लोकसभा चुनाव के पहले संशोधित झरिया मास्टर प्लान को मिलेगी मंजूरी ? जानिए शहर में प्रदूषण का हाल 

    लोकसभा चुनाव के पहले संशोधित झरिया मास्टर प्लान को मिलेगी मंजूरी ? जानिए शहर में प्रदूषण का हाल

    धनबाद(DHANBAD) | धनबाद में माफिया. जिसने भी उनकी ताकत और जलवा देखा  या सुना होगा ,झरिया शहर की हालत पर आज जरूर आंसू बहा रहा होगा.  झरिया की "लक्ष्मी बरसाने" वाली धरती आज अपनी किस्मत को  कोस रही होगी. यह  एक सच्चाई भी है. धनबाद कोयलांचल के कई माफिया स्वर्ग सिधार गए, उनके "यूथ विंग" आज हैं लेकिन शायद वह भी यह सब देख कर हैरत में पड़े होंगे.  धनबाद कोयलांचल में जब बिहार के मुख्यमंत्री पंडित बिंदेश्वरी दुबे हुआ करते थे और धनबाद के उपायुक्त  मदन मोहन झा थे ,तो  देश का एक बहुत बड़ा घोटाला सामने आया था और यह घोटाला था बालू घोटाला. फिर तो झरिया में भूमिगत आग भड़कने  लगी. झरिया शहर अब प्रदूषित शहरों में शुमार है. प्रदूषण से आबादी प्रभावित हो रही है. समय से पहले लोग भगवान को प्यारे  हो जा रहे है. 

    लोग चिल्ला तो रहे हैं  लेकिन सुनवाई नहीं हो रही 

     प्रदूषण से छुटकारा की आवाज की  कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है.  हाल के दिनों में झरिया में प्रदूषण के खिलाफ लगातार आवाज बुलंद हो रही है.  झरिया की  कुछ संस्थाएं प्रदूषण के खिलाफ कमर कस  चुकी है.  लगातार आंदोलन किये  जा रहे है.  आगे भी करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है.  धीरे-धीरे ही सही, इसमें लोगों की भागीदारी बढ़ती जा रही है.  ग्रीन लाइफ, झरिया एवं यूथ कॉन्सेप्ट के संयुक्त तत्वावधान  में लगातार कार्यक्रम किये जा   रहे है.  प्रदूषण से परेशान लोगों की इसमें सहभागिता बढ़ती जा रही है.  बीसीसीएल ,झरिया के लोगों के निशाने पर है.  आरोप लगा रहे है कि  बीसीसीएल मानक के खिलाफ काम नहीं  कर रही है.  ओपन कास्ट माइनिंग के चलते प्रदूषण की रफ्तार तेज है.  वैसे भी ठंड का मौसम शुरू होते ही पूरे धनबाद में प्रदूषण का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है.  अभी तो दीपावली में और अधिक प्रदूषण बढ़ेगा, झरिया के लोगों का यह भी आरोप है कि राजापुर परियोजना से कोयला ट्रांसपोर्टिंग के दौरान हाईवे के चक्के  के साथ कीचड़ सड़क पर पहुंचता है.  फिर डस्ट बनकर उड़ता है.  यहां रहना और सड़क पर चलना दूभर  हो गया है.  बात इतनी ही भर नहीं है, पीने की पानी पर भी धूलकण की परत जम जाती है. 

    आउटसोर्सिंग कंपनियों का प्रोडक्शन पैटर्न सही नहीं 
     
    झरिया एवं आसपास या कहें पूरे कोयलांचल में जहां भी आउटसोर्सिंग कंपनियां ओपन कास्ट माइनिंग कर रही है, नियम की पूरी तरह से अनदेखी की जाती है. जैसे- तैसे कोयला निकाला जाता है.  कोयला उत्पादन के तरीके का क्या असर जनमानस पर पड़ेगा, इसका कोई ख्याल नहीं किया जाता.  झरिया शहर को भूमिगत आग  से भी बड़ा खतरा है.  इस आग  के बीच भी लोग रह रहे है.  केवल तीन से चार फीट दूर आग  और धुआं निकालते  हैं, वातावरण विषाक्त रहता है, फिर भी लोग रह रहे है.  इधर, सूचना मिली है कि झरिया पुनर्वास के लिए तैयार संशोधित झरिया मास्टर प्लान को लोकसभा चुनाव के पहले स्वीकृति मिल सकती है.  बुधवार को कोयला सचिव अमृतलाल मीणा ने बीसीसीएल  की समीक्षा की.  इस क्रम में झरिया पुनर्वास की भी समीक्षा हुई.  सचिन ने झरिया पुनर्वास को लेकर बीसीसीएल प्रबंधन को त्वरित पहल करने एवं और प्रभावित क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है.  अब देखना है कि  खतरनाक इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित बसाने  की दिशा में कितनी जल्दी और किस ढंग से पहल की जाती  है.  

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो



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