मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बोले- बिहार में 3 से 4 गुना बढ़ेंगी स्वास्थ्य सुविधाएं, PPP मॉडल को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन सोशल कॉन्क्लेव 2026 का किया उद्घाटन. बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव की तैयारी, मेडिकल कॉलेजों में PPP मॉडल लागू करने पर जोर. आयुष्मान भारत योजना से जुड़े बिहार के लगभग 92 प्रतिशत परिवार, स्वास्थ्य सेवाओं का तीन से चार गुना विस्तार जरूरी.

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बोले- बिहार में 3 से 4 गुना बढ़ेंगी स्वास्थ्य सुविधाएं, PPP मॉडल को मिलेगा बढ़ावा

पटना: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को होटल मौर्या में आयोजित ISCCM सोशल कॉन्क्लेव 2026 का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया. इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन की पटना शाखा द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में गंभीर चिकित्सा सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती, पारदर्शी और मरीज-केंद्रित बनाने के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया. मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं का तीन से चार गुना विस्तार करने की आवश्यकता है, ताकि आम लोगों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उनके नजदीक उपलब्ध हो सकें. उन्होंने मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के संचालन में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को बढ़ावा देने की बात कही. साथ ही स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था में बिहार के चिकित्सकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

जिला अस्पतालों में प्रति महीने हो रहा 10 हजार ओपरेशन

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के जिला अस्पतालों में अब प्रतिमाह लगभग 10 हजार ऑपरेशन हो रहे हैं और मरीजों को अनावश्यक रूप से पटना रेफर करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा रही है. किसी मरीज को रेफर करने वाले डॉक्टर को इसका कारण स्पष्ट करना होगा. राज्य के लगभग 92 प्रतिशत परिवार आयुष्मान भारत योजना से जुड़ चुके हैं. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ बिहार में बड़े निजी अस्पतालों को स्थापित करने, मेडिकल कॉलेजों की कार्यप्रणाली बेहतर बनाने और सरकारी अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है. राज्य में लगभग 16 सरकारी मेडिकल कॉलेज भवनों का निर्माण कार्य चल रहा है और 10 से अधिक सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं.

चिकित्सा सेवा में पीपीपी मॉडल की परिकल्पना

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने चिकित्सा सेवा को और बेहतर बनाने के लिये PPP मॉडल की परिकल्पना की है. इसकी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और आने वाले दिनों में इस दिशा में आगे बढ़ा जाएगा. उन्होंने साफ कहा कि निविदा प्रक्रिया में बिहार के डॉक्टरों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी, ताकि राज्य के चिकित्सकों की भागीदारी बढ़े और स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हों. मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए चिकित्सकों को उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप जिम्मेदारी देना आवश्यक है. यदि कोई चिकित्सक सर्जन है, तो उसकी सेवाएं सर्जरी के लिए ही ली जानी चाहिए.

आयुष्मान भारत से स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव

मुख्यमंत्री ने आयुष्मान भारत योजना के विस्तार को राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया. उन्होंने कहा कि पहले केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहमति होने के बावजूद 70 लाख से अधिक पात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड नहीं बन पा रहे थे. इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने राशन कार्ड में दर्ज सभी सदस्यों को योजना से जोड़ने का निर्णय लिया. उन्होंने कहा कि लगभग 9.5 करोड़ लोगों को योजना से जोड़ने की व्यवस्था की गई. उन्होंने बताया कि आज बिहार के लगभग 92 प्रतिशत परिवार आयुष्मान भारत से जुड़ चुके हैं. इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में स्वास्थ्य सुरक्षा का भरोसा बढ़ा है.

अंतरराष्ट्रीय सुविधाएं के विकास के लिए निवेश जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक क्रिटिकल केयर यूनिट, उच्चस्तरीय बेड और अंतर्राष्ट्रीय मानकों वाली स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास के लिए निवेश जरूरी है. इसके लिए सरकार आवश्यक सुविधाएं और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं. बिहार के लोग भी चाहते हैं कि उन्हें पटना और राज्य के अन्य शहरों में वही चिकित्सा सुविधाएं मिलें, जो दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में उपलब्ध हैं.

चिकित्सकों को दी शुभकामना

मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि डॉक्टर समाज के लिए भगवान के स्वरूप हैं. चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानव जीवन की रक्षा से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का सम्मान बढ़ना चाहिए और समाज को स्वस्थ बनाने में उनकी भूमिका को और मजबूत किया जाना चाहिए. मुख्यमंत्री ने इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन द्वारा आयोजित सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा कि गंभीर मरीजों के उपचार, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इस प्रकार के संवाद आवश्यक हैं. उन्होंने कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञों को एकजुट होकर बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में सहयोग करना चाहिए. मुख्यमंत्री ने सभी चिकित्सकों और आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बिहार को स्वस्थ, समृद्ध और विकसित राज्य बनाने में चिकित्सा समुदाय का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है.

कार्यक्रम में ISCCM की ओर से प्रतीक चिह्न, अंगवस्त्र और पुष्प गुच्छ भेंटकर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया गया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शहर के नामचीन चिकित्सक सहित ISCCM के राष्ट्रीय एवं पटना शाखा के पदाधिकारियों तथा पूर्व पदाधिकारियों को चिकित्सा क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया. कार्यक्रम में डॉ विजय प्रकाश, डॉ ई हक, डॉ प्रभात कुमार, डॉ सहजानंद, वरिष्ठ अधिवक्ता वाई बी गिरी, ISCCM के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ रणवीर त्यागी, राष्ट्रीय महासचिव डॉ घनश्याम जगतकर, ISCCM पटना के चेयरपर्सन डॉ किशोर झुनझुनवाला और सचिव डॉ राजेश रौशन सहित देशभर से आए वरिष्ठ चिकित्सक एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.