रेलवे में अब कभी नहीं दिखेगा अंग्रेजो की यह पुरानी पहचान ,रेल मंत्री ने बजा दिया डंका!


धनबाद(DHANBAD) | रेलवे में अब अंग्रेजों के जमाने के बंद गले के कोट नजर नहीं आएंगे. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी घोषणा कर दी है. रेलवे अभी बदलाव के दौर से गुजर रहा है और ऐसे में बहुत कुछ बदल रहा है. नई-नई ट्रेनें चलाई जा रही है. ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने का प्रयास हो रहा है. इसी क्रम में बंद गले वाले कोर्ट अब रेलवे के अधिकारी- कर्मचारी नहीं पहन पाएंगे. रेल मंत्री के अनुसार हमें हर उस चीज को हटाना है, जो गुलामी की निशानी है. रेलवे ने गुलामी की मानसिकता से निकलने के क्रम में बंद गले के काले कोट को अलविदा कह दिया है.
रेल मंत्री की सुनें -गुलामी की मानसिकता को बदलना होगा
रेल मंत्री का मानना है कि हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी. गुलामी की सोच से बाहर निकलना होगा ,चाहे काम के तरीका हो या फिर हमारे पहनावे का. जानकारी के अनुसार सरकार का निर्णय सिर्फ रेलवे की वर्दी तक ही सीमित नहीं है. सरकार ऐसी पुरानी चीजों को पहचान रही है, जो अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है. इसमें विश्वविद्यालय में होने वाले दीक्षांत समारोह में पहने जाने वाले गाउन और टोपी भी शामिल है. साथ ही कई मौकों पर अधिकारियों को औपचारिक रूप से बंद गले वाला कोट पहनना पड़ता है. इसको भी बदलने पर विचार चल रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या दिया है निर्देश
सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी मंत्रियों और बड़े अधिकारियो को पुरानी प्रथाओं की पहचान करने और उनकी जगह भारतीय संस्कृति को दर्शाने वाले नए विकल्प बताने का निर्देश दिया है. रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों से औपनिवेशिक सोच को पूरी तरह पीछे छोड़ने का आह्वान करते हुए कहा है कि अंग्रेजों के जमाने का बंद गले का काला सूट अब रेलवे का औपचारिक पोशाक नहीं रहेगा. यह पहनावा अंग्रेजों ने शुरू किया था और अब इसे समाप्त किया जा रहा है. यह ड्रेस अब तक निरीक्षण, परेड, विशेष अवसरों एवं वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पहनी जाती थी. हालांकि ग्रुप-डी, ट्रैकमैन एवं तकनीकी स्टाफ पर यह लागू नहीं थी.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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