टीनपी डेस्क (TNP DESK): अक्सर कई लोगो की दिन की शुरुआत अलग अलग तरीके से होती है. कुछ लोग सुबह उठते ही योगा करना पसंद करते है तो कुछ लोग जिम. कई लोग सुबह उठकर हेल्थी ड्रिंक पीना पसंद करते है तो कई लोग सुबह की शुरुआत एक कप चाय से करते हैं और दिनभर में कई बार चाय पीना भारत में आम आदत है. काम के दौरान थकान महसूस होने पर चाय ऊर्जा देने वाली लगती है. कई लोगों के लिए चाय सिर्फ पेय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है. लेकिन सवाल यह है कि बार-बार चाय पीने की आदत शरीर के लिए कितनी फायदेमंद या नुकसानदायक हो सकती है. डॉक्टरों के मुताबिक, चाय का असर इस बात पर निर्भर करता है कि इसे कितनी मात्रा में, किस समय और किस तरह लिया जा रहा है. सीमित मात्रा में चाय का सेवन आमतौर पर अधिकांश स्वस्थ लोगों के लिए समस्या नहीं माना जाता, लेकिन दिनभर लगातार चाय पीने की आदत से कैफीन का सेवन बढ़ सकता है. इसके अलावा चाय में ज्यादा चीनी मिलाने से कैलोरी की मात्रा भी बढ़ती है. इसलिए चाय पीने की आदत को संतुलित रखना जरूरी है.

ज्यादा चाय से नींद और पाचन पर पड़ सकता है असर
चाय में कैफीन पाया जाता है, जो शरीर को कुछ समय के लिए सतर्क और सक्रिय महसूस करा सकता है. यही वजह है कि थकान या नींद आने पर लोग चाय पीना पसंद करते हैं. लेकिन बार-बार या देर शाम चाय पीने से कुछ लोगों की नींद प्रभावित हो सकती है. कैफीन के कारण सोने में परेशानी, नींद का बार-बार टूटना या सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस होने जैसी समस्या हो सकती है. खासकर जिन लोगों को पहले से नींद से जुड़ी परेशानी रहती है, उन्हें शाम और रात में चाय का सेवन सीमित रखने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा खाली पेट ज्यादा चाय पीने से कुछ लोगों को एसिडिटी, गैस, पेट में जलन या बेचैनी की शिकायत हो सकती है. अगर चाय पीने के बाद लगातार पेट से जुड़ी परेशानी होती है तो इसकी मात्रा और समय पर ध्यान देना जरूरी है.

चाय में ज्यादा चीनी मिलाना भी हो सकता है नुकसानदायक
कई लोग एक दिन में कई कप चाय पीते हैं और हर कप में दो या तीन चम्मच चीनी डालते हैं. ऐसे में समस्या केवल चाय की नहीं, बल्कि अतिरिक्त चीनी के सेवन की भी हो सकती है. लगातार अधिक मात्रा में चीनी लेने से कुल कैलोरी बढ़ती है और लंबे समय में वजन बढ़ने का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए चाय पीते समय चीनी की मात्रा कम रखना बेहतर विकल्प हो सकता है. इसी तरह बहुत ज्यादा कड़क चाय या बार-बार चाय पीने से कैफीन का सेवन बढ़ सकता है. अगर चाय पीने के बाद दिल की धड़कन तेज महसूस हो, बेचैनी, हाथ कांपना, सिरदर्द या घबराहट जैसी शिकायत हो तो चाय की मात्रा कम करने पर विचार करना चाहिए. हर व्यक्ति में कैफीन के प्रति संवेदनशीलता अलग हो सकती है, इसलिए एक व्यक्ति के लिए सामान्य मात्रा दूसरे व्यक्ति के लिए ज्यादा हो सकती है.

भोजन के तुरंत बाद चाय पीने से बचें
चाय पीने का समय भी महत्वपूर्ण है. चाय में मौजूद कुछ यौगिक भोजन से मिलने वाले आयरन के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए खासकर जिन लोगों में आयरन की कमी है, उनके लिए भोजन के तुरंत बाद चाय पीने की आदत ठीक नहीं मानी जाती. चाय और मुख्य भोजन के बीच कुछ अंतर रखना बेहतर हो सकता है. गर्भवती महिलाओं, बच्चों, किशोरों और कैफीन के प्रति संवेदनशील लोगों को चाय और अन्य कैफीनयुक्त पेय की मात्रा को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. किसी व्यक्ति को एनीमिया, एसिडिटी, नींद की समस्या या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार चाय का सेवन करना अधिक उचित है.

कितनी चाय पीना बेहतर है?
डॉक्टरों के अनुसार चाय को पूरी तरह छोड़ना हर स्वस्थ व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है. असली बात है मात्रा, समय और चाय में इस्तेमाल होने वाली चीनी पर नियंत्रण. दिनभर थोड़े-थोड़े अंतराल पर लगातार चाय पीने के बजाय सीमित मात्रा में चाय लेना बेहतर विकल्प हो सकता है. पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है. चाय को भोजन का विकल्प नहीं बनाना चाहिए और केवल थकान दूर करने के लिए बार-बार चाय पीने की आदत से बचना चाहिए. अगर दिन में कई कप चाय पीने के बावजूद नींद खराब रहती है, पेट में लगातार जलन होती है या धड़कन तेज होने जैसी समस्या होती है तो डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए. संतुलित मात्रा में चाय का आनंद लिया जा सकता है, लेकिन किसी भी चीज की अति शरीर के लिए परेशानी का कारण बन सकती है.

