फूलो झानो मेडिकल कॉलेज में पानी की किल्लत, परेशान छात्राओं ने डीसी से लगाई गुहार, जानें क्या मिला आश्वासन

    दुमका(DUMKA):दुमका के दिग्घी में स्थित है फूलो झानो मेडिकल कॉलेज. राज्य की पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार के समय मे ये मेडिकल कॉलेज अस्तित्व में आया. मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन होते ही कठिन प्रतियोगिता परीक्षा पास करने के बाद यहां छात्रों का एडमिशन हुआ. निश्चित ही एडमिशन के बाद छात्र और उनके अभिभावक दोनों खुश हुए होंगे. छात्रों को लगा होगा कि अब उनके डॉक्टर बनने का सपना साकार होगा.

    फूलो झानो मेडिकल कॉलेज में पानी की किल्लत

    अभिभावक यही सोच रहे होंगे कि वर्षों की बात है, संघर्ष के दिन इतिहास की बातें होंगी और बच्चे डॉक्टर बन कर समाज और देश की सेवा कर परिवार का नाम रौशन करेंगे. लेकिन दुमका के फूलो झानो मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई करना इतना आसान नहीं है. आज भी सैकड़ों छात्र प्रतिदिन संघर्ष कर रहे है. कभी बिजली के लिए तो कभी पानी के लिए. समस्या है जो समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रही है.

    परेशान छात्रों ने डीसी से लगाई गुहार

    दरअसल तीन दिनों से फूलो झानो मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. भीषण गर्मी में जब पानी संकट का सामना हो जाए तो सोचिए जीवन कितना कष्टप्रद हो जाता है. ना पीने के लिए पानी और ना नहाने के लिए पानी. पहले दिन इंतजार में बीता. दूसरे दिन यानी गुरुवार को छात्रों ने समस्या से मैनेजमेंट को अवगत कराया. प्रबंधन के संज्ञान में आने के बाद कल एक टैंकर पानी उपलब्ध कराया गया.

    बूंद-बूंद पानी को तरस रहे छात्र

    चार सौ छात्रों के बीच एक टैंकर नाकाफी साबित हुआ. आज शुक्रवार को ना तो टैंकर उपलब्ध हुआ और ना कोई वैकल्पिक व्यवस्था हुई, तो छात्रों के सब्र का बांध टूट गया. सत्र 2019, 2021 और 2022 सैकड़ों छात्र फरियाद लेकर डीसी के पास पहुंचे. छात्रों को उम्मीद है कि डीसी स्तर से ही समस्या का समाधान हो सकता है, क्योंकि प्रबंधन से कई बार गुहार लगाने के बाबजूद समस्या यथावत है.

    पहले भी पानी की हो चुकी है किल्लत

    ये कोई पहली घटना नहीं जब मेडिकल के छात्रों को पानी संकट का सामना करना पड़ा हो. मेडिकल कॉलेज तो चालू कर दिया गया है, लेकिन यहां संसाधनों की घोर कमी है. इसका खामियाजा यहां पढ़ने वाले छात्रों को भुगतना पड़ता है. आखिर इस स्थिति में कैसे पढ़ेगे यहां के छात्र यह एक अहम सवाल है. जरूरत है इस मुद्दे पर कॉलेज प्रबंधन, जिला प्रशासन और सरकार को सम्बेदनशील बनने की.

    रिपोर्ट-पंचम झा


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