बड़ा सवाल : क्या पांडियन होंगे ओडिशा के अगले मुख़्यमंत्री, जानिए क्यों हो रही ऐसी चर्चाएं

    बड़ा सवाल : क्या पांडियन होंगे ओडिशा के अगले मुख़्यमंत्री, जानिए क्यों हो रही ऐसी चर्चाएं

    धनबाद(DHANBAD): जब से झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को ओडिशा  का राज्यपाल बनाया गया है, वहां कि  राजनीतिक गतिविधियों पर झारखंड की नजर टिकने लगी है.  झारखण्ड के लोग हर डेवलपमेंट की जानकारी ले रहे हैं और दे रहे है.  ओडिसा  के आईएएस अधिकारी बीके पांडियन को इस्तीफा देने के कुछ ही घंटे के बाद कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल गया है. इसको राजनितिक बदलाव से जोड़ कर देखा जा रहा है.   पांडियन ओडिशा के ताकतवर और समझदार अधिकारी माने जाते है.  मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर कुछ जिम्मेवारियां दी है.  पांडियन सोमवार को इस्तीफा दिया था और उसके 24 घंटे के बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल गया. 

    चर्चाओं का शुरू हो गया है दौर 
     
    अब इसके बाद से चर्चा का दौर शुरू हो गया, जितनी मुंह, उतनी तरह की बातें होने लगी.  बात तो यहां तक कहीं जा रही है कि स्वास्थ्य कारणों  से मुख्यमंत्री नवीन पटनायक 2024 के चुनाव के समय सीएम का पद छोड़ सकते है. ऐसे में उन्हें अपने उत्तराधिकारी की जरुरत होगी.  अगर ऐसा हुआ तो पांडियन को वह अपना  उत्तराधिकारी बना सकते है.   इसके लिए ही अभी से फील्डिंग सजाई जा रही है.  जल्दबाजी में उन्हें महत्वपूर्ण पद देने के बाद लोग अगले सीएम के रूप में उन्हें  देखने लगे है.  2022 के आईएएस अधिकारी हैं पांडियन, उन्हें पहले पंजाब कैडर मिला था.  लेकिन ओडिसा  के आईएएस अधिकारी सुजाता रावत के साथ उनका विवाह हुआ.  जिसके बाद इंटर स्टेट कैडर  एक्सचेंज पॉलिसी के तहत वह कैडर  बदलकर ओडिसा  आ गए.  उन्होंने साल 2002 से 2004 तक अपना करियर कालाहांडी जिले के धर्मपुर में उप जिलाधिकारी के रूप में शुरू किया.  इसके बाद 2005 से 200 7 तक मयूरभंज जिले के जिलाधिकारी रहे. 

    गंजाम में जिलाधिकारी के रूप में काम कर चुके है 

    9 अप्रैल 2007 से  29 अप्रैल 2011 तक गंजाम में जिलाधिकारी के रूप में काम किया.  गंजाम मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का चुनावी जिला रहा है. इस कारण वह मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से सीधे संपर्क में आ गए.  इसके बाद 2011 में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के निजी सचिव की जिम्मेदारी संभाली, अब उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल गया है. नवीन पटनायक के ताजा फैसले से कोई हैरान नहीं है, लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर लोगों में कई तरह के सवाल हैं. पटनायक ने अपने पर्सनल सेक्रेटरी वीके पांडियन को IAS की नौकरी से रिटायरमेंट लेने की इजाजत दी. उनका VRS मंजूर होते ही उन्हें अपना सलाहकार बना कर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया. पांडियन को ओडिशा के 5T कमीशन का चेयरमैन बनाया गया है. ये एक तरह से पांडियन का ही ड्रीम प्रोजेक्ट है.लोग बताते है कि ओडिशा के सियासत  में  दस सालों से पटनायक के बाद पांडियन ही सबसे ताकतवर माने जाते  रहे हैं. 

    मुख़्यमंत्री नवीन पटनायक बैचलर हैं

    नवीन पटनायक बैचलर हैं. उन्होंने अपने परिवार में भाई, बहन या फिर उनके बच्चों को राजनीति में नहीं आने दिया. उन्हें राजनीति अपने पिता और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक से विरासत में मिली. आम तौर पर सभी क्षेत्रीय पार्टियों में का नेतृत्व परिवार के पास ही रहा है. समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह के बाद अखिलेश यादव तो आरजेडी में लालू यादव के बाद तेजस्वी यादव और डीएमके में करूणानिधि के बाद स्टालिन.बीएसपी में मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी में नंबर दो की पोजीशन दे दी है. नीतीश कुमार और नवीन पटनायक का केस अलग है. नीतीश तो तेजस्वी को उत्तराधिकारी बनाने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन नवीन पटनायक ने अब तक ऐसा कोई एलान तो नहीं किया है. पांडियन को अगर पटनायक की राजनीतिक विरासत मिली तो क्या बीजू जनता दल बिखर सकता है या फिर वे अपने मिशन में कामयाब हो जाएंगे.यह भी सवाल अब अंगड़ाई लेने लगा है.

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  


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