TNP Special:कॉरपोरेट जगत से राजनीति में प्रवेश करने वाले डॉ निशिकांत दुबे बन गए बीजेपी के फायर ब्रांड नेता, विवादों से रहा है गहरा नाता

    TNP Special:कॉरपोरेट जगत से राजनीति में प्रवेश करने वाले डॉ निशिकांत दुबे बन गए बीजेपी के फायर ब्रांड नेता, विवादों से रहा है गहरा नाता

    दुमका(DUMKA):सात चरणों में देश में वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव का मतदान समाप्त हो चुका है. 4 जून को पूरे देश में मतगणना होगी.तमाम प्रत्याशियों के लिए आज की रात कयामत की रात साबित होने वाली है.इस सब के बीच हम बात कर रहे हैं झारखंड के सबसे हॉट सीट कहे जाने वाले गोड्डा लोक सभा से  बीजेपी प्रत्याशी डॉ निशिकांत दुबे की.28 जनवरी 1969 को बिहार के भागलपुर के भवानीपुर में जन्म लेने वाले निशिकांत दुबे ने भागलपुर के मारवाड़ी कॉलेज से पढ़ाई की. वर्ष 2009 में गोड्डा लोकसभा से चुनाव जीत कर संसद भवन पहुचने वाले निशिकांत दुबे बहुत कम उम्र में ही एस्सार ग्रुप के कॉरपोरेट हेड बन गए थे.

    निशिकांत ने राजनीति में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, हर बार बढ़ाया जीत का फासला

    डॉ निशिकांत दुबे ने राजनीति में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.वर्ष 2009, 2014 और 2019 में लगातार 3 बार गोड्डा लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले निशिकांत दुबे को पार्टी आला कमान ने चौथी बार मैदान में उतारा. 2009 में कांग्रेस प्रत्याशी फुरकान अंसारी को पराजित कर सांसद बने.चुनाव मैदान में प्रदीप यादव झाविमो के टिकट पर थे. कहा जाता है कि इनकी जीत के लिए तात्कालिक कारण बना यूपीए गठबंधन से बगावत कर झमुमो सुप्रीमो शीबू सोरेन के बड़े बेटे दुर्गा सोरेन का चुनाव मैदान में कूदना.दुर्गा सोरेन 79153 मत लाकर चुनाव हार गए लेकिन निशिकांत की जीत का राह आसान कर गए.निशिकांत दुबे ने 6407 वोट से जीत दर्ज की.

    निशिकांत दुबे की छवि को खराब करने के लिए उनके पारिवारिक फोटो चौराहे पर चिपकाए गया था

     वर्ष 2014 के चुनाव से पहले बदनाम करने के उद्देश्य से गोड्डा लोक सभा क्षेत्र में इनकी कुछ पारिवारिक तस्वीरें चौक चौराहों पर चिपकाया गया. कहा जाता है कि विपक्षी के साथ साथ अपने ही पार्टी के कुछ नेताओं के इसारे पर यह किया गया. चुनाव का समय आया. एक बार फिर भाजपा ने निशिकांत दुबे पर भरोशा जताया.इनके सामने कांग्रेस प्रत्याशी फुरकान अंसारी और झाविमो प्रत्याशी प्रदीप यादव मैदान में ताल ठोकते रह गए. निशिकांत दुबे जीत के अंतर को बढ़ाते हुए 60682 मत से चुनाव जीत कर संसद भवन पहुच गए.

    2019 के लोकसभा चुनाव में निशिकांत दुबे ने जीत की हैट्रिक लगाई थी

    2019 के चुनाव में विपक्षी दलों ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा.बीजेपी  प्रत्याशी निशिकांत दुबे के सामने झाविमो प्रत्याशी के रूप में प्रदीप यादव मैदान में थे.प्रदीप को कांग्रेस के साथ साथ झामुमो, राजद सहित यूपीए के घटक दलों का समर्थन प्राप्त था.इसके बाबजूद निशिकांत दुबे 184227 मतों के प्रचंड अंतर जीत की हैट्रिक पूरी की.

    निशिकांत दुबे चौथी बार भी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं

    वर्ष 2024 के चुनाव में जीत का चौका लगाने निशिकांत के सामने इंडी गठबंधन से कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप यादव है. मतदान समाप्त हो चुका है. गोड्डा सीट पर सभी की निगाहें टिकी है.विपक्षी गठबंधन से इस बार पूरी तरह से निशिकांत को घेरने का प्रयास किया है.एक तरफ इंडी गठबंधन जहां अपनी जीत का दावा कर रहा है वहीं निशिकांत का दावा है कि झारखंड में सबसे ज्यादा मतों के अंतर से उनकी जीत होगी.

    विकास पुरुष के साथ निशिकांत बन गए भाजपा के फायर ब्रांड नेता

    इसमें कोई शक नहीं कि बीते 15 वर्षों में गोड्डा लोकसभा का चहुमुखी विकास हुआ.निशिकांत दुबे गोड्डा तक रेल लाने, देवघर में एम्स और हवाई अड्डा निर्माण के साथ साथ गोड्डा में अदानी पावर प्लांट की स्थापना को अपनी उपलब्धि गिनाते हैं.इसके अलावे भी उनकी लिस्ट में विकास कार्य की लंबी फेहरिस्त है. वैसे गोड्डा लोकसभा क्षेत्र में हुए विकास कार्य  का क्रेडिट लेने की होड़ मची है। इंडी गठबंधन के नेता इन कार्यों को यूपीए पार्ट 2 सरकार की उपलब्धि बताते हैं.आरोप तो यह भी लगता है कि कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए ही रेल और एयर पोर्ट गोड्डा लोकसभा में बनाया गया. लेकिन हकीकत यही है कि इसका फायदा ना केवल गोड्डा लोकसभा बल्कि सीमावर्ती बिहार और झारखंड के अन्य जिलों के लोग भी करते हैं.

    निशिकांत दुबे की छवि एक हिंदू नेता के रूप में रही है

    निशिकांत दुबे शुरू से ही हिंदुत्व की राजनीति करते रहे है. अपने बयान के कारण ये फायर ब्रांड नेता माने जाते है.अपने बयान के माध्यम से विपक्षी पर कड़ा प्रहार करते रहते है.सड़क से लेकर सदन तक अपनी बेबाक टिप्पणी के लिए जाने जाते हैं.विपक्षी इन्हें बड़बोला सांसद, हवा हवाई सांसद, अहंकारी सांसद, ईडी का प्रवक्ता जैसे विशेषण से विभूषित करते हैं लेकिन इतना जरूर है कि इनकी कही बातें देर सबेर सत्य साबित होती है. हेमंत सोरेन का जेल जाना ताजा उदाहरण है.

    विवादों से निशिकांत का रहा है गहरा नाता

    डॉ निशिकांत दुबे का विवादों से गहरा नाता रहा है. 2009 के लोक सभा चुनाव के समय जब पार्टी द्वारा प्रत्याशी बनाये जाने के बाद जसीडीह स्टेशन पर उतरे तो  बीजेपी कार्यकर्ता आपस मे ही भीड़ गए. कहा जाता है कि निशिकांत दुबे को भी चोट लगी. इनका कुर्ता तक फाड़ दिया गया.गोड्डा लोक सभा क्षेत्र के एक विधान सभा के पूर्व विधायक सह मंत्री से इनकी लड़ाई जग जाहिर है.सोशल मीडिया पर दोनों के बीच वार चलता रहता है.वर्ष 2014 में राज्य में जब झमुमो और बीजेपी  ने मिलकर सरकार बनाई तो अपने ही दल के एक बड़े नेता से इनका 36 का आंकड़ा जग जाहिर है. इतना ही नहीं, कहा जाता है कि निशिकांत के बयान के कारण ही गठबंधन टूट गया था.

    किसके दावे में कितना दम, पता चलेगा कल

     कांग्रेस विधायक और इंडी गठबंधन के प्रत्याशी प्रदीप यादव से भी इनका हमेशा 36 का आंकड़ा रहा है और दोनों एक दूसरे पर वार करने का मौका नहीं चूकते हैं. इस बार के चुनाव में इंडी गठबंधन से हर तरह से निशिकांत की घेराबंदी की है. इस बार का चुनाव इंडी गठबंधन ने अगड़ी पिछड़ी से लेकर बाहरी भीतरी तक के मुद्दों को आधार बनाकर लड़ा. बीजेपी  का 400 पार के नारे को आरक्षण समाप्त करने से जोड़कर जनता के बीच रखा गया.वहीं बीजेपी प्रत्याशी निशिकांत दुबे को पीएम नरेंद्र मोदी का चेहरा और किये गए विकास कार्यों पर भरोशा है.फिलहाल सभी प्रत्याशी अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं.किसके दावे में कितना दम है यह 4 जून को पता चल जाएगा.

    रिपोर्ट-पंचम झा


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