दुमका(DUMKA): आदिवासियों के समग्र विकास की कल्पना के साथ बिहार से अलग झारखंड राज्य बना. राज्य बने लगभग 23 वर्ष होने को है. इन वर्षो में झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों का कितना विकास हुआ इसकी एक बानगी देखने को मिली उपराजधानी दुमका में. पक्की सड़क की मांग को लेकर सैकड़ों ग्रामीण दुमका - सिउडी मुख्य मार्ग को जाम कर दिया. लगभग 8 घंटे तक मुख्य मार्ग जाम रहने के बाद शिकारीपाड़ा बीडीओ संतोष कुमार चौधरी जाम स्थल पर पहुचे और ग्रामीणों को वर्तमान सड़क की मरम्मती के साथ शीघ्र पक्की सड़क निर्माण का आश्वासन देकर जाम समाप्त कराया.
दरअसल दरबारपुर और गन्दरकपुर को जोड़ने वाली सड़क काफी दयनीय स्थिति में है. ग्रामीणों को इस सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है. गांव तक एम्बुलेंस नहीं पहुचने के कारण बीमार व्यक्ति को अस्पताल तक ले जाने में काफी परेशानी होती है. स्कूल कॉलेज जाने वाले छात्रों को प्रतिदिन परेशानी का सामना करना पड़ता है. थोड़ी सी बरसात में सड़क की स्थिति नारकीय हो जाती है. घुट घुट कर जी रहे ग्रामीणों के सब्र का बांध आज टूट गया और ग्रामीण सड़कों पर उतर कर सड़क निर्माण की मांग करने लगे. ग्रामीणों का कहना कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान इसी मांग को लेकर लोगों ने वोट का बहिष्कार किया था. तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा लिखित आश्वासन दिया गया था कि इस सड़क के निर्माण कार्य की दिशा में जल्द करवाई होगी लेकिन आज तक ऐसा नहीं हुआ. ग्रामीण बीडीओ द्वारा लिखित आश्वासन का पेपर भी अपने साथ रखे हुए थे. ग्रामीणों कहना है कि जल्द से जल्द इस सड़क का निर्माण कराया जाए अन्यथा आंदोलन आगे भी जारी रहेगा.
सड़क जाम रहने से वाहनों की लंबी कतार लग गई. खास कर श्रावणी मेले में जलार्पण के बाद लौट रहे श्रद्धालुओं की कई वाहने जाम में फंस गई. जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. जाम हटने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली.
जनता को उम्मीद अपने जनप्रतिनिधियों से होती है. मतदाता अपना बहुमूल्य वोट देकर जनप्रतिनिधि को चुनाव जीता कर विधान सभा और लोक सभा भेजते है. इस उम्मीद के साथ कि जनोरतिनिधि उनकी समस्याओं को उचित प्लेट फॉर्म पर रख कर समस्या का समाधान करेंगे. शिकारीपाड़ा विधानसभा की जनता ने लगातार 7वीं बार नलीन सोरेन को चुनाव जीता कर भेजा. लगभग 35 वर्षो से नलीन सोरेन यहाँ के विधायक हैं. वर्तमान समय मे सत्ता में हैं. इसके बाबजूद ग्रामीण एक अदद पक्की सड़क के लिए तरस रहे है. वर्तमान में सुनील सोरेन यहाँ के सांसद है. भाजपा के सांसद हैं और केंद्र में भाजपा की सरकार है. केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क बनाया जाता है. जिस लोक सभा चुनाव में ग्रामीणों ने वोट का बहिष्कार किया था और अधिकारियों के आश्वासन के बाद अपने मताधिकार का प्रयोग किया, उस चुनाव में सुनील सोरेन शिबू सोरेन को पराजित कर दुमका के सांसद बने. चुनाव जीतने के बाबजूद सांसद का ध्यान इस सड़क पर नहीं गया.
आगामी वर्ष चुनावी वर्ष है. चुनाव आते ही निवर्तमान जनप्रतिनिधि से लेकर तमाम प्रत्यासी गली मोहल्ले घूम कर जनता को समस्या के समाधान का आश्वासन देंगे. लेकिन चुनाव जीतते ही अपना वादा भूल जाएंगे. जनता भी इस बात को बखूबी समझ रही है. तभी तो चुनाव से पूर्व ही जनता अपना रूप दिखाने लगी है.
रिपोर्ट:पंचम झा
Thenewspost - Jharkhand
4+

