नोएडा के बहुचर्चित ट्विन टावर गिराने में झारखंड के वैज्ञानिक भी थे शामिल, जानें वे कौन और कहां के थे 

    नोएडा के बहुचर्चित ट्विन टावर गिराने में झारखंड के वैज्ञानिक भी थे शामिल, जानें वे कौन और कहां के थे 

    धनबाद (DHANBAD): नोएडा के बहुचर्चित ट्विन टावर गिराने में धनबाद के वैज्ञानिकों की भी भूमिका रही. धनबाद की केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (सिंफर) और सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, रुड़की को नोएडा का ट्विन टावर गिराने के पूरे अभियान की मॉनिटरिंग के लिए बतौर फीस 70 लाख मिले हैं. दोनों ही संस्थाएं सीएसआईआर की यूनिट है.  सिंफर के वैज्ञानिकों ने टावर में ब्लास्टिंग की डिजाइन एवं विस्फोट की मॉनिटरिंग की. आपको बता दें कि सीएसआईआर की धनबाद में केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान की प्रयोगशाला है.  

    सिंफर के दो वैज्ञानिक सहित 6  टेक्निकल सदस्य शामिल थे 

    सिंफर के दो वैज्ञानिक सहित 6 टेक्निकल सदस्यों ने इस काम में बिल्डिंग को धराशाई करने वाली अफ्रीकी कंपनी को तकनीकी तौर पर मदद की. अगल-बगल के भवनों की सुरक्षा में भी तकनीकी सहयोग किया. सिंफर की टीम में डॉ. सी सोमिलियाना (मुख्य वैज्ञानिक), डॉ. हर्ष वर्मा (सीनियर प्रधान वैज्ञानिक), डॉ. रंजीत पासवान, राकेश कुमार सिंह, पुष्पेंद्र पटेल एवं सैकत बनर्जी ने काम किया.  जानकारी के अनुसार  ब्लास्टिंग के बाद आसपास की भवन पूरी तरह सुरक्षित है. कुछ ब्लिडिंग में कांच आदि टूटे हैं ,बाकी कोई नुकसान नहीं हुआ है.  ट्विन टावर से 25 मीटर की दूरी पर स्थित गेल की पाइपलाइन भी पूरी तरह सुरक्षित है. गिराने में  कंपन तेज  हुआ लेकिन सबकुछ सामन्य  रहा.  कंपन यानी वाइब्रेशन मॉनिटरिंग के लिए 19 सिस्मोग्राफ लगाए गए थे. 


    the newspost app
    Thenewspost - Jharkhand
    50+
    Downloads

    4+

    Rated for 4+
    Install App

    Our latest news