धनबाद (DHANBAD): जिले में इन दिनों सोशल मीडिया और ग्राइंडर व पोलो जैसे समलैंगिक डेटिंग ऐप्स बेगुनाह युवाओं के लिए मौत का जाल बन चुके हैं. यहां पहले से एचआईवी संक्रमित कुछ साइको-क्रिमिनल्स अपनी बीमारी को हथियार बनाकर पढ़े-लिखे एमएसएम (Men who have sex with Men) युवाओं में जानबूझकर संक्रमण बांट रहे हैं. इसको लेकर धनबाद मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर में जब कुछ पीड़ित युवाओं की काउंसिलिंग भी हुई, तब डॉक्टरों के सामने इस खौफनाक और सोची-समझी साजिश का खुलासा हुआ, जिसने स्वास्थ्य महकमे को हिलाकर रख दिया है.
जानकारी के मुताबिक, इस घिनौने खेल के तहत अपराधी सबसे पहले डेटिंग ऐप्स पर शिकार तलाशते हैं और मीठी बातों से उनका भरोसा जीतते हैं. जब पीड़ित पूरी तरह झांसे में आ जाता है, तब आरोपी अपनी एचआईवी पॉजिटिव होने की सच्चाई छिपाकर असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाते हैं, जो कि सीधे-सीधे एक 'बायोलॉजिकल मर्डर' की तरह है. इसके कुछ दिनों बाद, आरोपी खुद पीड़ित को फोन कर नाटक रचता है कि उसकी तबीयत खराब होने पर वह एचआईवी पॉजिटिव निकला है और पीड़ित को भी जांच कराने की सलाह देता है. जब पीड़ित की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तब तक उसकी जिंदगी तबाह हो चुकी होती है.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, धनबाद में हर महीने औसतन 2 से 3 समलैंगिक युवा इस संक्रमण का शिकार हो रहे हैं, जिनमें अधिकांश हाई-प्रोफाइल और पढ़े-लिखे परिवारों से हैं. अपराधी जानते हैं कि सामाजिक रूढ़िवादिता और लोक-लाज के डर से ये युवा पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं कराएंगे. पीड़ितों की यही खामोशी अपराधियों का सुरक्षा कवच बनी हुई है. इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग और साइबर एक्सपर्ट पीयुष पांडेय ने युवाओं से वर्चुअल दुनिया में सतर्क रहने, असुरक्षित संबंधों से बचने और लोक-लाज छोड़ ऐसे अपराधियों को बेनकाब करने की अपील की है.

