लौहनगरी की महिलाएं बन रही है आत्मनिर्भर, मशरूम उत्पादन से मिल रही नई पहचान

    Mashrrom farming in jamshedpur:पूर्वी सिंहभूम जिले की महिलाएं ऑयस्टर मशरूम उत्पादन के जरिए आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं. जिला उद्यान विभाग की पहल से 219 महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया, जिसने उनके जीवन में बड़ा बदलाव ला दिया

    लौहनगरी की महिलाएं बन रही है आत्मनिर्भर, मशरूम उत्पादन से मिल रही नई पहचान

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): पूर्वी सिंहभूम जिले की महिलाएं ऑयस्टर मशरूम उत्पादन के जरिए आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं. जिला उद्यान विभाग की पहल से 219 महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया, जिसने उनके जीवन में बड़ा बदलाव ला दिया. प्रशिक्षण के बाद अब ये महिलाएं न सिर्फ खुद मशरूम उगा रही हैं, बल्कि अच्छी आमदनी कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं. प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को मशरूम उत्पादन के लिए आवश्यक बैग भी उपलब्ध कराए गए. पहले जहां स्पॉन (बीज) बाहर से मंगवाना पड़ता था और लागत ज्यादा आती थी, वहीं अब महिलाएं खुद ही स्पॉन तैयार करना और बैग बनाना सीख चुकी हैं. इससे उनकी लागत घटी है और मुनाफा बढ़ा है. कम संसाधनों में शुरू हुआ यह काम अब महिलाओं के लिए स्थायी रोजगार बनता जा रहा है. घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ वे अपनी आय भी बढ़ा रही हैं. यह पहल न सिर्फ महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दे रही है.

    घर पर ही उगा रही मशरूम

    प्रशिक्षण के बाद महिलाएं अब अपने घरों में ही मशरूम उत्पादन कर रही हैं. कोई छत पर तो कोई घर के छोटे कमरे में मशरूम उगाकर स्थानीय बाजारों में बेच रही है. पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा, चाकुलिया, बहरागोड़ा, धालभूमगढ़, घाटशिला, जादूगोड़ा, मुसाबनी, डुमरिया और गुड़ाबांधा क्षेत्रों की 219 महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया है. जो महिलाएं पहले केवल गृहिणी थीं, वे अब मशरूम उत्पादन के जरिए न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि घर के खर्च में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं.बाजार में ऑयस्टर मशरूम 300 रुपए प्रतिकिलो तक बिक रहा है, जिससे महिलाओं की आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.

    पढ़िए सफलता की कहानी

    डुमरिया प्रखंड के चांदनडिहा गांव की महिला पारुल साव ने बताया कि  कुछ महीने पहले मुझे उद्यान विभाग से मशरूम उत्पादन का वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया था. इस प्रशिक्षण ने उनकी जिंदगी बदल दी. प्रशिक्षण के दौरान मुझे 30 मशरूम बैग तैयार कर घर ले जाने को मिला. करीब एक महीने बाद इन बैगों से मशरूम निकलना शुरू हुआ. कुल मिलाकर लगभग 25 किलो मशरूम का उत्पादन हुआ, जिसे मैने स्थानीय बाजार में बेच आमदनी प्राप्त की. पारुल साव ने बताया कि पहले मैं सिर्फ गृहिणी थी, लेकिन अब घर खर्चे में हाथ बात कर अच्छा महसूस हो रहा है. जिला उद्यान पदाधिकारी अनिमा लकड़ा ने बताया कि 219 महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया है. महिलाएं घर पर ही मशरूम आकार आमदनी कर रही है.

    रिपोर्ट- रोहित सिंह


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