अपराध की दुनिया छोड़ ग्लैमर की तरफ़ रुख कर रहे हैं धनबाद के माफियाओं के बाल बच्चे

    अपराध की दुनिया छोड़ ग्लैमर की तरफ़ रुख कर रहे हैं धनबाद के माफियाओं के बाल बच्चे

    धनबाद (DHANBAD): कोयलांचल में जिन पांच देवों ने माफिया का तमगा पाया था, उनके वंशजों की रुचि धीरे-धीरे अब बदल रही है.  उनका ध्यान ग्लैमर की ओर जा रहा है और यही कारण है कि धनबाद में फिल्मों की शूटिंग एक के बाद एक शुरू हुई है या होने जा रही है. अभी हाल ही में आदित्य पंचोली धनबाद आए थे और वह सिंह मैंशन गए थे. उन्होंने कहा कि स्वर्गीय सूर्यदेव  सिंह पर वह फिल्म बनाएंगे, इसके लिए वह जल्द ही फिर धनबाद आएंगे.  इधर सकलदेव सिंह के पुत्र रणविजय सिंह की भी रुचि फिल्मों की तरफ है और 'दोस्ती और प्यार' फिल्म की शूटिंग में वह  सहयोग कर रहे हैं.

    80 के दशक में भी धनबाद पर फिल्म बन चुकी है
     
    हालांकि 80 के दशक में भी धनबाद पर फिल्म बन चुकी है.  फिल्म का नाम था 'काला पत्थर' और उसमें अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा जैसे कलाकारों ने भूमिका निभाई थी.  फिल्म के निर्माता और निर्देशक यश चोपड़ा थे. यह फिल्म चास नाला हादसे पर केंद्रित थी. चासनाला हादसा 27 दिसंबर 1975 को हुआ था, जिसमें 350 से अधिक कोयला मजदूरों ने जल समाधि ले ली थी और काला पत्थर फिल्म इसी पर केंद्रीत थी.  कुछ दिन पहले अमिताभ बच्चन ने एक पोस्ट भी किया था, जिसमें काला पत्थर में काम करने के अलावा उन्होंने खुलासा किया था कि फिल्म इंडस्ट्री में आने के पहले धनबाद की कोलियारियों  में काम करते थे.  

    इनको मिला था माफिया का तमगा 

    कोयलांचल में जिन पांच देव  को माफिया का तमगा मिला था, उनमें सूर्यदेव सिंह ,सकलदेव सिंह, सत्यदेव सिंह, नवरंग देव सिंह, राजदेव राय शामिल थे. और भी लोग थे लेकिन लोग इन्हीं पांच के नाम गिनाते है. सूर्यदेव   सिंह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के गोनिया छपरा से साठ के दशक में झरिया के बोर्रागढ़ आए थे.  सकलदेव सिंह बिहार के छपरा जिले के  उर हरपुर गांव से धनबाद आए थे. उनके पिता मुखराम सिंह पहले से ही धनबाद में थे.  सत्यदेव सिंह छपरा के सिताबदियारा से धनबाद आए थे और धनबाद में ही उन्होंने पढ़ाई की थी.  नवरंग देव सिंह के बारे में कहा जाता है कि वह बिहार के गया जिला से धनबाद आए थे जबकि राजदेव राय, आजमगढ़ से धनबाद आए थे. पांचो देव जब अपनी ऊंचाई पर थे तो कोयलांचल में मार काट, गोली -बंदूक  की राजनीति खूब होती थी.  राजदेव राय और सकल देव सिंह की हत्या कर दी गई थी जबकि सूर्यदेव सिंह, सत्यदेव सिंह और नवरंग देव सिंह स्वाभाविक मौत मरे. 

    कई बदल लिए है और कुछ बदल रहे है तरीका 

    अब उनके वंशज अपना तरीका  बदल लिए हैं और धंधा व्यवसाय की ओर अपने को केंद्रित किए हुए हैं.  नवरंग देव सिंह और सत्यदेव सिंह का परिवार तो पूरी तरह से बिजनेस में रम गया है, जबकि राजदेव राय के परिवार वाले भी यूनियन तक ही सीमित है.  सकलदेव सिंह और सूर्यदेव  सिंह के परिवार वाले उनके द्वारा स्थापित यूनियन चला रहे हैं और कोलियरी के  ऊपर अभी भी इनका दबदबा है. धनबाद के बहुचर्चित वासेपुर पर भी फिल्म बन चुकी है.  वासेपुर के ही जीशान कादरी इस फिल्म में काम कर चुके हैं और उन्हीं की रुचि और मेहनत से यह फिल्म बन पाई थी.  हालांकि फिल्म की कहानी में लोचा की बात शुरू से ही कही जा रही थी.  कहा जा रहा था कि सूर्य देव  सिंह और वासेपुर के बीच कभी कोई टकराव नहीं हुआ.  उस समय वासेपुर की इतनी ताकत भी नहीं थी कि वह सूर्य देव सिंह से टकरा सके.  अलग बात  है कि सूर्यदेव सिंह को भले ही माफिया का तमगा मिला लेकिन वह बाहर से कठोर और हृदय से कोमल व्यक्तित्व के धनी थे.  लोग बताते हैं कि जो भी अपना दुख लेकर उन तक पहुंच गया, उन्हें कुछ ना कुछ लाभ मिल ही जाता था.  

    कोयलांचल के कलाकारों का झंडा अभी भी बुलंद 

    वैसे कोयलांचल के कई ऐसे कलाकार हैं जो बॉलीवुड में अभी भी झंडा गाड़े हुए हैं.  ऐसे कलाकारों में जीशान कादरी , म्यांग  चांग , चंद्रशेखर दत्ता, जावेद पठान, असीम मिश्रा, धीरज मिश्रा के नाम गिनाए जा सकते है.  कोयला नगर की एक लड़की स्वाति सेन भी फिल्म में अभिनव किया था.  अब सूचना मिल रही है कि वह फिल्म इंडस्ट्री को बाय बाय कर चुकी है.  इंडियन आइडल के नाम पर पूजा चटर्जी भी खूब सोहरत  बटोरी थी.   इतना ही नहीं  फिल्म प्रोडक्शन के नाम पर कोयलांचल के लोग ठगे  भी गए है.  जानकार बताते हैं कि एक  साल पहले धनबाद के सराय ढेला के एक व्यवसाई ने तीस लाख  से अधिक की ठगी की एफ आई आर सरायढेला थाने  में दर्ज कराई थी. 


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