झरिया विधायक को आर एस पी कॉलेज के बहाने  बैकफुट पर लाने को क्यों आगे आई आजसू,पढ़िए इस रिपोर्ट में 

    झरिया विधायक को आर एस पी कॉलेज के बहाने  बैकफुट पर लाने को क्यों आगे आई आजसू,पढ़िए इस रिपोर्ट में 

    धनबाद(DHANBAD): झरिया विधानसभा की राजनीति अब क्या आरएसपी कॉलेज के इर्द-गिर्द घूमेगी. भाजपा तो फिलहाल बेल गड़िया से कॉलेज के स्थानांतरण पर चुप है लेकिन आजसू स्थानांतरण के विरोध में कमर कसकर उतर गई है. वैसे भी आरएसपी कॉलेज, झरिया राजनीति का पहले भी केंद्र था और आज भी केंद्र बना हुआ है. झरिया राजा ने इलाके में शिक्षा के विकास के लिए इस कॉलेज की स्थापना कराई थी. लेकिन 2017 में इस कॉलेज को भूमिगत आग से खतरा बताते हुए इसे बंद कर दिया गया. एक झटके में यह फैसला लेकर सरकार ने लगभग 8000 बच्चो की पढ़ाई पर खतरा पैदा कर दिया था. इस कॉलेज को बाद में बेल गडिया शिफ्ट किया गया. वहां इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है.

    उसके बाद झरिया की वर्तमान विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह ने   कॉलेज को झरिया विधानसभा में स्थानांतरित कराने की जिद ठानी. अंततः झारखंड सरकार ने अभी हाल ही में 67 करोड रुपए भवन निर्माण के लिए स्वीकृत किया है. और कॉलेज का अब डिगवाडीह में स्थानांतरित होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इसी बीच आजसू ने  कॉलेज को नहीं शिफ्ट होने के लिए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है. आजसू का कहना है कि बेल गड़ियां से कॉलेज का डिगावाडीह में स्थानांतरित होने से लोगों को निराशा हाथ लगेगी. इसलिए हम कॉलेज के स्थानांतरण का विरोध कर रहे हैं.

    दूसरी ओर झरिया की विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह ने झरिया कॉलेज के भवन के लिए राशि आवंटित होने के बाद झरिया में रैली की. लोगों को बताया कि भवन के लिए राशि आवंटित करने के लिए उन्हें क्या-क्या करना पड़ा.  उनकी जिद थी की आरएसपी कॉलेज झरिया को फिर से झरिया विधानसभा क्षेत्र में लाया जाएगा. और इसमें वह सफल भी हुई है.

    लोग बताते हैं कि बेल गड़ियां में आरएसपी कॉलेज के पास इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है. छात्रों को आने-जाने में भी परेशानी होती है. यह बात भी सच है कि झरिया आरएसपी कॉलेज को भूमिगत आग का खतरा बता कर बंद कर दिया गया. लेकिन बगल में ही पानी की टंकी को यूं ही छोड़ दिया गया. अभी वहीं से झरिया के लोगों की प्यास बुझती है. आरएसपी कॉलेज का पुराना भवन खंडहर में तब्दील हो रहा है. अब उसकी कोई चर्चा नहीं करता. आरएसपी कॉलेज का भवन ऐतिहासिक है. पुराने कॉलेज भवन को बचाने के बजाय उसे बंद कर देना सरकार के निर्णय पर सवाल तो पैदा करता ही है

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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