के स्क्रीन देखने की आदत आंखों और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर असर डाल सकती है.

स्क्रीन टाइम का आंखों पर क्या असर पड़ता है?
नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक स्क्रीन देखने से डिजिटल आई स्ट्रेन (Digital Eye Strain) या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम की समस्या हो सकती है. स्क्रीन देखते समय हमारी पलकें सामान्य से कम झपकती हैं, जिससे आंखों की नमी कम होने लगती है.
इसके कारण कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे.
- आंखों में सूखापन और जलन.
- धुंधला दिखाई देना.
- आंखों में दर्द या भारीपन.
- सिरदर्द.
- रोशनी से परेशानी होना.
डॉक्टरों का कहना है कि स्क्रीन देखने से आंखें स्थायी रूप से कमजोर होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं है, लेकिन लगातार तनाव के कारण अस्थायी रूप से देखने में परेशानी महसूस हो सकती है.

क्या स्क्रीन टाइम दिमाग को भी प्रभावित करता है?
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम का असर केवल आंखों तक सीमित नहीं रहता. लगातार सोशल मीडिया, वीडियो और गेमिंग दिमाग को भी प्रभावित कर सकते हैं.
अधिक स्क्रीन टाइम से इन समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है.
- ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई.
- नींद की गुणवत्ता में कमी.
- तनाव और चिंता.
- मानसिक थकान.
- काम या पढ़ाई में उत्पादकता कम होना.
विशेष रूप से रात में मोबाइल या लैपटॉप का अधिक उपयोग शरीर की जैविक घड़ी (Body Clock) को प्रभावित करता है, जिससे नींद आने में देरी हो सकती है.

बच्चों और किशोरों पर ज्यादा असर
डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों की आंखें और मस्तिष्क अभी विकास की अवस्था में होते हैं. ऐसे में लगातार स्क्रीन देखने से उनकी पढ़ाई, व्यवहार, नींद और शारीरिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है.
बच्चों में अधिक स्क्रीन टाइम से
- मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) का खतरा बढ़ सकता है.
- आउटडोर गतिविधियां कम हो जाती हैं.
- एकाग्रता प्रभावित हो सकती है.
- सामाजिक व्यवहार में बदलाव आ सकता है.
इसलिए बच्चों के स्क्रीन उपयोग पर माता-पिता की निगरानी बेहद जरूरी है.

स्क्रीन टाइम कम करने के आसान तरीके
विशेषज्ञ कुछ आसान आदतें अपनाने की सलाह देते हैं.
- 20-20-20 नियम अपनाएं. हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें.
- स्क्रीन की ब्राइटनेस और फॉन्ट साइज आरामदायक रखें.
- आंखों को सूखने से बचाने के लिए बार-बार पलकें झपकाएं.
- हर 1 घंटे में 5 से 10 मिनट का ब्रेक लें.
- सोने से कम से कम 1 घंटा पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल बंद करें.
- रोजाना कुछ समय खुले वातावरण में बिताएं.

डॉक्टर की क्या सलाह है?
विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या स्क्रीन नहीं, बल्कि उसका अत्यधिक और गलत तरीके से उपयोग है. यदि आंखों में लगातार दर्द, धुंधलापन, बार-बार सिरदर्द या नींद की समस्या बनी रहती है, तो नेत्र विशेषज्ञ या चिकित्सक से जांच करानी चाहिए. समय-समय पर आंखों की जांच कराना और डिजिटल डिवाइस का संतुलित उपयोग करना लंबे समय तक आंखों और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है.

