झारखंड मुक्ति मोर्चा महाधिवेशन का पहला दिन खत्म,1932,ओबीसी आरक्षण,वक्फ कानून पर प्रस्ताव,जानिए क्या कुछ हुआ दिन भर

    झारखंड मुक्ति मोर्चा महाधिवेशन का पहला दिन खत्म,1932,ओबीसी आरक्षण,वक्फ कानून पर प्रस्ताव,जानिए क्या कुछ हुआ दिन भर

    रांची(RANCHI): झारखंड मुक्ति मोर्चा का केन्द्रीय महाधिवेशन का पहला दिन का सत्र खत्म हो गया. पहले दिन कई राजनैतिक प्रस्ताव पेश किए गए. जिसमें 1932 खातियान आधारित स्थानीय नीति,ओबीसी को 28 प्रतिशत आरक्षण,निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत स्थानीय को आरक्षण,परिसीमन का विरोध,वक्फ संसोधन का विरोध,झामुमो के संगठन का अन्य राज्यों में विस्तारीकरण  समेत कई प्रस्ताव पेश हुए. जिसपर चर्चा लंबी चर्चा हुई. साफ संकेत दिया है कि कैसे आने वाले दिनों में पार्टी काम करेगी. अधिवेशन की समाप्ति पर पार्टी के नेताओं ने अपनी अपनी बात रखी है.

    झामुमो नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि अब झामुमो राज्य की राजनीति से बाहर निकल कर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाएंगे. आदिवासी के हक अधिकार की बात शुरू से करते है. आदिवासी के हक अधिकार की लड़ाई को और तेजी से लड़ी जाएगी. इसके अलावा जो जंगल या अन्य जगह पर रहते है. उन्हे वन पट्टा देने का काम किया जाएगा. स्थानीय लोगों सभी निजी कंपनी में 75 प्रतिशत नौकरी में आरक्षण देने पर चर्चा हुई है. इसकेसाथ       वक्फ कानून के प्रस्तावित संसोधन को खारिज करते है. इसे नहीं मनेगे,फिलहाल यह मामला कोर्ट में विचारधीन है उसके बाद आगे की रणनीति तय होगी. लेकिन एक बात साफ है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा इस संसोधन का पुरजोर विरोध करेगी.      

    अब महाधिवेशन के दूसरे दिन संगठन को लेकर प्रस्ताव आएगा. जिसमें केन्द्रीय कमिटी का चयन किया जाना है. पार्टी सुप्रियो से लेकर कार्यकारी अध्यक्ष के नाम का प्रस्ताव लाया जाएगा. जिसपर चर्चा के बाद प्रस्ताव को पास किया जाएगा. जिसके बाद केन्द्रीय कमिटी का ऐलान होगा. सभी की नजर हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन पर है. आखिर किसे क्या जिम्मेवारी मिलेगी. यह सबसे बड़ी चर्चा में है.     

     


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