TNP SPECIAL:मुख्यमंत्री बदलते चले गए लेकिन झारखंड के मिडिल स्कूलों में नहीं सुधरे पढ़ाई के इंतजाम,रांची,धनबाद और पलामू का तो हाल बेहाल,पढ़िए यह रिपोर्ट

    TNP SPECIAL:मुख्यमंत्री बदलते चले गए लेकिन झारखंड के मिडिल स्कूलों में नहीं सुधरे पढ़ाई के इंतजाम,रांची,धनबाद और पलामू का तो हाल बेहाल,पढ़िए यह रिपोर्ट

    धनबाद(DHANBAD):झारखंड का मुख्यमंत्री चाहे बाबूलाल मरांडी रहे हो, अर्जुन मुंडा रहे हो, मधु कोड़ा रहे हो, हेमंत सोरेन रहे हो या वर्तमान के चंपई सोरेन.सरकारी शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की कभी ईमानदार कोशिश नहीं की गई.यह हम नहीं कह रहे,आंकड़े बोल रहे है.नतीजा सामने है. शिक्षा मंत्री रहे जगरनाथ महतो कुछ ईमानदार प्रयास शुरू जरूर किए थे लेकिन उनका असमय निधन हो गया. सूत्र बताते हैं कि झारखंड गठन के बाद से अब तक मध्य विद्यालयों में एक भी प्रधानाध्यापक के पद पर प्रोन्नति नहीं हुई है. इस वजह से फिलहाल 98% प्रधानाध्यापकों के पद खाली हैं. पद खाली वाले स्कूलों में रांची नंबर एक चल रहा है, तो धनबाद दूसरे नंबर पर है. और पलामू तीसरे नंबर पर.

    सूत्रों के अनुसार झारखंड के 16 जिलों में एक भी हेड मास्टर नहीं है

     जानकारी के अनुसार झारखंड में मध्य विद्यालयों में हेड मास्टर के कुल 3218 पद सृजित है. इनमें से वर्तमान में 3163 पद खाली है. और सिर्फ 55 हेड मास्टर के भरोसे प्रदेश के मध्य और प्राथमिक विद्यालय चल रहे हैं. केवल दो प्रतिशत स्कूलों में स्थाई हेड मास्टर हैं .बात सिर्फ इतनी ही नहीं है, हर महीने प्रधानाध्यापक अवकाश ग्रहण कर रहे हैं .शिक्षक संघ के सूत्रों के अनुसार झारखंड के 16 जिलों में एक भी हेड मास्टर नहीं है. जहां हैं उनकी भी संख्या नगण्य है. केवल रांची, हजारीबाग, जामताड़ा, पलामू, खूंटी, धनबाद जिला में ग्रेड 4 के प्रथम फेज में शिक्षकों की प्रोन्नति मिली है. बाकी जिलों में नहीं मिली है. खाली पदों की संख्या को देखते हुए योग्य शिक्षकों के अभाव में किस प्रकार झारखंड की कथित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा चल रही है, या इसके दावे किए जा रहे हैं. इसके तो भगवान ही मालिक है. कहा तो यह जा रहा था कि सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों के बराबर सुविधा देकर शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारा जाएगा, लेकिन मध्य विद्यालय के प्राचार्य को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं ,वह चौंकाने वाले हैं. बच्चे कल के भविष्य हैं और उनकी पढ़ाई में इस तरह की कोताही कहां तक उचित है?

    सरकार ही नहीं बल्कि संबंधित जनप्रतिनिधि भी कम जिम्मेवार नहीं हैं

     झारखंड के कितने ऐसे अभिभावक हैं, जो निजी स्कूलों में अपने बच्चों को भेज पाते हैं. सबको तो सरकारी व्यवस्था पर ही निर्भर रहना पड़ता है. लेकिन यह आंकड़ा ऐसा है, जो किसी को भी परेशान कर सकता है. आंकड़े के मुताबिक रांची, धनबाद, सरायकेला, चतरा ,खूंटी, हजारीबाग, रामगढ़, सिमडेगा, लोहरदगा, कोडरमा, साहिबगंज, पाकुड़, पूर्वी सिंहभूम ,पश्चिमी सिंहभूम, देवघर ,गुमला के सभी मध्य विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद खाली हैं. केवल दुमका में तीन ,लातेहार में 6, जामताड़ा में दो ,गढ़वा में पांच ,पलामू में 13, बोकारो में दो ,गिरिडीह में दो और गोड्डा में 25 प्रधानाध्यापक कार्यरत हैं. जबकि रांची में 299, धनबाद में 237, सरायकेला में 100, चतरा में 81, खूंटी में 65, हजारीबाग में 124, रामगढ़ में 53, सिमडेगा में 80, लोहरदगा में 74, कोडरमा में 53 ,साहिबगंज में 87 ,पाकुड़ में 81, पूर्वी सिंहभूम में 195, पश्चिमी सिंहभूम में 160, देवघर में 167, गुमला में 118 ,दुमका में 195, लातेहार में 120, जामताड़ा में 103, गढ़वा में 147 ,पलामू में 233, बोकारो में 117 ,गिरिडीह में 171, गोड्डा में 174 प्रधानाध्यापक के पद सृजित हैं. झारखंड के सांसद विधायक सोशल मीडिया पर कई तरह के पोस्टर लगाते हैं. तरह-तरह के बयान बाजी भी करते हैं, लेकिन किसी को यह नहीं दिखता है कि शहरी या ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी स्कूलों का क्या हाल है? बिना प्राध्यापक के झारखंड के मिडिल स्कूल कैसे चल रहे हैं? बच्चों को कैसी शिक्षा मिल रही होगी? यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है. इस स्थिति के लिए केवल सरकार ही नहीं बल्कि संबंधित जनप्रतिनिधि भी कम जिम्मेवार नहीं हैं.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो


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