एक्सटेंडेड एजुकेशन फीस का धनबाद में विरोध, आखिर क्या है यह शुल्क -आप भी जानिए 

    एक्सटेंडेड एजुकेशन फीस का धनबाद में विरोध, आखिर क्या है यह शुल्क -आप भी जानिए

    धनबाद (DHANBAD): एक्सटेंडेड एजुकेशन फीस.  धनबाद में इस फीस  को लेकर हंगामा मचा हुआ है.  आरोप है कि यह राशि धनबाद के प्रतिष्ठित कार्मेल स्कूल द्वारा ली जा रही है. इसके खिलाफ अभिभावक कुमार मधुरेंद्र ने सरकार के विभिन्न एजेंसियों के पास शिकायत की है. उसके आधार पर स्कूल को पत्र देकर जवाब  मांगा गया है.  वही, इस संबंध में स्कूल प्रबंधन का कहना है कि पत्रों का जवाब दे दिया गया है.  इसके अलावा ऑन कैमरा कुछ भी बोलने से स्कूल प्रबंधन ने इंकार कर दिया.  इस संबंध में जब शिकायतकर्ता कुमार मधुरेंद्र से बात की गई तो उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण आयोग और शिक्षा विभाग में हमने शिकायत की है. उसके आधार पर स्कूल को पत्र भी जारी किया गया है.  आगे क्या होता है ,यह देखने वाली बात होगी. 

    स्कूल प्रबंधन राशि के लिए लगातार बना रहा है दबाव

    उनका कहना है कि स्कूल प्रबंधन ने उन्हें बुलाया था और कहा था कि आप किस्त में ही सही लेकिन पैसे का भुगतान कर दीजिये. हमने भुगतान नहीं किया है और हम चाहते हैं कि स्कूल प्रबंधन इस राशि को नहीं ले, जो लोग दे दिए हैं,  उनकी राशि समायोजित कर कर दी जाये.  मधुरेंद्र कुमार ने 18 अगस्त को चिट्ठी लिखकर कहा था कि विद्यालय द्वारा कभी पोर्टल के द्वारा पत्र भेजकर तो कभी वर्ग शिक्षिका के व्हाट्सएप नंबर द्वारा, तो कभी मैसेज भेज कर एजुकेशन  एक्सटेंशन फीस के रूप में ₹6000 की मांग की जा रही है.  हम जानना चाह रहे हैं कि इसका औचित्य  क्या है. 

    स्कूल के पत्र से होती है मानसिक पीड़ा 
     
    उन्होंने यह भी लिखा है कि स्कूल के  इस काम से मुझे और मेरी पुत्री को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है.  किसी को भी मानसिक रूप से प्रताड़ित करना एक अपराध है.  शिकायत पर बाल संरक्षण आयोग और जिला शिक्षा विभाग ने भी स्कूल को पत्र लिखकर जवाब मांगा है.  इधर ,इस संबंध में धनबाद जिला अभिभावक महासंघ के अध्यक्ष मनोज मिश्रा कहते हैं कि निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को लगातार प्रताड़ित किया जाता है.  उन्होंने  झारखंड सरकार को भी को भी घेरा.  कहां कि  झारखंड में आयोग का गठन लंबित है, इस वजह से या तो केंद्रीय संगठनों से अभिभावक संघ केवल पत्राचार कर पाता है या फिर कोर्ट में मुकदमा करना पड़ता है.  और मुकदमा में पैसे भी खर्च होते हैं, ऐसे में अभिभावक संघ के समक्ष परेशानी पैदा हो जाती है. 


    रिपोर्ट : शाम्भवी सिंह के साथ प्रकाश 



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