रघुनाथपुर शिवालय की महिमा ऐसी कि महादेव के समक्ष जनजातीय समाज भी नवाते हैं शीश

    रघुनाथपुर शिवालय की महिमा ऐसी कि महादेव के समक्ष जनजातीय समाज भी नवाते हैं शीश

    चाईबासा(CHAIBASA): भारतीय संस्कृति में शिव की महिमा अपरंपार है और सावन महीने में इनकी आराधना को विशेष फलदायक माना जाता है. शिव की आस्था धार्मिक और जातीय बंधनों से भी मुक्त है. ऐसे ही एक अनोखा शिवालय है, जहां हिंदू-सनातनी के अलावे जनजातीय समाज के लोग भी उनकी श्रद्धा में अपने शीश नवाते हैं.  चाईबासा से छह किलोमीटर दूर रघुनाथपुर शिवालय (सिंहपोखरिया) की ऐसी महिमा है कि दशकों से यहां जनजातीय समाज के लोग भी पूजा-अर्चना कर रहे हैं.

    खुले आसमान के नीचे खेतों के पास शिवलिंग का आविर्भाव 

    यहां खुले आसमान के नीचे खेतों के पास शिवलिंग का आविर्भाव हुआ है. इसका प्रादुर्भाव कब हुआ था ये तो ठीक से कोई नहीं जानता है. पर स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि शिवलिंग की पूजा की परंपरा कई दशकों से जारी है. सावन महीने के अलावे महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है. चाईबासा और इसके आसपास के जनजातीय समाज के लोग भी पूरी भक्तिभाव से आराधना करते हैं और महादेव से मन्नत मांगते हैं. मान्यता है कि शिव के इस दरबार में पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना और जलाभिषेक से मनोकामना अवश्य पूरी होती है. संतान के इच्छुक श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में यहां आते हैं. अर्थात शिव के इस दरबार में धार्मिक और सांप्रदायिक सीमाएं मिट जाती है और एकमात्र श्रद्धा तथा भक्ति का ईश्वरीय मार्ग प्रशस्त हो जाता है. सबसे अनोखी बात ये है कि यहां मुख्य शिवलिंग के अलावे आसपास में छोटे-छोटे शिवलिंग का भी प्रादुर्भाव हुआ है. श्रद्धालु इनकी भी पूजा तथा जलाभिषेक करते हैं.

    अदिवासियों की जमीन पर है शिवलिंग

    यहां के सारे शिवलिंग स्थानीय सरना धर्मावलंबी ग्रामीणों के खेत तथा जमीन पर मौजूद हैं. जिन खेतों में शिवलिंग मौजूद हैं वहां धान की खेती होती है. फिर भी ग्रामीण इनको नुकसान से अछूता रखा है. आसपास गंदगी तथा शिवलिंग की चोरी ना हो, इसका भी ख्याल रखते हैं. इतना ही नहीं, सावन तथा महाशिवरात्रि में पूजा सामग्री की दुकानें भी यही लोग लगाते हैं और खरीददार हिंदू और आदिवासी दोनों होते हैं. श्रद्धालुओं के खाने-पीने की व्यवस्था भी स्थानीय लोग ही करते हैं. यहां शिवलिंग को म:देड यानी महादेव कहा जाता है. स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि अभी जो शिवलिंग यहां मौजूद है उससे भी बड़ा और मुख्य शिवलिंग पहले यहां हुआ करती थी. लेकिन अधर्मी लोगों ने इसे चुरा लिया. ग्रामीण बुजुर्ग बताते हैं कि कई दशक पूर्व चोरी की यह घटना हुई थी जिसके बाद इस घटना में शामिल अधर्मियों की एक-एक कर अकाल मृत्यु हो गयी थी. ग्रामीण बताते हैं कि चाईबासा के एक मंदिर में यह शिवलिंग आज भी स्थापित है. ग्रामीण बताते हैं कि महादेव की इच्छा के मुताबिक ही इस शिवालय को खुले आसमान के नीचे छोड़ा गया है. क्योंकि कई बार शिवलिंग की घेराबंदी तथा चहारदीवारी की कोशिश हुई लेकिन ग्रामीण सिर्फ इसलिये इसका विरोध कर देते हैं कि महादेव खुद उनके सपनों में आकर इसके लिये मना करते हैं. उनकी इच्छा खुले आसमान के नीचे रहने की है. इसलिये आजतक इस शिवालय के ऊपर न तो कोई छप्पर है और न ही कोई घेराबंदी.

    रिपोर्ट: संतोष वर्मा, चाईबासा  


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