धनबाद में पकड़ाए साइबर अपराधियों की कहानी, पिता किसान और मजदूर लेकिन बेटे ठगी कर उड़ाते हैं गुलछरे 

    धनबाद में पकड़ाए साइबर अपराधियों की कहानी, पिता किसान और मजदूर लेकिन बेटे ठगी कर उड़ाते हैं गुलछरे 

    धनबाद(DHANBAD): धनबाद के कोला कुसमा से गिरफ्तार तीन साइबर अपराधियों ने अब तक दो करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की है. यह ठगी सिर्फ झारखंड के लोगों से ही नहीं बल्कि दूसरे प्रदेशों के लोगों से भी की गई है. इन तीनों अपराधियों के पिता किसानी और मजदूरी करते हैं, लेकिन यह अपराधी अपनी अय्याशी पर लाखों-करोड़ों फूंक देते थे. कोला कुसमा में किराए के मकान पर रहकर साइबर अपराध का काम करते थे. इन अपराधियों में अनिल कुमार महतो, सूरज कुमार मंडल और दीपक कुमार मंडल शामिल है. इनके मोबाइल से अय्याशी के सबूत पुलिस को मिले हैं .पुलिस को बताया था कि वह केवल 6 महीने से साइबर क्राइम कर रहे हैं लेकिन यह बात सामने आई है कि वह लगभग 3 साल से साइबर अपराध का काम कर रहे थे और लोगों को ठग रहे थे. पुलिस को इनके पास से 11 मोबाइल मिले हैं, जिनमें फ्लाइट से केरल के रिसोर्ट में मौज मस्ती करने, डांस बार में मजे किए जाने के सबूत मिले हैं .जिस मकान में तीनों रह रहे थे उस कमरे में 150 से अधिक बीयर की बोतलें, हुक्का, ब्रांडेड परफ्यूम आदि पुलिस को मिले थे. रिकॉर्ड के मुताबिक इनके खिलाफ साइबर क्राइम रेगुलेरिटी पोर्टल पर 30 मामले दर्ज हैं लेकिन इसके अलावा भी कई लोगों को ठगी का शिकार बनाया है. पूछताछ में कई लोगों को अपना साथी भी बताया है, जो टुंडी, जामताड़ा और देवघर के रहने वाले हैं. इनके साथ मिलकर तीनों साइबर ठगी  को अंजाम दे रहे थे. पकड़े गए साइबर अपराधियों के मोबाइल पर मोबाइल नंबरों का एक्सल शीट भी मिला है. जिसमें हजारों हजार नंबर है. धनबाद में रहकर तीनों दूसरे राज्यों के लोगों को लिंक भेज कर बिजली बिल, एटीएम कार्ड अपडेट करने का झांसा देकर ठगी का शिकार बनाते थे. बताया जाता है कि डार्क वेब के बिटकॉइन से मोबाइलों का सीरीज खरीद कर लोगों को ठगी का शिकार बनाने का काम करते थे. धनबाद पुलिस देवघर और जामताड़ा पुलिस के भी संपर्क में है.

    बता दें कि पहले जामताड़ा ही साइबर अपराधियों का गढ़ माना जाता था लेकिन अब यह देवघर, गिरिडीह और धनबाद भी बन गया है. धनबाद के टुंडी इलाके के लोग इस काम में अधिक सक्रिय हैं. इस काम के किंगपिन का ससुराल टुंडी में है, इसलिए टुंडी के लोग जल्द प्रभाव में आ जाते हैं.  इसके अलावा बिना किसी पूंजी के लाखों-करोड़ों कमाई की चाहत ने युवा वर्ग को इस अपराध की ओर आकर्षित किया है. देखते-देखते लाखों-करोड़ों कमाने की चाहत में युवा वर्ग इस धंधे में लग जा रहा है. ढंग तरीके बदलकर लोगों को ठगने का काम चल रहा है. धनबाद भी अब इसका सेंटर बनता जा रहा है. जरूरत है बिहार की तरह झारखंड में भी स्पेशल टास्क फोर्स बनाकर साइबर अपराधियों के  ताना-बाना को समूल नष्ट कर दिया जाए अन्यथा लोग तो इस ठगी के शिकार होंगे ही, झारखंड का युवा वर्ग भी गलत राह पर आगे बढ़ता जाएगा.

    रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह, धनबाद 


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