साइन लैंग्वेज मूक बधिर बच्चों के लिए कामयाबी का रास्ता खोलता है ,जानिए किसने कही यह बात


धनबाद(DHANBAD): समावेशी शिक्षा के झरिया रिसोर्स सेंटर में शुक्रवार को सांकेतिक भाषा दिवस मनाया गया. कम सुनने व नहीं बोलने वाले मूक बधिर बच्चों को हियरिंग एंड उपलब्ध कराया गया. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 23 सितंबर 2018 को सांकेतिक भाषा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी. तब से प्रतिवर्ष साइन लैंग्वेज डे के रूप में इस तिथि को मनाया जाता है. रिसोर्स शिक्षक अखलाक अहमद ने कहा कि साइन लैंग्वेज का विकास होने से श्रवण बाधित दिव्यांगों को कम्युनिकेशन करने में आसानी होगी. वहीं उनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर कामयाबी का रास्ता भी खुलेगा.
सामान्य विद्यालय में पढ़ने लगे हैं मूक बधिर बच्चे
साइन लैंग्वेज से मूक बधिर बच्चे सामान्य विद्यालय में पढ़ रहे हैं. फ़िज़ियोथेरेपिस्ट डॉ मनोज सिंह ने कहा कि जो लोग सुनने व बोलने में सक्षम नहीं होते, उनका अपने हाथ, चेहरे और शरीर के हाव भाव से अपनी बात रखने का अलग ढंग होता है. जिसे साइन लैंग्वेज कहते हैं. कार्यक्रम में श्रवण बाधित दिव्यांग रानी कुमारी, नसरीन परवीन, शाहीन परवीन, मोहम्मद सादिक सुश्री चटर्जी आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे.
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