दुमका शहर में 2 दर्जन से ज्यादा जगहों पर लगा  यूनिपोल, लेकिन एजेंसी शर्तों का नहीं कर रही है अनुपालन, पढ़ें पूरा मामला

    दुमका शहर में 2 दर्जन से ज्यादा जगहों पर लगा  यूनिपोल, लेकिन एजेंसी शर्तों का नहीं कर रही है अनुपालन, पढ़ें पूरा मामला

    दुमका(DUMKA): हर कंपनी अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए विज्ञापन का सहारा लेती है, लेकिन यहां बिकने का मतलब किसी भी वस्तु की खरीद बिक्री से नहीं बल्कि सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित है, तभी तो केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक योजनाओं के प्रचार प्रसार के लिए प्रचार प्रसार के विभिन्न माध्यमों का सहारा लेती है.आज आलम यह है कि प्रिंट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक सरकार की योजनाओं का प्रचार प्रसार करती है और सरकार भी विज्ञापन पर पानी की तरह रुपया बहाती है. मकसद बस एक ही होता है कि योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक लोग उसका लाभ उठा सकें.

    दुमका शहर में 2 दर्जन से ज्यादा जगहों पर लगा यूनिपोल

    समय के साथ-साथ प्रचार प्रसार के माध्यम भी बढ़ते गए. नया कांसेप्ट आया यूनिपोल का. शहर की खूबसूरती बढ़ाने के साथ साथ प्रचार प्रसार के दुमका में वर्ष 2023 के शुरू में यूनिपोल लगना शुरू हुआ. यूनिपोल का कांसेप्ट दुमका के लिए नया था. हर तरफ चर्चा होने लगी. The News post ने यूनिपोल के कॉन्सेप्ट को लेकर उस समय नगर परिषद से जानना चाहा तो कहा गया कि सरकार के स्तर से हुआ है.जिसमें नगर परिषद की जिम्मेदारी जगह चिन्हित कर कार्यकारी एजेंसी को देना है. इसी क्रम में The News Post को सरकार और कार्यकारी एजेंसी के बीच हुए करार का एक पत्र हाथ लगा. यह पत्र सरकार और मे. राज आउटडोर एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड के बीच का है. समय के साथ शहर में 2 दर्जन से ज्यादा जगहों पर यूनिपोल लग गया, लेकिन करार की जो शर्ते हैं उसका अनुपालन नहीं हो रहा है.

    करार शर्त का नहीं हो रहा अनुपालन

    करार के अनुरूप यूनिपोल के एक तरफ सरकार की योजनाओं का प्रचार प्रसार करना है जबकि दूसरी तरफ कार्यकारी एजेंसी की ओर से प्राइवेट विज्ञापन लगाना है. निजी विज्ञापन से जो कमाई होगी वह कार्यकारी एजेंसी की होगी.15 वर्षो तक रख रखाव एजेंसी को करना है, लेकिन दुमका में जितने भी यूनिपोल लगे हैं किसी पर भी सरकारी योजना का प्रचार प्रसार नहीं हुआ. इस बाबत जब कुछ महीने पूर्व  जन संपर्क पदाधिकारी से पूछा गया तो उसने इस मामले पर अनभिज्ञता जताते हुए नगर परिषद का मामला करार दिया. पत्र में इस बात का उल्लेख नहीं है कि मोनेटरिंग कौन विभाग करेगा लेकिन अमूमन सरकार की योजनाओं के प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी पीआरडी पर रहती है.

    कार्यकारी एजेंसी कर रही है मनमानी

    बात यहीं समाप्त नहीं हुई. कार्यकारी एजेंसी का मनोबल इतना बढ़ गया कि बगैर नगर परिषद की अनुमति के जहाँ तहां यूनिपोल के लिए गढ्ढा खोदना शुरू कर दिया. 2 दिन पूर्व डीसी चौक पर गढ्ढा खोदता देख जब पत्रकारों ने जानना चाहा तो कार्यकारी एजेंसी डीबी इंटरप्राइजेज ने जबाब देना उचित नहीं समझा. नगर परिषद के सिटी मैनेजर सुमित सोरेन को जब इसकी जानकारी दी गयी तो वे स्थल पर पहुच कर कार्य को बंद कराया और कहा कि जहाँ गढ्ढा खोदा गया वह स्थल यूनिपोल के लिए चिन्हित नहीं है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुछ जगहों पर रोड सेफ्टी का ख्याल नहीं रखा गया है, लेकिन जब उनसे पूछा गया कि आखिर अभी तक यूनिपोल पर सरकार की योजना से संबंधित प्रचार प्रसार क्यों नहीं हुआ तो उनका कहना है कि यह पीआरडी का काम है.

    एजेंसी यूनिपोल के दोनों तरफ प्राइवेट विज्ञापन लगाकर मालामाल हो रही है

    पीआरडी और नगर परिषद दिनो एक दूसरे के माथे पर बेल फोड़ने में लगा है. शहर की खूबसूरती जरूर बढ़ी लेकिन सरकार की मंशा पर पानी फिर गया और कार्यकारी एजेंसी यूनिपोल के दोनों तरफ प्राइवेट विज्ञापन लगाकर मालामाल हो रही है. उम्मीद की जानी चाहिए कि खबर प्रसारित होने के बाद संबंधित विभाग का पक्ष इस मामले में जरूर आएगा. हम उनके पक्ष को भी प्रमुखता से प्रसारित करेंगे. ताकि सरकार ने जिस उद्देश्य से कार्यकारी एजेंसी को शहर में यूनिपोल लगाने की अनुमति दी है वह पूरी हो सके.


    रिपोर्ट-पंचम झा


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