कोयला उद्योग में आउटसोर्सिंग की खूब हो रही चर्चा, जाने कौन कंपनी है इसकी जन्मदात्री

    कोयला उद्योग में आउटसोर्सिंग की खूब हो रही चर्चा, जाने कौन कंपनी है इसकी जन्मदात्री

    धनबाद (DHANBAD): कोयला उद्योग में आज आउटसोर्सिंग की खूब चर्चा है. आउटसोर्सिंग का काम धड़ल्ले से चल रहा है. पोखरिया खदानों से कोयला निकासी का काम कर उत्पादन बढ़ाने की लगातार कोशिश की जा रही है.  यहां तक की भूमिगत खदानों में भी आउटसोर्सिंग कर्मियों को लगाया जा रहा है.  आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मियों को खदान के भीतर जाने की अनुमति डीजीएमएस से मिलती है अथवा नहीं, यह विवाद का मुद्दा हो सकता है लेकिन उत्पादन खूब हो रहा है.  

    एक समय में बीसीसीएल बीआईएफआर में थी 

    जानकार बताते हैं कि आउटसोर्सिंग की जन्मदात्री भी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (धनबाद) ही है.  बीसीसीएल के अवकाश प्राप्त अधिकारी रामानुज प्रसाद की माने तो सीएमडी  जब  पार्थो भट्टाचार्य थे , उस समय कंपनी बीआईएफआर(बीमार) में चली गई थी.  लग रहा था कि बीसीसीएल का अस्तित्व ही मिट जाएगा.  उस वक्त ओवरबर्डन हटाने के लिए आउटसोर्सिंग कंपनियों को लगाया गया था. ओवरबर्डन हटने से कोयला निकालने में सहूलियत होने लगी, धीरे-धीरे बीसीसीएल में यह परिपाटी बन गई और फिर देखते- देखते कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कंपनियों ने यही रास्ता अख्तियार कर लिया.  और अभी अधिकतर कोल्  कंपनियां आउटसोर्सिंग के भरोसे चल रही है.  

    कोयला उद्योग में तेजी से घटी है कर्मियों की संख्या 

    यह बात अलग है कि कोयला कंपनियों में अधिकारी-कर्मियो की संख्या कम होने के बावजूद आउट सोर्स के भरोसे उत्पादन पहले की अपेक्षा 6-7 गुना बढ़ गया है.  लेकिन इसका दुष्परिणाम भी कहीं ना कहीं देखने को मिल रहा है.  बिना वैज्ञानिक तरीके से कोयले की निकासी हो रही है.  अभी जिस ढंग से कोयले की निकासी हो रही है , उसकी तुलना लोग प्राइवेट मालिक से के समय से करने लगे है. इन सब का परिणाम यह हुआ है कि कोल माइन्स प्रोविडेंट फंड की वित्तीय स्थिति गड़बड़ा गई है.  एक समय में 8 लाख  कर्मियों की राशि कटकर कोल माइंस में जमा होती थी लेकिन अब संख्या घटकर दो लाख के करीब रह गई है.  ऐसे में कोल माइन्स प्रोविडेंट फंड को जितना पैसा मिलना चाहिए था, मिल नहीं रहा है. 

    कोल माइंस प्रोविडेंट फंड की बिगड़ रही हालत 
     
    नतीजा है कि कोल  पेंशनर्स की राशि  में कोई रिवीजन नहीं हो रहा है.  रिटायर्ड अधिकारी रामानुज प्रसाद की मानें तो एक समय ऐसा आएगा जब कोल माइन्स प्रोविडेंट फंड के पास पैसा ही नहीं रहेगा और यह संस्था डिफंक्ट हो जाएगी. आपको बता दे कि अभी हाल ही में कोयला मंत्री ने राज्य सभा में बयां दिया था कि कोल् पेंशनर्स की राशि में बदलाव नहीं होगा लेकिन 16 अगस्त को कोल माइन्स प्रोविडेंट फंड के ट्रस्टी बोर्ड की बैठक के अजेंडे में राशि बढ़ाने पर विचार का प्रस्ताव है. देखना होगा कि 16 अगस्त को क्या निर्णय होता है. 


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