पुलिस ने चलाया डंडा तो मैदान छोड़ भागे टाइगर जयराम! बोकारो स्टील प्रशासन को ऑनलाइन ही दिखा रहे आंख

    पुलिस ने चलाया डंडा तो मैदान छोड़ भागे टाइगर जयराम! बोकारो स्टील प्रशासन को ऑनलाइन ही दिखा रहे आंख

    रांची(RANCHI): बोकारो स्टील प्लांट में लाठी चार्ज के बाद एक विस्थापित युवक की मौत से खलबली मच गई. बड़े-बड़े विस्थापित नेता और विधायक बोकारो स्टील के प्रशासनिक गेट पर पहुंचकर अपना रौद्र रूप दिखाया. लेकिन बवाल बढ़ता देख पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी. श्वेता सिंह जो स्थानीय विधायक हैं उन्हें हिरासत में ले लिया. इतना होता देख डुमरी विधायक जयराम महतो भाग खड़े हुए. उसके बाद अब सवाल खड़ा होता है कि आखिर विस्थापितों की बात करने वाले नेता पुलिस की इतनी छोटी कार्रवाई से क्या डर गए हैं? जो जयराम महतो आक्रामक रूप सोशल मीडिया पर दिखाते हैं यहां पर फेल क्यों हो गए? क्या जयराम महतो भी सिर्फ राजनीतिक रोटी सेंकने बोकारो पहुंचे थे. इन सवालों का जवाब बोकारो विधायक श्वेता सिंह भी खोज रही हैं. पूछ रही है कि आखिर तमाम नेता कहां भाग गए.

    दरअसल, दो दिन पहले बोकारो स्टील के प्रशासनिक भवन के सामने अप्रेंटिस संघ के युवक प्रदर्शन कर रहे थे. इसी बीच माहौल तनावपूर्ण हुआ और सीआईएसएफ ने लाठी चार्ज कर दी. जिसमें एक युवक की जान चली गई.  उसके बाद घटना की जानकारी मिलते ही बोकारो विधायक श्वेता सिंह मौके पर पहुंची. प्रशासनिक अधिकारियों के साथ वार्ता चल ही रही थी कि इस बीच डुमरी विधायक जयराम महतो भी पहुंचे. जयराम महतो को आता देख श्वेता सिंह और जयराम महतो के समर्थकों के बीच झड़प भी हुई. मामला बढ़ता देख पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी. बोकारो विधायक श्वेता सिंह को देर रात हिरासत में ले लिया गया. इसके बाद अब स्थानीय लोग से लेकर बोकारो विधायक तक सवाल पूछ रहे हैं कि जयराम महतो और अन्य नेता कहां फरार हो गए

    अगर देखें तो इस पूरी लड़ाई में जयराम महतो एक दिन के अलावा जब पुलिस की कार्रवाई तेज हुई तो वह कहीं भी ग्राउंड पर नहीं दिखे. न ही उनसे कोई कांटेक्ट हो पा रहा है. जयराम महतो का सिर्फ पोस्टर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसमें विस्थापितों को लेकर लंबी लड़ाई की बात कह रहे हैं और ऑनलाइन ही बोकारो स्टील प्रशासन को आंख दिखा रहे हैं.

    ऐसे में अब देखना होगा कि आखिर जयराम महतो कब तक बोकारो पहुंचते हैं. क्योंकि, जब हिंसा हुई तो जयराम महतो मौके पर पहुंचे थे और झड़प के बाद मीडिया से भी बात किया था और कहा था कि वह हक दिलाने के लिए यहां पहुंचे हैं. लेकिन अब सवाल है कि क्या हक एक दिन में जयराम महतो ने पीड़ित परिवार को या पीड़ित युवकों को दिला दिया. क्योंकि, पुलिसिया कार्रवाई तेज होने के बाद जयराम महतो कहीं दिख ही नहीं रहे हैं.

    रिपोर्ट: समीर हुसैन


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