सात समुंदर पार सक्षम बिखरेगा अपने सुरीले संगीत का जादू, जानिए झारखंड के इस लाल की सफलता की कहानी

    सात समुंदर पार सक्षम बिखरेगा अपने सुरीले संगीत का जादू, जानिए झारखंड के इस लाल की सफलता की कहानी

    सिमड़ेगा (SIMDEGA): लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती. इस बात को चरितार्थ कर दिखाया है. झारखंड सिमड़ेगा के प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा गांव कोलेबिरा के 14 वर्षीय बालक ने जिन्होंने अपनी सुरीले संगीत की बदौलत एक छोटे से गांव से निकलकर ऑस्ट्रेलिया और फिजी तक का सफर तय किया है. जो अपने सुरीले संगीत का जादू बिखेरने फिजी जा रहा है. जहां यह बालक तराना इंटरनेशनल के बैनर तले टीनएज रॉक स्टार शो में अपना जलवा दिखाएगा.

    जानिए कौन है सक्षम 

    हम बात कर रहे हैं सक्षम तिवारी की. जिनका कहना है संगीत एक ऐसी भाषा है जो पूरी दुनिया समझ सकती हैं. इन्होंने बचपन से ही अपनी मधुर आवाज के बल पर अपना लोहा मनवाया. सक्षम अभी तक कोलकाता, मुम्बई झारखंड, बिहार जैसे बड़े शहरों में 150 से अधिक लाइव शो कर चुकी है. इसके अलावा वॉइस ऑफ झारखंड रेडियो सिटी जेके इंटरनेशनल के विनर रह चुके हैं. वहीं सा रे गा मा लिटिल चैंप्स सुपरस्टार सिंगर के मुंबई ऑडिशन में भाग ले चुके हैं. इसके अलावा क्षेत्रीय भाषा में भी एक से एक बढ़कर संगीत इन्होंने पेश किए हैं. वही सावन के महीनों में अपनी सुरीली आवाज का जादू दूरदर्शन चैनल में बिखेरा. इन्हें लोगों की काफी सराहा मिली है. वही बड़े कलाकार मनोज तिवारी, श्रद्धा दास मालिनी अवस्थी,  अनूप जलोटा,  के साथ मंच साझा कर अपनी गायकी का क्षेत्र में लोहा मनवा चुके हैं. इसके अलावा यूट्यूब चैनल में भी इनके द्वारा गाए गए गाने को कई एक लाइक मिल चुके है. गांव का गुणवान यह गुदड़ी का लाल 4 वर्ष की उम्र में अपने मामा के ऑर्केस्ट्रा से अपनी गायकी की कैरियर की शुरुआत की थी जो 16 -18-19सितंबर को फिजी में और 24 सितंबर और 1 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया में, तराना इंटरनेशनल टीनएज रॉक स्टार शो में भाग लेकर रॉक स्टार बनने जा रहा है.  

    झारखंड में नहीं मिलता प्रोत्साहन

    सक्षम कहते हैं बस दुःख इस बात का है कि कलाकारों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए वो नहीं मिल पाता है. जबकि फिजी में इंडियन हाई कमीशन के द्वारा उन्हें सम्मानित किया जाएगा इसके अलावा बचपन की बातों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा उनका यह सफर उतना आसान नहीं था. संगीत को स्कूल में पढ़ाई को लेकर तालमेल बैठना शुरुआत में बहुत मुश्किल था. गाना गाने को लेकर कई लोग और रिश्तेदार भी पढ़ाई पर जोर देने और अच्छी नौकरी की बातें करने का कहते थे. लेकिन, उनके माता-पिता मामा व परिवार ने कभी मनोबल गिरने नहीं दिया.

    जिला में खुशी की लहर

    सक्षम के इस उपलब्धि के लिए जो एक गांव से निकलकर फिजी और ऑस्ट्रेलिया तक का सफर बहुत ही सराहनीय है. इनकी इस उपलब्धि के लिए सिमडेगा जिला में खुशी की लहर है.

    रिपोर्ट: अमित रंजन, सिमडेगा


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