धनबाद में भाजपा के भीतर की "भाजपा" जब जगी तो कैसे बदलने लगे हैं परिदृश्य,अब आगे और क्या?


धनबाद: धनबाद में भाजपा के भीतर की "भाजपा" अब जग गई है. संजीव सिंह के खिलाफ लॉबिंग करने वाले भाजपा नेता अब अपना रुख और रास्ता दोनों बदल लिए हैं. यह अलग बात है कि प्रदेश स्तर पर जिन बागी भाजपा नेताओं को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया था, उनमें कई विजय घोषित हुए हैं.
ऐसे में भाजपा अजमंजस में तो जरूर है, लेकिन एक संकेत यह भी मिल रहे हैं कि नोटिस जारी करने वाले प्रदेश के प्रभारी ने ही सोशल मीडिया पर विजई प्रत्याशियों को शुभकामनाएं दी हैं. मतलब साफ है कि बागियों के खिलाफ अब कार्रवाई के बजाय भाजपा उन्हें गले लगाने की तैयारी में है.
यह अलग बात है कि धनबाद में मेयर उम्मीदवार को समर्थन देने के लिए कई स्तर पर राजनीति हुई. संजीव अग्रवाल को भाजपा ने समर्थित उम्मीदवार घोषित कर दिया. सिर्फ घोषित ही नहीं किया, बल्कि प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर के नेता धनबाद में कैंप करते रहे.
झरिया विधायक रागिनी सिंह के भी राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठाए गए. पूरे चुनाव में उन्हें तटस्थ रहने का निर्देश दिया गया. वह पार्टी के निर्देश का पालन करती रही. इस बीच समय ने ऐसा पलटा खाया कि संजीव सिंह भारी मतों से मेयर का चुनाव जीत गए.
चुनाव जीतने के बाद सोशल मीडिया पर संजीव सिंह को भाजपाई बताने की होड़ मची हुई है. कहा जाने लगा है कि हम साथ थे, साथ हैं और साथ रहेंगे. लेकिन यह बात चुनाव के दौरान कहीं ना देखी और ना सुनी गई .लेकिन परिणाम आने के बाद सब की बोली बदल गई है. रविवार को तो धनबाद के भाजपा विधायक राज सिंहा खुद सिंह मेंशन पहुंचे और संजीव सिंह को जीत की बधाई दी. यह पहला मौका था, जब पार्टी के नेताओं की मौजूदगी में विधायक रागिनी सिंह संजीव सिंह के साथ दिखी.
यह इशारा काफी है कि संजीव सिंह के खिलाफ भाजपा कार्रवाई करने के बजाय अब उन्हें गले लगाएगी. चिरकुंडा नगर परिषद में यह देखा गया है कि बागी ने जब चुनाव जीत लिया तो भाजपा की टीम उनके आवास पर पहुंच गई और उन्हें भाजपा का पट्टा पहनाकर दावा किया कि भाजपा में थी और भाजपा में हैं. वैसे चुनाव के पहले प्रदेश महामंत्री प्रदीप वर्मा ने झारखंड के 18 लोगों को कारण बताओं नोटिस जारी किया था.
इनमें से कई चुनाव जीत गए हैं. कहा जा सकता है कि बागियों को जिस तरह से जनता ने हाथों-हाथ लिया है, इसे स्पष्ट है कि भाजपा का नेतृत्व उम्मीदवारों के चयन प्रक्रिया में कहीं ना कहीं चूक की है. जिसका परिणाम है कि आगे बढ़कर प्रदेश नेतृत्व को पीछे लौटना पड़ सकता है.
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