दुमका में कौशल विकास योजना का हाल बेहाल, प्रशिक्षण प्राप्त कर रही छात्राओं को नहीं मिल रहा भोजन पानी 

    दुमका में कौशल विकास योजना का हाल बेहाल, प्रशिक्षण प्राप्त कर रही छात्राओं को नहीं मिल रहा भोजन पानी 

    दुमका(DUMKA): युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए कौशल विकास योजना चलाई जा रही है. जिसके तहत आवासीय प्रशिक्षण दिया जाता है. दुमका में कौशल विकास योजना की बदहाली की एक घटना सामने आई है. जहां प्रशिक्षण प्राप्त कर रही छात्राओं को जब 24 घंटे तक भोजन पानी नहीं मिला तो मामला नगर थाना पहुंच गया. 

    क्या है मामला 

    दुमका में आउटडोर स्टेडियम के समीप एमबीडी नामक संस्थान द्वारा कौशल विकास योजना के तहत लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई कढ़ाई का आवासीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है. यहाँ लगभग 80 लड़कियां प्रशिक्षण ले रही है. 25 मार्च की रात से इसका भोजन पानी बंद हो गया. 26 मार्च के दिन भर ये लड़कियां संस्थान में भोजन पानी का इंतजार करती रही. प्रबंधन को फोन कर भोजन पानी मांगती रही लेकिन जब रविवार दोपहर तक इन्हें खाना नसीब नहीं हुआ तो इनके सब्र का बांध टूट गया. बोरिया बिस्तर बांध कर सभी लड़कियां निकल पड़ी संस्थान से बाहर. डीसी चौक पहुच कर लड़कियां सड़क पर बैठ गयी. उसी समय गुजर रही नगर थाना की पुलिस ने जब लड़कियों के समूह को सड़क पर देखा तो पूछ ताछ शुरू की. मामला जानकर पुलिस सभी लड़कियों को समझा बुझा कर थाना लायी. 

    एसडीओ ने प्रबंधन को सारी व्यवस्था दुरुस्त करने का दिया निर्देश

    जिस वक्त लड़कियां थाना पहुचीं उस वक्त नगर थाना परिसर में शांति समिति की बैठक चल रही थी. बैठक में एसडीओ कौशल कुमार सहित कई वरीय अधिकारी मौजूद थे. एसडीओ ने घटना की जानकारी ली. प्रबंधन को फोन कर थाना बुलाया गया. प्रबंधन द्वारा बताया गया कि रसोईया के छोड़ कर चले जाने के कारण ये स्थिति उत्पन्न हुई है. एसडीओ ने प्रबंधन को तत्काल इनके लिए सारी व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया. साथ ही लड़कियों को अपना फोन नंबर भी दिया है और कहा अगर कोई परेशानी होती है तो संपर्क करें. पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि सारी व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया है . उन्होंने कहा कि अगर दोबारा ऐसी गलती होती है तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. 

    कौशल विकास के नाम पर  मची है लूट

    सवाल उठता है कि लड़कियां घर द्वार छोड़कर कुछ सीखने आयी है. अपने पैरों पर खड़ी होकर आत्मनिर्भर बनने आयी है. लेकिन क्या भूखे पेट रह कर अपने पैरों पर खड़ा हुआ जा सकता है. कौशल विकास के नाम पर गली मोहल्ले में संस्थान खुल गए है. इन संस्थान को सरकार से रुपया मिलता है. लेकिन देखा जाए तो कौशल विकास के नाम पर लूट मची है. कुछ सीखने की चाहत में लड़कियां छोटी छोटी समस्याओं को नजर अंदाज कर देती है. प्रशासनिक स्तर से ऐसे संस्थानों की जांच भी बहुत कम होती है. नतीजा संस्थान संचालक मालामाल हो रहे है. जरूरत है ऐसे संस्थानों पर पैनी नजर रखने की. 

    रिपोर्ट: पंचम झा 


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