क्या इसी महीने झारखंड भाजपा को मिल जाएगा नया प्रदेश अध्यक्ष,धनबाद भाजपाइयों का तारापीठ दौरा तो यही बता रहा है


धनबाद(DHANBAD): तो क्या इसी महीने झारखंड में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हो जाएगी. यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि कोयलांचल में इसकी खूब चर्चा हो रही है. कौन प्रदेश अध्यक्ष होगा, इसका अभी खुलासा नहीं किया जा रहा है लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के चलते धनबाद भाजपा महानगर और ग्रामीण जिला अध्यक्ष का चयन नहीं हो पा रहा है. दोनों का कार्यकाल खत्म हो गया है. धनबाद महानगर और ग्रामीण जिला अध्यक्ष को लेकर मंथन तेज है. धनबाद के सांसद पशुपतिनाथ सिंह का अभी तक संगठन पर दबदबा रहा है. जिला अध्यक्ष वही बना है, जिसे सांसद चाहते रहे हैं. फिलहाल महानगर जिला अध्यक्ष के पद पर चंद्रशेखर सिंह काबिज हैं तो ग्रामीण जिला अध्यक्ष के पद पर ज्ञान रंजन सिन्हा बने हुए हैं.
भाजपा नेताओं का तारापीठ यात्रा रहा विशेष
धनबाद जिला भाजपा को दो भागों में विभक्त करने के बाद दो अलग-अलग जिलाध्यक्ष बनाए गए. वैसे चंद्रशेखर सिंह सांसद के कट्टर समर्थक बताए जाते हैं, जबकि ज्ञानरंजन सिन्हा पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के कोटे से आए बताए जाते हैं. बाबूलाल मरांडी के भाजपा में शामिल होने के बाद ज्ञानरंजन को ग्रामीण जिला अध्यक्ष बनाया गया है. वैसे, अब जाकर खुलासा हुआ है कि धनबाद के भाजपा नेताओं या यूं कहिए सांसद समर्थकों का तारापीठ यात्रा विशेष मकसद की ही रही. सूत्रों पर भरोसा करें तो वहां जिलाध्यक्ष पर रायशुमारी की गई. मंथन किया गया, संभवत मेयर का चुनाव लड़ने की तैयारी करने वाले शेखर अग्रवाल इसलिए भी इस ट्रिप में साथ रहे. चुनाव सांसद का हो, विधायक का हो अथवा मेयर का हो ,उनमें जिलाध्यक्ष की बड़ी भूमिका होती है .संभवतः इसीलिए सांसद भी यही चाहते हैं कि इस बार भी उनके कोई समर्थक ही जिलाध्यक्ष बने. चंद्रशेखर सिंह जिला अध्यक्ष इसलिए नहीं बन सकते हैं कि वह लगातार दो बार जिला अध्यक्ष की कमान संभाल चुके हैं. अब कोई तीसरा ही महानगर जिला अध्यक्ष बन सकता है. ऐसे में महानगर जिलाध्यक्ष बनने के लिए फिलहाल धनबाद और बाघमारा विधायक की भी सहमति जरूरी है .
महानगर जिला अध्यक्ष कौन हो सकता है, इसी पर मंथन के लिए तारापीठ का किया गया दौरा
धनबाद ,झरिया और बाघमारा 3 विधानसभा क्षेत्र महानगर के इलाके में आते हैं. जबकि टुंडी, सिंदरी और निरसा ग्रामीण जिला अध्यक्ष के अधीन होते हैं. तारापीठ यात्रा में विधायक राज सिन्हा, ढुल्लू महतो शामिल नहीं थे. संभवत पहले रायशुमारी कर यह बात पक्की करने की कोशिश की गई कि किसे महानगर का जिलाध्यक्ष बनाया जाए और संभवत इस पर तारापीठ दौरे में कुछ ना कुछ सहमति बन गई है. उसी सहमति पर विधायकों को भी हो सकता है कि तैयार कर लिया जाए. वैसे कोयलांचल में भाजपा की राजनीति सांसद पशुपतिनाथ सिंह उर्फ भाई जी के बिना चलती नहीं है. भाजपा में वही होता है जो भाई जी चाहते हैं. महा जनसंपर्क अभियान खत्म होने के बाद तुरंत तारापीठ दौरे के कई मतलब निकाले जा रहे थे. लेकिन अब मतलब साफ हो गया है कि महानगर जिला अध्यक्ष कौन हो सकता है, इसी पर मंथन के लिए तारापीठ का दौरा किया गया है.
किसके नाम पर लगेगी मुहर
वैसे महानगर अध्यक्ष जो भी बनेगा ,उसे विधायक राज सिन्हा, विधायक ढुल्लू महतो और पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल का समर्थन हासिल करना होगा. लेकिन भाई जी के सामने अगर किसी नाम पर सहमति बन गई तो सबका समर्थन प्राप्त करना आसान हो सकता है. हो सकता है इसलिए तारापीठ दौरे में चंद्रशेखर अग्रवाल को साथ लिया गया हो. अभी चंद्रशेखर अग्रवाल के रिश्ते राज सिन्हा और ढुल्लू महतो से अच्छे नहीं है. इसलिए भी हो सकता है कि दोनों विधायकों को इस दौरे से अलग रखा गया हो. वैसे कौन अध्यक्ष बनेगा, यह तो तय दिख रहा है क्योंकि जिन नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें जिस पर सांसद की मुहर लग जाएगी, वही अध्यक्ष बन जाएगा.यह तो सभी जानते और समझते है.
रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो
4+