गढ़वा जिले में पत्थर माफियाओं का आतंक, ब्लास्टिंग के दहशत में दर्जनों ग्रामीण घर छोड़ने को हो रहे मजबूर

    गढ़वा जिले में पत्थर माफियाओं का आतंक, ब्लास्टिंग के दहशत में दर्जनों ग्रामीण घर छोड़ने को हो रहे मजबूर

    गढ़वा (GARHWA):  गढ़वा जिले के रंका रामकंडा क्षेत्र में पत्थर माफियाओं का आतंक दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. यहाँ पर एक साथ दर्जनों माइनिंग और क्रसर प्लांट खुले हुए हैं, जिनके कारण ग्रामीणों के जीवन में भारी संकट पैदा हो चुका है. इन प्लांटों द्वारा किए जाने वाले विस्फोटों से पूरा क्षेत्र दहशत में है. विस्फोटों से ग्रामीणों के घरों की दीवारों में दरारें आ रही हैं, और उनके लिए अब अपने घरों में रहना मुश्किल हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि इन माफियाओं के अवैध खनन के कारण उनकी ज़िंदगी दूभर हो गई है. कई बार इस समस्या को लेकर खनन विभाग और जिला प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन किसी भी तरह की ठोस कार्रवाई नहीं की गई.

    खनन टास्क फोर्स की बैठक केवल खाना-पूर्ति तक सीमित रह जाती है, कार्यवाही की कोई उम्मीद नहीं दिखती. वहीं दूसरे ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें अपने घरों को छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. प्रशासन और विभागीय अधिकारियों के इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रहने के कारण ग्रामीणों में आक्रोश है. इतना ही नहीं, इन अवैध खनन कार्यों से पर्यावरण को भी भारी नुकसान हो रहा है, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी जारी है. अब ग्रामीणों के पास केवल एक ही रास्ता बचा है - अपने घरों को छोड़कर किसी सुरक्षित स्थान पर जाना.

    खनन के सवाल पर अधिकारी चुप्पी साध लेते है कहते है नियम के अनुसार हो रहा है. खनन पर यह सवाल उठता है कि क्या प्रशासन और खनन विभाग जागेगा और इस गंभीर समस्या का समाधान निकालेगा, या फिर ग्रामीणों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा?

    रिपोर्ट: धर्मेन्द्र कुमार


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