क्या कहता है संविधान का 173 वां अनुच्छेद, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संबंध में समझिए


रांची (RANCHI): हमारे यहां शासन व्यवस्था भारत के संविधान के रूप चलती है. हम विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं. यहां संसदीय शासन प्रणाली है. जनता चुनकर अपना जनादेश देती है. उसी के अनुसार शासक वर्ग निर्धारित होता है. विपक्ष भी संसदीय प्रणाली में आंकड़ों के अनुरूप तय होता है.
हेमंत को लेकर सुर्खियों में आया भारत निर्वाचन आयोग का मंतव्य
अभी झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सदस्यता पर भारत निर्वाचन आयोग का मंतव्य सुर्खियों में है. राज्यपाल को भेजे गए मंतव्य का खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है लेकिन कुछ चीजें स्पष्ट इशारा करती हैं. भारत का संविधान संसद सदस्य विधान मंडल सदस्य के बारे में अलग-अलग अनुच्छेद के तहत आवश्यक अर्हता परिभाषित किए हुए है. भारत के संविधान का अनुच्छेद 173 विधान मंडल के सदस्य की अर्हता का स्पष्ट उल्लेख करता है कि अन्य शर्तों के अलावे यह भी अनिवार्य है कि कोई भी व्यक्ति लाभ के पद पर नहीं रह सकता. मुनाफाखोरी नहीं कर सकता है.
माइनिंग मामला
संक्षेप में यह बताना जरूरी है कि मुख्यमंत्री के नाम माइनिंग लीज नवीकरण का मामला स्पष्ट तौर पर इस डायरी में आता है. पहले से लीज होना गलत नहीं है, लेकिन खुद खनन मंत्री होने के नाते लीज नवीकरण के लिए आवेदन देना और प्राप्त करना साफ तौर पर लाभ अर्जित करने जैसा है. इसलिए जब विवाद पनपा तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने फरवरी 2022 में अपने नाम माइनिंग लीज को सरेंडर कर दिया.जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में भी यह उल्लेख है कि अगर कोई जनप्रतिनिधि लाभ प्राप्त करने की नीयत से कोई कार्य करता है तो वह सदस्यता से वंचित किया जा सकता है या फिर वह अयोग्य ठहराया जा सकता है. अब इतना तो साफ है कि जब यह स्थापित हो जाता है कि माइनिंग लीज लेकर उसका नवीकरण कराकर मुख्यमंत्री ने लाभ कमाने का इरादा किया था. इससे अधिक संगीत बात यह है कि खुद खनन मंत्री होने के नाते मुख्यमंत्री ने आवेदन देकर माइनिंग लीज का नवीकरण कराया.
क्या कहता है भारत का संविधान
भारत का संविधान कहता है कि कोई भी व्यक्ति अगर विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य ठहरा दिया जाता है या वंचित कर दिया जाता है तो वह फिलहाल मंत्री भी नहीं बन सकता है. स्पष्ट है कि मंत्री वही बन सकता है जिसके पास विधानसभा सदस्य बनने की योग्यता हो.यहां पर भारत निर्वाचन आयोग ने अगर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सदस्यता इस आधार पर करने की अनुशंसा की तो फिर तत्काल उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा और फिर भी बहुमत दिखाकर मुख्यमंत्री भी नहीं बन सकते हैं. यानी संविधान की व्याख्या साफ तौर पर संकेत दे रही है.
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