झारखंड निर्माण के बाद की बनी सड़क हो गई जर्जर, ग्रामीण पस्त, कुछ यूं किया अपना गुस्सा ज़ाहिर

    लोहरदगा (LOHARDAGA): सरकार और जनता का रिश्ता हमेशा ही तू-तू मैं-मैं वाला रहता है. सरकार हर चुनावी साल बढ़-चढ़ कर लोगों का हिस्सा बनती है. लोगों के बीच बैठकर उनकी शिकायतें सुनती है. फिर उनकी शिकायतें दूर करने का आश्वासन देती हैं. हमेशा की तरह लोग उन पर विश्वास करते हैं और अपना वोट उस एक पार्टी और नेती के समर्थन में देते हैं. आमतौर पर चुनाव जीतने के बाद पार्टी लोगों से किए हर एक वादे और दावे से अपना पल्ला झाड़ लेती है. लेकिन हर चीज़ की एक सीमा होती है. किसी फिल्म में आपने भी सुना होगा ‘तारीख पर तारीख- तारीख पर तारीख’. तारीख मिलने या देने में कोई बुराई नहीं है. इस तारीख का मजाक तो तब बनता है जब उन तारीखों पर वादे पूरे नहीं होते. लोगों का सरकार पर भरोसा टूट जाता हैं और फिर पैदा लेता है आक्रोश. लोहरदगा के सेन्हा प्रखंड के जोगना गांव के लोगों के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. इनका गुस्सा तब फूटा जब 22 साल पहले बनी सड़क की अब तक एक बार भी मरम्मत नहीं करवाई गई. आलम ये है कि अब ये सड़क, सड़क जैसी रही ही नहीं. बारिश का पानी और गढ़्ढो से भरी बेकार सड़क बन चुकी है. सरकार की इस अनदेखी से नाराज़ ग्रामीणों ने बड़े ही अनोखे तरीके से अपना गुस्सा जाहिर किया. 

    क्या है मामला

    लोहरदगा जिले की अधिकतर सड़क बद से बदतर हो रही है. वहीं बरसात का मौसम आते ही ये सड़क कम गड्ढा ज्यादा दिखाई देने लगती है. इस बरसात भी सड़कों का कुछ ऐसा ही हाल है. कहीं सड़क कीचड़ वाले रास्ते में तब्दील हो चुकी. जहां गाड़ी से तो जाना दूर, पैदल चलना भी मुश्किल है. इस से नाराज़ जिले के सेन्हा प्रखंड के जोगना के ग्रामीणों ने कई जगहों पर सड़क पर धानरोपनी कर सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ आक्रोश व्यक्त कर नारा लगाया कि ‘रोड़ नहीं तो वोट नहीं’.  साथ ही रोड़ नहीं बनने पर जनप्रतिनिधियों को गांव में घुसने पर भी रोक लगाने की बात कर रहे हैं. ये सड़क का हाल सेन्हा प्रखंड मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर सेन्हा प्रखंड क्षेत्र के उगरा मेढ़ो-जोगना से होकर प्रखंड मुख्यालय को जोड़ने वाली यह जोगना सड़क की है, जो झारखंड निर्माण के बाद बनी ही नहीं है.

    ग्रामीणों की परेशानी

    हर बरसात में यह सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है. सड़क कम कीचड़ ज्यादा दिखाई पड़ रही है. कई गाड़ियां इसमें फंस जाती है, तो कभी लोग कीचड़ में गिर पड़ते हैं. साथ ही बच्चों को स्कूल जाने और रात में किसी को अस्पताल ले जाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती हैं. जोगना के ग्रामीण शिवनाथ लोहरा, प्रदीप कुमार और सुनील उरांव बताते है की वे जब से देख रहे हैं, सड़क का यही हाल है. कई अधिकारी आए-गए, कई नेता वोट मांगने आए और सड़क बनाने का अस्वशान दिया. लेकिन सड़क नहीं बनी बरसात में बहुत दिक्कत होता है. बच्चों को और बीमार लोगों को इसलिए हमलोग आज सरकार और जिला प्रशासन से आक्रोश होकर सड़क पर धनरोपनी किया और अगर सड़क नहीं बनती है तो वोट नहीं देंगे और न ही किसी नेता अधिकारी को गांव में घुसने देंगे सब वादा कर के भूल जाते हैं.

    रिपोर्ट: लोहरदगा ब्यूरो


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