TNP Special: मेयर चुनाव के बाद सिंह मेन्शन का नया राजनीतिक पैंतरा,अरुण चौहान ,राम -रहीम कैसे बन गए सारथी

    धनबाद अपनी नंगी आंखों से चुपचाप एक नए राजनीतिक समीकरण को देख-परख  रहा है, आकलन कर रहा है.  मतलब निकाल  रहा है.  हर राजनीतिक नेता और कार्यकर्ता की गतिविधियों पर नजर रख रहा है.

    TNP Special: मेयर चुनाव के बाद सिंह मेन्शन का नया राजनीतिक पैंतरा,अरुण चौहान ,राम -रहीम कैसे बन गए सारथी

    धनबाद(DHANBAD) : धनबाद अपनी नंगी आंखों से चुपचाप एक नए राजनीतिक समीकरण को देख-परख  रहा है, आकलन कर रहा है.  मतलब निकाल  रहा है.  हर राजनीतिक नेता और कार्यकर्ता की गतिविधियों पर नजर रख रहा है.  फिलहाल  एक नए राजनीतिक समीकरण का उदय हुआ है.  नए समीकरण का अगुआ  बना है धनबाद का चर्चित घराना सिंह मेन्शन।  यह  बात तो सच है कि संजीव सिंह ने  मेयर का चुनाव तमाम झंझावातो  को लांघते  हुए जीतने के बाद सिंह मेंशन का मनोबल बढ़ा  है.  सिंह मेंशन को फिर से एक मजबूत वारिस मिल गया है.  कोयलांचल  की राजनीति को बगैर सिंह मेंशन के तराजू पर तौला  नहीं जा सकता है. 

    लोयाबाद की "पीठ" पर हाथ रखकर बाघमारा की ओर बढ़ने की कोशिश 

     जानकार सूत्रों के अनुसार सिंह मेंशन अब कतरास से सटे लोयाबाद की "पीठ" पर हाथ रखकर बाघमारा की ओर बढ़ने की लगातार कोशिश कर रहा है.  नगर निगम के डिप्टी मेयर  अरुण चौहान की पीठ पर जिस तरह संजीव सिंह का हाथ पड़ा और वह 55 में से 50 वोट लाकर डिप्टी मेयर बने.  उसी  समय से एक नए समीकरण की आहट सुनाई दे रही थी.  लेकिन यह आहट सोमवार को "आवाज" में तब बदली, जब संजीव सिंह के छोटे भाई सिद्धार्थ गौतम लोयाबाद पहुंचे. वहां चर्चित राम -रहीम ने उनका गर्म जोशी से स्वागत किया।  बैठक हुई, राजनीतिक समीकरण तय किए गए.  लोयाबाद जाने की पुष्टि सिद्धार्थ गौतम ने सोशल मीडिया पर भी की है. 

    राम- रहीम के बुलावे पर सिद्धार्थ गौतम पहुंचे थे लोयाबाद 
     
    यहां से अब एक सवाल उठता है कि राम- रहीम के बुलावे पर सिद्धार्थ गौतम क्यों गए? सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात तो हो नहीं सकती है.  निश्चित रूप से यह नए राजनीतिक ध्रुवीकरण का एक मजबूत आधार हो सकता है.  लोयाबाद इलाका कतरास से बिल्कुल सटा हुआ है.  कतरास बाघमारा विधानसभा क्षेत्र में आता है.  सांसद ढुल्लू  महतो के भाई शत्रुघ्न महतो बाघमारा से विधायक है.  इसके पहले ढुल्लू महतो  बाघमारा से तीन बार के विधायक रह चुके हैं.  मेयर चुनाव में तनातनी की बात जग जाहिर हो चुकी है.  सांसद ढुल्लू  महतो ने संजीव सिंह के बारे में कई टिप्पणियां की, जिसका फायदा कथित रूप से संजीव सिंह को मिला.  फायदे की बात केवल कार्यकर्ता ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि हाल ही में झारखंड के चर्चित विधायक जयराम महतो धनबाद आए थे.  उन्होंने कहा था कि मेयर पद पर शानदार जीत के लिए संजीव सिंह को जाकर सांसद ढुल्लू  महतो को बधाई देनी चाहिए, क्योंकि सांसद ढुल्लू  महतो की वजह से ही संजीव सिंह मेयर  चुने गए है. ऐसा जयराम महतो ने क्यों कहा, यह  तो वही जाने, लेकिन इस बात की चर्चा कोयलांचल में खूब हुई. 

    लोयाबाद  की "पीठ" पर हाथ रखकर सिंह मेंशन बाघमारा की ओर बढ़ना चाहता 
     
    दरअसल, लोयाबाद  की "पीठ" पर हाथ रखकर सिंह मेंशन बाघमारा में कैसे आगे बढ़ना चाह रहा है, इसके दो तो प्रत्यक्ष उदाहरण सामने हैं.  अरुण चौहान को डिप्टी मेयर भारी अंतर से चुना गया, वह लोयाबाद से ही आते है.  इसके अलावे राम- रहीम यानी राजकुमार महतो और असलम मंसूरी के साथ सिद्धार्थ गौतम की बैठक हुई.  सिद्धार्थ गौतम उनके दफ्तर पहुंचे और उनलोगों  ने  उनका गर्म जोशी से स्वागत किया.  उन्होंने कहा भी कि जब दो राजनीतिक दल के लोग मिलते हैं, तो कुछ ना कुछ राजनीतिक बात तो होती ही है.  मतलब उनका इशारा साफ था कि कोई ना कोई नया राजनीतिक समीकरण बन रहा है.  लोयाबाद इलाके में राम -रहीम की चलती है. वह दोनों इलाके के दबंग माने जाते है.  वह दोनों पूर्व मंत्री जलेश्वर महतो के समर्थक बताए जाते है.  उस इलाके में अक्सर कोयले के लोडिंग प्वाइंटों पर विवाद भी होता है.  इस विवाद में राम -रहीम का भी नाम आता है.  

    आगे --देखना दिलचस्प होगा की किसका -किसका "ब्लड प्रेशर "बढ़ता है ?
     
    वैसे तो यह जग  जाहिर है कि सांसद ढुल्लू महतो  और पूर्व मंत्री जलेश्वर महतो एक दूसरे के राजनीतिक विरोधी हैं.  अब राम -रहीम के साथ सिंह मेंशन की दोस्ती निश्चित रूप से एक नए समीकरण को जन्म दे रही है.  यहां यह बताना भी जरूरी लग रहा है कि राम- रहीम धनबाद जिला कांग्रेस के अध्यक्ष संतोष सिंह के भी विरोधी रहे हैं.  संतोष सिंह के फिर से जिला अध्यक्ष चुने जाने के बाद कई रैलियों  में राम -रहीम की भागीदारी रही है.  जहां तक याद है, निरसा  की एक रैली में वह दोनों  स्वयं मौजूद थे.  इसके अलावे यह भी आरोप लगाते रहे हैं कि संतोष सिंह के खिलाफ जो लोग भी आंदोलन कर रहे थे, उनकी पीठ पर राम -रहीम का हाथ था.  खैर, इतना तो तय है कि सिंह मेंशन अब  नए राजनीतिक समीकरण की ओर कदम बढ़ा चुका है.  दरअसल, संजीव सिंह के मेयर बनने के बाद से ही सिंह मेंशन राजनीति का एक नया केंद्र बन गया है.  केंद्र इसलिए भी बन गया है कि भाजपा के गढ़ धनबाद में बागी बनकर वह उम्मीदवार बने और चुनाव जीतकर बड़े-बड़े दावे करने वालों को उनकी "औकात" बता दी.  अब देखना है कि यह राजनीतिक समीकरण किस करवट बैठता है.  किसका -किसका "ब्लड प्रेशर" बढ़ता है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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