उपराजधानी में भी आदिवासी दिवस की धूम, 22 साल में कितनी बदली आदिवासियों की दशा और दिशा, पढ़िए खास रिपोर्ट में

    उपराजधानी में भी आदिवासी दिवस की धूम,  22 साल में कितनी बदली आदिवासियों की दशा और दिशा, पढ़िए खास रिपोर्ट में

    दुमका (DUMKA): आदिवासी समाज के अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी सुरक्षा के लिए प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के रूप में मनाया जाता है. संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से दिसंबर 1994 में 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के रूप में घोषित किया गया था. तब से 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा. आज विश्व आदिवासी दिवस है और इस मौके पर झारखंड की राजधानी से लेकर उपराजधानी तक कई कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं. दुमका में छात्र समन्वय समिति के बैनर तले यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा है. जहां एसपी महिला कॉलेज के सामने स्थापित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर छात्र समन्वय समिति के सदस्यों ने माल्यार्पण किया और वहां से जुलूस की शक्ल में शहर में स्थापित विभिन्न महापुरुषों की प्रतिमा पर माल्यार्पण के पश्चात एसपी कॉलेज सभागार पहुंचे. जहां कार्यक्रम का आयोजन किया गया. किस रूप में दुमका में यह कार्यक्रम मनाया जा रहा है, इसकी जानकारी छात्र नेता श्याम देव हेंब्रम ने दी.

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    आज भी हैं कई मूलभूत समस्याएं

    झारखंड राज्य आदिवासी बाहुल्य राज्य है. आदिवासियों के चहुंमुखी विकास के लिए बिहार से अलग झारखंड राज्य बना. राज्य बने लगभग 22 वर्ष होने को है. इन 22 वर्षों में आदिवासियों की दशा और दिशा कितनी बदली यह जानना बेहद जरूरी है. झारखंड की उपराजधानी दुमका है और दुमका जिला के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मूलभूत समस्याएं विद्यमान है. बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत समस्याओं से यहां के लोग जूझ रहे हैं. आदिवासियों के कल्याण के लिए सरकार कई योजनाएं चलाती हैं. फिर भी इसका लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा हैं. इसके लिए समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन सरकार, प्रशासन और समाज के शिक्षित वर्ग के लोगों को दोषी ठहरा रहे हैं.

    सरकार को कोस रहे लोग

    एक तरफ तो हम जश्न ए आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, वहीं दूसरी और आज भी दुमका के ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत समस्याएं यथावत है. इसको लेकर लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है. इसके लिए लोग सरकार को जमकर कोस रहे हैं. भारत में निवास करने वाले आदिवासियों के लिए इस वर्ष आदिवासी दिवस बेहद खास है, क्योंकि पहली बार आदिवासी समाज की कोई महिला राष्ट्रपति पद पर आसीन हुई है. पूरे समाज के लिए गर्व का विषय है, लेकिन पूरे समाज का उत्थान कैसे होगा यह आज भी यक्ष प्रश्न बना हुआ है.

    रिपोर्ट: पंचम झा, दुमका


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