डेंगू या वायरल फीवर? दोनों में कैसे करें फर्क, जानिए कब जरूरी है डॉक्टर की सलाह

डेंगू और वायरल फीवर के लक्षण कई बार एक जैसे नजर आते हैं. जानिए दोनों में क्या अंतर है, डेंगू के कौन से संकेत गंभीर हो सकते हैं और कब डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना जरूरी है.

डेंगू या वायरल फीवर? दोनों में कैसे करें फर्क, जानिए कब जरूरी है डॉक्टर की सलाह

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): बदलते मौसम और बारिश के बाद बुखार के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं. ऐसे में तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और शरीर में दर्द होने पर लोगों के मन में सबसे पहला सवाल आता है कि यह सामान्य वायरल फीवर है या डेंगू. परेशानी की बात यह है कि दोनों में शुरुआती लक्षण काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं. इसलिए केवल लक्षण देखकर खुद से डेंगू की पुष्टि करना सही नहीं है. WHO के अनुसार, डेंगू में तेज बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, मतली, उल्टी और शरीर पर रैश जैसे लक्षण हो सकते हैं.

डेंगू में किन लक्षणों पर दें खास ध्यान

डेंगू में बुखार अक्सर तेज हो सकता है और इसके साथ शरीर में खास तरह का दर्द, तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, उल्टी या त्वचा पर लाल चकत्ते दिखाई दे सकते हैं. हालांकि हर मरीज में ये सभी लक्षण मौजूद हों, यह जरूरी नहीं है. वहीं वायरल फीवर में भी बुखार, बदन दर्द, थकान, सिरदर्द और कभी-कभी गले में खराश या सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण हो सकते हैं. इसलिए केवल बुखार की तीव्रता या शरीर दर्द के आधार पर डेंगू और वायरल फीवर में अंतर करना मुश्किल होता है. WHO भी मानता है कि शुरुआती दौर में डेंगू को कई दूसरी वायरल और संक्रामक बीमारियों से केवल लक्षणों के आधार पर अलग करना आसान नहीं है.

बुखार उतरने के बाद भी रहें सावधान

डेंगू को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि बुखार कम होना हमेशा ठीक होने का संकेत नहीं माना जा सकता. कुछ मरीजों में बुखार उतरने के बाद गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत सामने आ सकते हैं. तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, उल्टी या मल में खून, बहुत ज्यादा कमजोरी, बेचैनी या तेजी से सांस चलना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए. गंभीर डेंगू कुछ ही घंटों में खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है.

पक्का पता कैसे चलेगा

डेंगू की पुष्टि केवल लक्षणों से नहीं की जा सकती. डॉक्टर मरीज की स्थिति, बीमारी के दिनों और जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट की सलाह दे सकते हैं. बीमारी के शुरुआती दिनों में NS1 एंटीजन या molecular test जैसे परीक्षण उपयोगी हो सकते हैं, जबकि बाद के चरण में IgM एंटीबॉडी टेस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है. कौन-सा टेस्ट कब कराया जाए, इसका फैसला डॉक्टर बीमारी के समय और मरीज की स्थिति को देखकर करते हैं.

खुद से दवा लेने से बचें

अगर तेज बुखार है और डेंगू की आशंका है तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है. पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना जरूरी है. डेंगू की स्थिति में बुखार और दर्द के लिए डॉक्टर पैरासिटामोल की सलाह दे सकते हैं, लेकिन एस्पिरिन या आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि इनसे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है.

नोट: डेंगू और वायरल फीवर के लक्षणों में काफी समानता होती है. इसलिए इंटरनेट या घरेलू अनुभव के आधार पर बीमारी तय करने के बजाय डॉक्टर की सलाह और जरूरत पड़ने पर जांच कराना सबसे सुरक्षित तरीका है.