1932 की खतियानी रैयत 2002 और 2022 पर क्या बोले विधायक प्रदीप यादव


गोड्डा(GODDA): झारखण्ड प्रदेश का गठन हुए 22 वर्ष होने को है. मगर, आज तलक इस राज्य की स्थानीयता नीति का निर्धारण नहीं हो सका है. ऐसा नहीं कि अब तक की सरकारों ने इसे लेकर प्रयास नही किया. मगर, अमली जाम नहीं पहना सके. कभी न्यायालय में मामला फंस गया तो कभी जनता के विरोध और कभी विपक्ष द्वारा विरोध की वजह आज तलक स्थानीयता की नीति नहीं बन पायी. इस बार फिर हेमंत सोरेन की कैबिनेट द्वारा बुधवार को इसकी मंजूरी दी गयी है, जिसको लेकर सत्ता पक्ष के कुछ लोग खुश हैं तो कुछ नाखुश भी. गोड्डा में भी सत्ताधारी पक्ष के विधायक प्रदीप यादव के घर गुरुवार को लोगों का हुजूम बधाई देने पहुंचने लगा था.
2002 में सरकार में न्यायालय के निर्देश के बाद सो गयी थी
बधाइयों का सिलसिला जब कुछ थमा तो हमने विधायक प्रदीप यादव से ये पूछा कि आप 2002 में सरकार में थे और वर्तमान की सरकार विपक्ष में और तब भी 1932 को स्थानीयता के रूप में लाया गया था और उस वक्त के 1932 और अभी के 1932 खतियान में क्या अलग है. तो उन्होंने कहा कि उस वक्त की सरकार ने जब इसे लागू करने का फैसला लिया था तो न्यायालय में मामला चले जाने के बाद न्यायालय के निर्देश के बाद उस वक्त की सरकार ने इस विधेयक को ठंडे बसते में डाल दिया था.
नौवीं अनुसूची में डालकर इस विधेयक को संरक्षण दिया जायेगा : प्रदीप
2002 में जिस तरह से पूरे प्रदेश में इसी 1932 खतियान का विरोध हुआ था. लोग सड़कों पर उतरे थे और अब जबकि फिर से वही खतियानी को स्थानीयता के रूप में कैबिनेट से मंजूरी दी गयी है तो क्या फिर विरोध नही होगा, तो विधायक प्रदीप यादव बोले कि इसे नौवीं अनुसूची में डालकर संरक्षित करने का फैसला लिया गया है इसलिए इस बार इस विधेयक को सर्व सम्मति से मंजूरी मिल जानी चाहिए.
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