बुरे वक्त का साथी सोना के साठ साल का सफर: 1964 में 63 रुपए10 ग्राम वाला सोना पंहुचा 74000 

    बुरे वक्त का साथी सोना के साठ साल का सफर: 1964 में 63 रुपए10 ग्राम वाला सोना पंहुचा 74000 

    धनबाद(DHANBAD): सोना का आकर्षण पहले भी था और आज भी है. लेकिन अब यह निवेश की वस्तु नहीं रह गई है. लोगो की पॉकेट से दूर होती जा रही है. पहले लोग मुश्किल समय के लिए भी इसे  रखते थे. हाल के वर्षों में सोना ने किसी अन्य इन्वेस्टमेंट से आगे बढ़कर प्रदर्शन किया है. फिलहाल सोना प्रति 10 ग्राम 74000 की ओर बढ़ रहा है. कारण कई हो सकते है. कारण कई है भी, लेकिन आज का युवा वर्ग यह जानकर निश्चित रूप से आश्चर्य में  पड़ जाएगा कि  1964 में यह सोना मात्र  63 रुपए में 10 ग्राम मिलता था. उसके बाद सोने के मूल्य में जो बढ़ोतरी शुरु हुई ,वह आज भी जारी है. आंकड़ों पर भरोसा करें तो 1973 में सोना प्रति 10 ग्राम 278 रुपए में मिलता था.

     1979 में प्रति 10 ग्राम सोने की कीमत 937 थी
     
    1979 में प्रति 10 ग्राम सोने की कीमत 937 थी. फिर 1987 में इसकी कीमत में तेज वृद्धि हुई और यह 2570 रुपए प्रति 10 ग्राम पर  पहुंच गया. फिर 1998 में यह 4000 पार  कर गया. 2008 में इसकी कीमत प्रति 10 ग्राम 12,500 थी. 2019 में 35,220 प्रति 10 ग्राम थी. 2020 में 48, 650 रुपए प्रति 10 ग्राम इसकी कीमत थी. लेकिन 2024 में इसकी कीमत बढ़कर 73500 प्रति 10 ग्राम हो गई है. जानकारों  की माने तो सोने का मूल्य आगे भी अस्थिर रह सकता है. वजह इसके कई हो सकते है. त्योहारों के सीजन में, शादी विवाह के लग्न में सोने की डिमांड अधिक हो सकती है. इस वजह से दाम  में और वृद्धि हो सकती है. यह अलग बात है कि   अभी भी महिलाओं के लिए सोना सबसे महत्वपूर्ण धातु है. सोना खरीद के प्रति हर एक घर में महिलाओं का रुझान होता है. 

    बुरे वक्त का साथी भी होता है सोना 
     
    यह बुरे वक्त का साथी भी होता है. इन्वेस्टमेंट के ख्याल से भी लोग  सोना खरीदते है . यह अलग बात है कि सोने के गहने पहनकर  अब लोग  सड़क पर नहीं चलते. शादी विवाह में भी सोना पहनने से लोग  परहेज करते है. आज भी लोग पर्व त्यौहार के समय में सोने को खरीदना शुभ मानते है. शादी विवाह में तो इसे  शुभ माना ही जाता है. शरीर पर सोने के आभूषण पहनना प्राचीन समय से ही भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है. पहले के समय में स्त्री और पुरुष दोनों ही आभूषण धारण करते थे. लेकिन विशेष तौर पर आभूषण हमेशा स्त्रियों के लिए पसंद का  चीज रहा है. ज्यादातर सुहागन स्त्रियां सोने के गहने पहनती है. बात सिर्फ इन्वेस्टमेंट का नहीं है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोना भगवान विष्णु का प्रिया धातु है. इसके साथ ही सोना को मां लक्ष्मी का स्वरूप भी माना जाता है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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