फुटपाथ पर अब रात नहीं गुजारेंगे बच्चे, जानिये सरकार की क्या है योजना

    फुटपाथ पर अब रात नहीं गुजारेंगे बच्चे, जानिये सरकार की क्या है योजना

    रांची (RANCHI): सड़कों पर अक्सर भीख मांगते, खिलौना बेचते, कचरा चुनते या  फुटपाथों पर रात गुजारते बच्चों को आपने देखा होगा. हाईकोर्ट की फटकार के बाद राज्य सरकार ने उन बच्चों के दर्द को महसूस किया है. झारखंड राज्य बाल संरक्षण संस्था की निदेशक राजेश्वरी बी ने कहा कि ऐसे बच्चे आम बच्चों की तरह समाज की मुख्यधारा में शामिल किये जाएंगे, ताकि वे अपने अधिकारों एवं हक को सुनिश्चित कर सकें. घुमंतू बच्चों के लिए विशेष कार्य करने की जरूरत है. बता दें कि बेसहारा बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था रेनबो होम्स के साथ राज्य सरकार ने रांची में दो शेल्टर होम शुरू किए गए हैं. 

    बाल कल्याण समिति के नव चयनित अध्यक्ष व सदस्यों की प्रशिक्षण कार्यशाला

    राजेश्वरी बी राज्य ग्रामीण विकास संस्थान, हेहल में आयोजित कार्यशाला में बोल रही थीं. उन्होंने कहा कि राष्ट्र एवं राज्य स्तर पर बच्चों के लिए बहुत सारी नीतियों का निर्धारण किया गया है. उन्हीं नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए समाज के हर बच्चे को विशेषकर, जरूरतमंद बच्चे को उनके अधिकार के प्रति जागरूक करना ही हमारा कर्तव्य है. कार्यशाला का उद्देश्य यह है कि बाल संरक्षण एवं बाल अधिकार से जुड़े मुद्दों पर हम समाज को जागरूक कर सकें और बच्चों के प्रति दायित्वों का निर्वहन नीतिगत सिद्धांतों के मुताबिक कर सकें. कार्यशाला का आयोजन बाल कल्याण समिति के नव चयनित अध्यक्षों एवं सदस्यों के प्रशिक्षण के लिए किया गया था.

    चार साल में तस्करों के चंगुल से छुड़ाए गए करीब हजार बच्चे

    बता दें कि झारखंड में करीब 2000 बच्चे ग्रामीण विकास संस्थान, हेहल में रह रहे हैं. यूनिसेफ की झारखंड प्रमुख डॉक्टर कनिका मित्रा ने कहा कि 2019 से लेकर अब तक करीब 996 बच्चों को तस्करों से मुक्त कराया गया है. मुक्त कराए गए बच्चों में 410 बच्चों की उम्र 15 से 18 वर्ष के बीच है. वहीं 359 ऐसे बच्चे हैं जिनकी उम्र 11 से 14 वर्ष है. इसके अलावा मुक्त कराये गए 126 बच्चों की उम्र 10 वर्ष से भी कम है. उन्होंने कहा कि बच्चों की समस्या का आकलन पंचायत स्तर पर किया जाए.

    युवाओं के कौशल का विकास करना प्राथमिकता

    राजेश्वरी बी ने कहा कि जो बच्चे संस्थान में रह रहे हैं और जिनकी आयु 18 साल से ऊपर हो गई है, उन्हें कौशल विकास कार्यक्रम से जोड़ना प्राथमिकता होनी चाहिए. कार्यशाला में मुख्य रूप से यूनिसेफ की बाल संरक्षण विशेषज्ञ प्रीति श्रीवास्तव, वर्ल्ड विजन से रेखा खलखो, बचपन बचाओ आंदोलन के श्याम मलिक, अनिल यादव सहायक निदेशक सर्ड और सीआईएनआई की तन्वी झा उपस्थित थीं.


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