डीसी के आश्वासन के बाद भी सारंडा के युवाओं को नहीं मिला रोजगार, तंगहाली में बीत रहा जिंदगी


चाईबासा(CHAIBASA): इस महंगाई वाली जिंदगी में बेरोजगारी बड़ी परेशानी है. चाहे वह शहर के लोग हो या गांव के सभी को अपना जीवन गुजारना मुश्किल हो गया है. ऐसी ही परेशानी से झारखंड के चाईबासा जिला के सारंडा के बेरोजगार गुजर रहे हैं. जिनके पास अपने क्षेत्र में रोजगार नहीं है. जिसकी वजह से इन्हें तंग हाली में अपना जीवन जीना पड़ रहा है. हालत ऐसे हैं कि इन्हें खाने का एक वक्त भोजन और पहनने के लिए ढंग के कपड़े तक नसीब नहीं हो रहा है.
पिछले वर्ष जुलाई में इनलोगों को वन आधारित रोजगार से जोड़ने के लिए उपायुक्त अनन्य मित्तल ने सेल समेत अन्य खदान प्रबंधनों के साथ बैठक कर उस दिशा में सकारात्मक प्रयास तेज करने का आदेश दिया था. उपायुक्त के आदेश के एक वर्ष बीत जाने के बावजूद भी सारंडा के ग्रामीण बेरोजगारों को रोजगार से जोड़ने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया.
जंगल में वनोत्पाद का है भंडार
उल्लेखनीय है कि हर मौसम में सारंडा जंगल में कुछ न कुछ वनोत्पाद उपलब्ध रहता है. लेकिन इसके लिये कहीं भी प्रोसेसिंग प्लांट, स्थायी क्रय-विक्रय केन्द्र, बड़ा बाजार व यातायात की सुविधा नहीं है. सारंडा में चिरौंजी, आम, कटहल, महुआ, जामुन, इमली, सरगी (साल) बीज आदि भारी मात्रा में पाएं जाते हैं. लेकिन इसकी प्रौसेसिंग व बिक्री की कोई व्यवस्था यहां नहीं की गई है. इस वजह से प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये के वनोत्पाद पेड़ या जंगल में ही सड़ कर नष्ट हो जाते हैं. इसके अलावा कुछ बाहरी व्यापारी अपने एजेंट के माध्यम से ग्रामीणों से औने-पौने दाम में चिरौंजी आदि वनोत्पाद को चावल से बदल कर ले जाते हैं. जिस वजह से इसका उचित मूल्य भी ग्रामीणों को नहीं मिल पाता.
तत्कालीन डीएफओ के दावें भी निकले झूठे
सारंडा वन प्रमंडल के तत्कालीन डीएफओ रजनीश कुमार ने दो वर्ष पूर्व कहा था कि वन विभाग सारंडा के बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु वन समितियों व व्यापारियों के बीच कड़ी का काम कर रहा है. सारंडा में वन औषधियों का भंडार है. इसलिए औषधि युक्त सामान बनाने के लिए अनेक कंपनियों ने लाईसेंस के लिये आवेदन दिए है. उन्होंने कहा था कि सारंडा में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने हेतु ब्लू प्रिंट व तमाम झरने, खूबसूरत स्थलों का रोडमैप तैयार कर लिया गया है. वे वन समितियों के पांच-पांच लोगों को गाईड के रूप में प्रशिक्षित कर रहे हैं. किरीबुरु वन विभाग कार्यालय में जल्द हेल्प डेस्क का निर्माण कर इको टूरिज्म का बढ़ावा दिया जायेगा. लेकिन दुःख की बात यह है कि वन विभाग की तमाम घोषणायें व दावें अभी तक पूरी तरह से गलत और खोखली साबित हो रही है.
बाजार उपलब्ध कराने पर सैकड़ों बेरोजगारों को मिलेगा रोजगार
सारंडा में यदि सरकार और खदान प्रबंधनों के सहयोग से प्रोसेसिंग प्लांट, आम, कटहल, ईमली आदि का आचार, जैम, अमावट, आम चूर्ण, इमली चटनी, सिरका आदि बनाने का प्रशिक्षण व प्लांट और व्यापक बाजार उपलब्ध करा दिया जाये तो सैकड़ों बेरोजगारों को रोजगार मिल सकेगा, हालांकि सरकार को इस बात का भी ध्यान देना होगा की तमाम प्रकार के वनोत्पाद का उचित मुल्य निर्धारित कर दें, ताकि ग्रामीणों को बाहरी व्यापारी धोखा नहीं दे पाये. साथ ही जो भी इस कारोबार से जुड़े प्लांट आदि लगाने के लिए आगे आये, वह ग्रामीणों द्वारा लाकर बेचे जाने वाले वनोत्पाद का उचित नकद मुल्य उसी समय ग्रामीणों को उपलब्ध कराए.
रिपोर्ट: संदीप गुप्ता, गुवा(चाईबासा)
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